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Tuesday, 7 March 2017

होली आई रे ........... इस होली आपको समर्पित है मेरी नयी रचना


 होली  आई रे  

इस होली आपको समर्पित है मेरी नयी रचना कविता 



राह   तके , समय  निकल   गया,
मानो,     बीती      कई   सदियाँ। 
आ   जाओ, साजन  आँगन     में ,
इस  होली, सूनी  मेरी  बहियाँ।१।

ऋतु      मिलन    की       आई ,
भर    आई    मेरी      अंखियां। 
इस    होली,  पर बांध ढहा   दे,
 बहने  दे, सतरंगी  तू  नदियां।२। 

आने      दे, मेरे असुअं        को,
न   रोक,   लगा   कर  छतिया। 
विरह    वेग   का , अंत करा  दे,
 बैठ, मेरे  संग  कर तू बतिया।३। 

चुप  भी रहियो  , तो पढ़नी होंगीं,
तुझको   मेरी   सारी      पतियां। 
तू   भी जान सके, कम   से कम ,
न जाने,
बीतीं   कैसी मेरी सूनी  रतियां।४। 

इस होली, 
तू   चलने दे रंगों की   पिचकारी,
तू मुझको , 
मैं     तुझको     जमके    सनिया। 
आ     जाऊँ   तेरे        समीप   मैं,
टकराने दे अंगिया से अंगिया।५। 

न चाहत, 
कुछ     और    अब      मुझको,
तू   रहियो,    बस   मेरे   पईयां। 
मिल    चुके,  अंग    से      अंग,
अब   मेरे मन में आ  बसिया।६। 


 पुनीत अग्रवाल