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Thursday, 2 March 2017

होलाष्टक को क्यों अशुभ माना जाता है


होलाष्टक को क्यों अशुभ माना जाता है, आइए जानते हैं 



होली का त्यौहार आ रहा है और होली (दुलंडी) से पहले होलाष्टक लग जाते हैं जिन में शुभ कार्य करना मना होते हैं। चलिए आज हम आपको यह बताते हैं कि होलाष्टक वहम हैं या सच में अशुभ हैं।

होलाष्टक होली से आठ दिन पहले  आरम्भ हो रहा है। क्या आपको लगता है कि आप होलाष्टक के बारे में सब कुछ जानते हैं, जैसे होलाष्टक को क्यों अशुभ माना जाता है, या इसमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं?

होली के त्यौहार के पहले आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। 
कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ करने के लिए इस समय को अशुभ माना जाता है, विशेषकर उत्तर भारत में। 
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार होलाष्टक का प्रारम्भ फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है, और यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक चलता है।

होलाष्टक क्यों अशुभ होते हैं :-

दो प्रमुख कारणों की वजह से होलाष्टक को अशुभ माना जाता है। आइये इनके बारे में जानते हैं:

भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु के एक महान भक्त थे, लेकिन उनके पिता हिरण्यकश्यप स्वयं अपने आप को ही भगवान मानते थे। हिरण्यकश्यप चाहता था कि प्रहलाद विष्णु को छोड़कर उसकी पूजा करे, इसलिए उसने प्रहलाद को आठ दिनों तक बहुत परेशान किया। जब हिरण्यकश्यप अपनी कोशिशों में सफ़ल नहीं हो पाया तो उसने प्रहलाद को होलिका दहन के दिन आग में जला देने का निर्णय लिया जिसमें भी उसकी हार हुई। इसलिए होलिका दहन से पहले के इन आठ दिनों को अशुभ माना जाता है। 

और बहुत महत्वपूर्ण कारण जो होलाष्टक को अशुभ बनाता है वह यह है कि इस समय के दौरान अलग अलग दिनों में ग्रह बहुत जल्दबाज़ी में फेर-बदल करते हैं। देखें नीचे दी गयी सूची में:

चन्द्रमा (होलाष्टक के पहले दिन)
सूर्य (होलाष्टक के दूसरे दिन)
शनि (होलाष्टक के तीसरे दिन)
शुक्र (होलाष्टक के चौथे दिन)
गुरु (होलाष्टक के पाँचवे दिन)
बुध (होलाष्टक के छटे दिन)
मंगल (होलाष्टक के सांतवें दिन)
राहु (होलाष्टक के आठवें या फाल्गुन पूर्णिमा के दिन)

आइए अब उन शुभ कार्यों के विषय में बताएं जो होलाष्टक के समय के दौरान नहीं करने चाहिए:

गृह प्रवेश हिन्दू मान्यताओं के अनुसार 16 मुख्य संस्कार एक नए कार्य या व्यवसाय का आरम्भ करना वर्जित है।

होलाष्टक के साथ ही होलिका दहन की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। होलिका दहन के लिए जगह का चयन कर लिया जाता है और उसे गंगा के पवित्र जल से साफ़ किया जाता है। लोग होलिका दहन सुखी लकड़ी तथा पत्तों को जमा करना शुरू कर देते हैं। तथा गरीबों को दान देने के लिए होलाष्टक के बहुत महत्त्व है। होलाष्टक के दौरान ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है। 

तांत्रिकों के लिए होलाष्टक का विशेष महत्त्व है। यह समय उन्हें मंत्र सिद्धि और साधना करने के विशेष फल प्रदान करता है।

होलिका दहन के समय आप अपने जीवन में सुख शांति प्राप्त करने के लिए  उपाय कर सकते हैं