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Tuesday, 21 March 2017

*मत मारो डॉक्टर को*


*मत मारो डॉक्टर को*




मत मारो लोगो इनको 
ये पहले से है मरे हुये
काम और पढाई के 
बोझ के नीचे दबे हुये

खेल कूद छोडा इन्होने 
बचपन तो जिया ही नही
पढाई करते यौवन बिता 
पता इन्हे चला ही नही

ना होली ना दिवाली 
कभी इन्होने मनाई 
इनके नसीब मे लिखी 
सिर्फ गोली और दवाई

ना खाने को समय है 
ना सोने को है बिछाना 
जब समय मिले कामसे 
सोते है जहा मिले ठिकाना

सुबह जल्दी मरीज देखो 
समय पर करो ब्लड कलेक्शन
रिपोर्ट समय पर ना मिले तो 
टूटता है सीनियर से कनेक्शन

दो दो दिन अॉपरेशन थियटर मे 
सूरज इनको दिखता नही 
आज कौनसी तारीख है 
इनको कभी समझता नही

रात दिन काम और पढाई
आधी जिंदगी इन्होने गंवाई 
शादी का समय आया तो 
लगे अधेड उम्र के जमाई

आप के लिये ये सोते नही 
आपको कुछ पडी नही 
इन्होने हाथ मे अपने 
घडी कभी पहनी ही नहीं

तुम लोग गलती करो 
परिवहन नियम उल्लंघन करो 
अपघात ग्रस्त हो गये तो 
इनकी ही पिटाई करो

सोचो ये अगर ना काम करेगे 
तुम्हारा इलाज कैसे होगा
बीमारी मे भगवान से 
सामना जल्दी ही होगा

ध्यान रखो तुम्हारे और 
भगवान के बीच सिर्फ डॉक्टर है 
ये ना हो तो तुम्हारा जीवन 
बिना दस्तखत का कॉन्ट्रैक्ट है ।

साभार एक दोस्त से।

Hindi joke dedicated to young girls


आप्रेशन के लिए बेहोशी का टीका ( anaesthesia) लगाने से पहले डाक्टर
ने मरीज़ा से पूछा- 'आप की उम्र ...?

मरीज़ा ने कहा -'२८ साल'

डा० ने कहा -'मोहतरमा, आपको यकीन है न कि आपकी यही उम्र है..! क्योंकि मैंने आपकी उम्र के हिसाब से 
बेहोशी की दवा की खुराक (dose)  तय करनी है '
मरीज़ा ने कहा-' ३० साल '

डॉ० ने फिर कहा-' आप देख लीजिए ! दवाई की कम या 
ज़्यादा खुराक  से मरीज या तो आप्रेशन के दौरान ही
होश में आ जाता है
या फिर कोमा में भी जा सकता है' ।
मरीज़ा-' अच्छा, ३८ साल '

डॉ ० ने फिर कहा-
' अगर आप उम्र ग़लत बतायेगी
तो दवाई की ग़लत खुराक  
का सीधा असर गुर्दों पर पड़ सकता है और वे फ़ेल भी हो सकते हैं..!'
मरीज़ा चीखते हुए बोली-' 
४९ साल, और अब आप्रेशन थियेटर से भले ही मेरी लाश क्यों न बाहर निकले, अब इस से ज़्यादा उम्र बिल्कुल नहीं बढ़ानी 
It is final 

😠😡😠😡😅😅😅😅😅😅😅