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Friday, 14 July 2017

माँ


गिनती नही आती मेरी माँ को यारों,
मैं एक रोटी मांगता हूँ वो हमेशा दो ही लेकर आती है.
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जन्नत का हर लम्हा….दीदार किया था
गोद मे उठाकर जब मॉ ने प्यार किया था
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सब कह रहें हैं
              आज माँ का दिन है
वो कौन सा दिन है..
              जो मां के बिन है
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 *सन्नाटा छा* गया *बटवारे* के *किस्से* में...

जब *माँ* ने पूछा *मैं* हूँ किसके *हिस्से* में.....!!!
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*✍.... घर की इस बार*

*मुकम्मल तलाशी लूंगा!*

*पता नहीं ग़म छुपाकर*

*हमारे मां बाप कहां रखते थे...?*
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 *एक अच्छी माँ हर किसी*
*के पास होती है लेकिन...*

*एक अच्छी औलाद हर*
*माँ के पास नहीं होती...*
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जब जब कागज पर लिखा , मैने 'माँ' का नाम 
कलम अदब से बोल उठी , हो गये चारो धाम
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माँ से छोटा कोई शब्द हो तो बताओ

उससे बडा भी कोई हो तो भी बताना.....
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मंजिल दूर और सफ़र बहुत है .
छोटी सी जिन्दगी की फिकर बहुत है .
मार डालती ये दुनिया कब की हमे .
लेकिन "माँ" की दुआओं में असर बहुत है .
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*माँ को देख,*
*मुस्कुरा लिया करो..*

*क्या पता किस्मत में*
*हज़ लिखा ही ना हो*
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*​मौत के लिए बहुत रास्ते हैं ​पर*....
  *जन्म लेने के लिए ​केवल*
           *माँ​​* ✍.
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माँ के लिए क्या लिखूँ ? माँ ने खुद मुझे लिखा है 
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*दवा असर ना करें तो* 
 *नजर उतारती है*

 *माँ है जनाब...*
 *वो कहाँ हार मानती है*।



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