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Thursday, 23 March 2017

A request to public by a high court judge!


Dear all citizens , please don't visit Govt./PRIVATE/Municipal Hospitals , be warned, there are monsters , demons and evil doctors sitting there , trained and qualified to kill you .

You are more knowledgeable than them because you got your Degree in Medicine from University of Google.

They only study medicine for over 5 years , read only about 150 books and are taught and trained by senior professors who have only 30 or 40 years experience.

The Doctors there are the fools of highest order, they work minimum 18 hours a day , they are on a crash diet , sometimes manage to have 1 proper meal in a day. Don't ask about their night life, always loafing around in the Hospital , and they get 5 to 6 hours undisturbed sleep once in 2 days or so , such a spoilt bunch of brats. They wake up around 6 AM and skip breakfast to save money , straight go to the ward and disturb all the patients to know about their well being and then to OPD--> Lab.-->X-ray--> don't care about lunch, such a irresponsible humans.

Most of the equipments are either defunct or in short supply, these idiots Doctors can't even provide them for patients.

Emergency calls usually come past midnight , that attend because they have nothing else to do.

They have palatial accommodation in their quarter (1/4th) of the size of a billiards table with twin sharing basis , un - hygienic common bathrooms, yet they are thankless.

Dear patients learn from ideals political leaders who don't get their treatment done in such hospitals and go abroad or to the corporate Hospitals and pay high fee...
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Narendra Modi :- " At this moment , India stands with U.K. in the fight against terror . "

Theresa May :- " Stand with the doctors of yours country first , sir "
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चिकित्सक मरीज को नहीं बचा पाया ,
हमने उसकी मरम्मत कर दी। 
जो बात हर तरह से गुंडागर्दी है ,
हमने तर्क सम्मत कर दी।
परिवार में फिर कोई बीमार न होगा ,
ये गारंटी है क्या ,
हम जैसे पिलपिले ने भी 
मारपीट की हिम्मत कर दी।
जब चिकित्सकों को अपमानित कर ,
यूं लताड़ा जायेगा ,
डॉक्टर मरीज के रिश्ते का 
संतुलन बिगाड़ा जाएगा।
तो कोई डॉक्टर इमरजेंसी में ,
घर से बाहर आकर ,
खामख्वाह क्यों आपके 
जूते खायेगा।
जैसे आपलोग घायल को 
सड़क पर मरने देते हो। 
माबाप को जीते जी मारकर 
वृद्धाश्रम में कैद कर देते हो।
जो आपके गू मूत को छूता आपकी
पीड़ा पर रात भर जाग जाता है ,
उसको भी तुम अपनी ही राह 
धकेल देते हो।
हिम्मत है तो पुलिस के थानेदार 
को पीट कर दिखाओ ,
या किसी सरकारी कर्मचारी पर 
अपना हाथ आजमाओ।
जमानत को तरस जाओगे 
पिछवाड़ा लाल कर दिया जायेगा ,
ऐसे किसी की शराफत का 
नाजायज फायदा न उठाओ।
ऐसा ही रहा तो देखना ,
तुमको मरते समय इलाज नसीब न होगा। 
जो बचाने की कोशिश करे खुद पिटे ,
ऐसा डॉक्टर तूने छोड़ा ही न होगा।
अगर किसी दिन तेरा बच्चा बीमार हुआ 
डॉक्टरों की हड़ताल होगी ,
नोटों की गड्डी लेकर घूमेगा ,

कोई चिकित्सक करीब न होगा।
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भारत को डाक्टरों की कोई जरूरत नहीं। ओझा वैद्य हकीम होम्योपैथ नेचुरोपैथ योगाचार्य सभी तो हैं।
उसके बाद आईएएस नेता मंत्री और अदालतें सभी तो हैं। ऐसे में डाक्टर बेमतलब उछल कूद कर रहे हैं।
जायें भगवद्गीता पढ़ें। 

न कोई पैदा होता है, न कोई मरता है। न तू किसी को मार सकता है, न बचा सकता है। आत्मा अजर अमर है। फिर नश्वर देह के लिये क्या रोना !!
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Stop Vioence Against Doctors
A poem by Dr Praveen.
नश्तर चुभोया भी है तो दर्द मिटाने के लिये,
घाव दिये भी हैं तो सिर्फ़ घाव सुखाने के लिये.
रातें जागी है तुम्हें चैन से सुलाने के लिये,
बेहोश किया है तुम्हें होश में लाने के लिये
ख़ून बहाया तुम्हारा नया ख़ून बनाने के लिये,
रंगे ख़ून से हाथ, जीवन में नये रंग भरने के लिये.
कोसा, कभी डांटा, तुम्हें तुम्हारी तंदुरुस्ती के लिये,
डराया-धमकाया भी, तुम्हारी चुस्ती-दुरुस्ती के लिये.
पिलायी है कड़वी दवा, ज़िंदगी का शहद पीने के लिये,
फूंकी है मुंह से मुंह में हवा, फिर ज़िंदगी जीने के लिये.
कभी तोड़ी है कुछ हड्डियां कुछ व्यंग सुलझाने के लिये,
झिंझोड़ा है तेरे ज़हन को, कुछ फ़ितूर मिटाने के लिये.
क्या पढ़ के रातें काली की, आंखें काली करवाने के लिये,
क्या इसलिये बने हैं डॉक्टर, लोगों की मार खाने के लिये,
डॉक्टर के कर्मों को ना देख तू क़ीमत के चश्में से ऐ दोस्त,

आधी उमर गुज़ार दी है, ‘प्रवीण’, ये हुनर कमाने के लिये.
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ब्रेकिंग न्यूज़
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