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Saturday, 24 June 2017

Story in Hindi ......रेगिस्तान


 एक बार एक व्यक्ति रेगिस्तान में कहीं भटक गया।उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी बहुत चीजें थीं,वो जल्द ही ख़त्म हो गयीं और पिछले दो दिनों से वह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था।वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घण्टों में अगर उसे कहीं से पानी नहीं मिला तो उसकी मौत निश्चित है। पर कहीं न कहीं उसे ईश्वर पर यकीन था कि कुछ चमत्कार होगा और उसे पानी मिल जाएगा।तभी उसे एक झोँपड़ी दिखाई दी । उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ।पहले भी वह मृगतृष्णा और भ्रम के कारण धोखा खा चुका था,पर बेचारे के पास यकीन करने के अलावा कोई चारा भी तो न था।आखिर यह उसकी आखिरी उम्मीद जो थी।
वह अपनी बची खुची ताकत से झोँपडी की तरफ चलने लगा। जैसे-जैसे करीब पहुँचता, उसकी उम्मीद बढती जाती और इस बार भाग्य भी उसके साथ था। सचमुच वहाँ एक झोँपड़ी थी । पर यह क्या ? झोँपडी तो वीरान पड़ी थी,मानो सालों से कोई वहाँ भटका न हो। फिर भी पानी की उम्मीद में वह व्यक्ति झोँपड़ी के अन्दर घुसा, अन्दर का नजारा देख उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ।
वहाँ एक हैण्ड पम्प लगा था। वह व्यक्ति एक नयी उर्जा से भर गया।पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसता वह तेजी से हैण्ड पम्प को चलाने लगा लेकिन हैण्ड पम्प तो कब का सूख चुका था। वह व्यक्ति निराश हो गया, उसे लगा कि अब उसे मरने से कोई नहीं बचा सकता।वह निढाल होकर गिर पड़ा।
तभी उसे झोँपड़ी की छत से बंधी पानी से भरी एक बोतल दिखाई दी । वह किसी तरह उसकी तरफ लपका और उसे खोलकर पीने ही वाला था कि तभी उसे बोतल से चिपका एक कागज़ दिखा उस पर लिखा था - *"इस पानी का प्रयोग हैण्ड पम्प चलाने के लिए करो और वापिस बोतल भरकर रखना ना भूलना ?"
यह एक अजीब सी स्थिति थी। उस व्यक्ति को समझ नहीं आ रहा था कि वह पानी पीये या उसे हैण्ड पम्प में डालकर चालू करे। उसके मन में तमाम सवाल उठने लगे,
अगर पानी डालने पर भी पम्प नहीं चला।
अगर यहाँ लिखी बात झूठी हुई और क्या पता जमीन के नीचे का पानी भी सूख चुका हो।
लेकिन क्या पता पम्प चल ही पड़े,
क्या पता यहाँ लिखी बात सच हो, वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे ?
फिर कुछ सोचने के बाद उसने बोतल खोली और कांपते हाथों से पानी पम्प में डालने लगा। पानी डालकर उसने भगवान से प्रार्थना की और पम्प चलाने लगा। एक, दो, तीन और हैण्ड पम्प से ठण्डा-ठण्डा पानी निकलने लगा।
वह पानी किसी अमृत से कम नहीं था। उस व्यक्ति ने जी भरकर पानी पिया, उसकी जान में जान आ गयी।दिमाग काम करने लगा।उसने बोतल में फिर से पानी भर दिया और उसे छत से बांध दिया।जब वो ऐसा कर रहा था, तभी उसे अपने सामने एक और शीशे की बोतल दिखी। खोला तो उसमें एक पेंसिल और एक नक्शा पड़ा हुआ था, जिसमें रेगिस्तान से निकलने का रास्ता था।
उस व्यक्ति ने रास्ता याद कर लिया और नक़्शे वाली बोतल को वापस वहीँ रख दिया। इसके बाद उसने अपनी बोतलों में (जो पहले से ही उसके पास थीं) पानी भरकर वहाँ से जाने लगा। कुछ आगे बढ़कर उसने एक बार पीछे मुड़कर देखा, फिर कुछ सोचकर वापिस उस झोँपडी में गया और पानी से भरी बोतल पर चिपके कागज़ को उतारकर उस पर कुछ लिखने लगा। उसने लिखा - *"मेरा यकीन करिए यह हैण्ड पम्प काम करता है।
यह कहानी सम्पूर्ण जीवन के बारे में है।
यह हमें सिखाती है कि बुरी से बुरी स्थिति में भी अपनी उम्मीद नहीं छोडनी चाहिए और 
इस कहानी से यह भी शिक्षा मिलती है कि कुछ बहुत बड़ा पाने से पहले हमें अपनी ओर से भी कुछ देना होता है।जैसे उस व्यक्ति ने नल चलाने के लिए मौजूद पूरा पानी उसमें डाल दिया।
देखा जाए तो इस कहानी में पानी जीवन में मौजूद महत्वपूर्ण चीजों को दर्शाता है, कुछ ऐसी चीजें जिनकी हमारी नजरों में विशेष कीमत है।
किसी के लिए मेरा यह सन्देश ज्ञान हो सकता है तो किसी के लिए प्रेम तो किसी और के लिए पैसा।
यह जो कुछ भी है, उसे पाने के लिए पहले हमें अपनी तरफ से उसे कर्म रुपी हैण्ड पम्प में डालना होता है और फिर बदले में आप अपने योगदान से कहीं अधिक मात्रा में उसे वापिस पाते हैं।
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एक दरोगा संत दादू की ईश्वर भक्ति और सिद्धि से बहुत प्रभावित था !
उन्हें गुरु मानने की इच्छा से वह उनकी खोज में निकल पड़ा !लगभग आधा जंगल पार करने के बाद दरोगा को केवल धोती पहने एक साधारण-सा व्यक्ति दिखाई दिया !वह उसके पास जाकर बोला -क्यों बे तुझे मालूम है कि संत दादू का आश्रम कहाँ है ?
वह व्यक्ति दरोगा की बात अनसुनी कर के अपना काम करता रहा !भला दरोगा को यह सब कैसे सहन होता ?लोग तो उसके नाम से ही थर-थर काँपते थे !उसने आव देखा न ताव लगा ग़रीब की धुनाई करने !
इस पर भी जब वह व्यक्ति मौन धारण किये अपना काम करता ही रहा तो दरोगा ने आग बबूला होते हुए एक ठोकर मारी और आगे बढ़ गया !
थोड़ा आगे जाने पर दरोगा को एक और आदमी मिला !दरोगा ने उसे भी रोक कर पूछा -क्या तुम्हें मालूम है संत दादू कहाँ रहते है ?वह व्यक्ति बोला -उन्हें भला कौन नहीं जानता ?वे तो उधर ही रहते हैं जिधर से आप आ रहे हैं !यहाँ से थोड़ी ही दूर पर उनका आश्रम है !मैं भी उनके दर्शन के लिये ही जा रहा था आप मेरे साथ ही चलिये !दरोगा मन ही मन प्रसन्न होते हुए साथ चल दिया !
राहगीर जिस व्यक्ति के पास दरोगा को ले गया उसे देख कर वह लज्जित हो उठा क्योंकि संत दादू वही व्यक्ति थे जिसको दरोगा ने मामूली आदमी समझ कर अपमानित किया था !वह दादू के चरणों में गिर कर क्षमा माँगने लगा ;बोला -महात्मन मुझे क्षमा कर दीजिये मुझसे अनजाने में अपराध हो गया !
दरोगा की बात सुनकर संत दादू हँसते हुए बोले -भाई इसमें बुरा मानने की क्या बात ?कोई मिट्टी का एक घड़ा भी ख़रीदता है तो ठोक बजा कर देख लेता है फिर तुम तो मुझे गुरु बनाने आये थे !
संत दादू की सहिष्णुता के आगे दरोगा नतमस्तक हो गया!

अरुंधती राय ने जब अजीत डोवाल (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार⁠⁠⁠⁠ ) को दी बिन मांगी सलाह तब श्री अजीत डोवाल ने उन्हें दिया वो जवाब जो पढ़ कर आप हो जायेंगे गौरवान्वित..

अरुंधती राय ने जब अजीत डोवाल (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार⁠⁠⁠⁠ ) को दी बिन मांगी सलाह तब श्री अजीत डोवाल ने उन्हें दिया वो जवाब जो पढ़ कर आप हो जायेंगे गौरवान्वित.. पढ़े एक एक शब्द

अरुंधती रॉय अब शायद किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं , भले ही कोई उन्हें किसी भी प्रकार के बयानों और कामों के लिए जाने.. उनके सेना के जवानो के लिए , कश्मीरी पत्थरबाज़ों के लिए हो , भारत के प्रधानमंत्री के लिए हो या हिन्दू और हिंदुत्व के लिए हो .. उनके बयानों से लगभग सभी लोग वाकिफ हैं .. JNU से ले कर कश्मीर तक के मुद्दे पर उनके बयानों ने उन्हें सदा ही सुर्खियों में रखा ..

उन्ही अरुंधति ने भारत के NSA अजीत डोवाल को एक बिन मांगी सलाह जब दी तब अजीत डोवाल ने उन्हें प्रतिउत्तर दिया और वो प्रतुत्तर अपने आप में एक नजीर बन गयी है जिसे पढ़ने के बाद शायद उन्हें सही और सटीक जवाब मिल गया हो .

आइये पढ़िए उस प्रतुत्तर को हिंदी में जो है खुद में एक नजीर . ...

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार,दक्षिण ब्लॉक,
रायसीना हिल,नई दिल्ली -११००११

प्रिय चिंतित नागरिक,भारतीय सेना द्वारा हिरासत में लिए गए, और बाद में राष्ट्रीय सुधार प्रणाली में स्थानांतरित किये गए, आईएसआईएस और एलईटी आतंकवादियों के उपचार को लेकर आपने गहन चिंता व्यक्त करते हुए हाल ही में जो पत्र लिखा, उसके लिए धन्यवाद ।

हमारे प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और आपके अभिमत को नई दिल्ली में स्पष्टता से सुना और समझा गया है । आप जैसे नागरिकों की चिंताओं का धन्यवाद; और आपको जानकर खुशी होगी कि हम राष्ट्रीय रक्षा विभाग में एक नया विभाग बनाने जा रहे हैं, जिसे 'लिबरल्स एक्सेप्ट रिस्पांसिबिलिटी फॉर किलर्स' (हत्यारों की जिम्मेदारी स्वीकारते उदारवादी) के नाम से जाना जाएगा, संक्षेप में कहें तो - एलएआरआर ।इस नए कार्यक्रम के दिशानिर्देशों के अनुसार, हमने एक आतंकवादी को अपने यहाँ से हटाकर उसे आपकी व्यक्तिगत देखभाल में रखने का निर्णय लिया है। आपके उस बंदी को चुन लिया गया है और अगले सोमवार को उसे भारी सशस्त्र बल के साथ मुंबई में आपके घर स्थानांतरित कर दिया जाएगा ।

अली मोहम्मद अहमद बिन महमूद (आप उसे केवल अहमद कह सकती हैं) की देखभाल आपके द्वारा दिए गए शिकायत पत्र में उल्लेखित मानकों के अनुरूप की जानी है! संभवतः आपके लिए यह जरूरी होगा कि आप इस कार्य में सहयोग के लिए कुछ सवैतनिक सहायकों की व्यवस्था करें | हम यह सुनिश्चित करने के लिए साप्ताहिक निरीक्षण का आयोजन करेंगे कि अहमद की देखभाल आपके द्वारा पत्र में सुझाये गए मानकों के अनुरूप हो रही है, अथवा नहीं । यद्यपि अहमद का व्यवहार अत्यंत असामाजिक और बेहद हिंसक है, फिर भी हम आशा करते हैं कि आप इस व्यक्ति की इन चारित्रिक दुर्बलताओं को अपनी संवेदनशीलता से दूर करने में सफल होंगी, जैसा कि आपने अपने पत्र में सहज attitudinal problem (व्यवहार संबंधी समस्या) बताते हुए उल्लेख किया है । शायद आप सही हों और ये समस्याएं आपके बताये अनुसार महज सांस्कृतिक अंतर ही हों ।

हमारा मानना है कि आपकी योजना "परामर्श और गृह विद्यालय" की पेशकश करने की हैं। 'आपका दत्तक आतंकवादी केवल हाथों के द्वारा निपटने में बहुत ही कुशल है और पेंसिल या नेल कटर जैसी सामान्य बस्तुओं की मदद से ही मानव जीवन का अंत कर सकता है । हमारी सलाह है कि आप अपने अगले योग समूह में, उसे उसके इस कौशल का प्रदर्शन करने को न कहें ।अपने मित्रों, पड़ोसियों या रिश्तेदारों को सचेत रखें क्योंकि आपके घर आया यह अतिथि उत्तेजित या हिंसक भी हो सकता है, लेकिन हमें यकीन है कि आप उसके साथ तर्क कर समझा सकती हैं। वह आम घरेलू उत्पाद से विस्फोटक उपकरणों की एक विस्तृतसंरचना बनाने में भी विशेषज्ञ हैं, अतः शायद आप उन वस्तुओं को लॉक करके रखना पसंद करें, क्योंकि आपकी राय के अनुसार यह चीजें उसे उत्प्रेरित या कि उत्तेजित कर सकती हैं |अहमद आप या आपकी बेटियों के साथ यौन विषय को छोड़कर अन्य किसी विषय पर बातचीत करना पसंद नहीं करेंगे, क्योंकि वह महिलाओं को संपत्ति का एक मानव रूप मानते है । जिसे उनके साथ यौन संबंधों से इनकार का कोई अधिकार नहीं है। यह उनके लिए एक विशेष रूप से संवेदनशील विषय है और उन्हें उन महिलाओं के साथ हिंसक प्रवृत्तियों प्रदर्शित करने के लिए जाना जाता है, जो उनके ड्रेस कोड का अनुपालन करने में असफल रहती हैं, क्योंकि वे महिलाओं हेतु उपयुक्त पोशाक की "अनुशंसा" करते हैं ।मुझे यकीन है कि आपपूरे समय बुरका का लुत्फ़ लेंगी । बस याद रखें कि यह आपके पत्र में वर्णित 'उनकी संस्कृति और धार्मिक विश्वासों के सम्मान' का हिस्सा है।आपके द्वारा व्यक्त की गई चिंता के लिए पुनः धन्यवाद |हम वास्तव में सराहना करते हैं जब आप जैसे लोग हमें अपना काम उचित तरीके से करने के लिए निर्देशित करते हैं और हमारे अधीनस्थों की देखभाल के लिए आगे आते हैं | आप अहमद की अच्छे से देखभाल करें और याद रखें कि हम भी देख रहे होंगे।

सौभाग्य आपके साथ हो और ईश्वर आप पर कृपा करें..

सौहार्द के साथ,

अजित डोवाल 
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार⁠⁠⁠⁠