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Thursday, 23 February 2017

Maha shiv ratri .... महाशिवरात्रि व्रत की प्रामाणिक और पौराणिक कथा


महाशिवरात्रि व्रत की प्रामाणिक और पौराणिक कथा

 
पूर्व काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। जानवरों की हत्या करके वह अपने परिवार को पालता था। वह एक साहूकार का कर्जदार था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनी।
शाम होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया। अपनी दिनचर्या की भांति वह जंगल में शिकार के लिए निकला। लेकिन दिनभर बंदी गृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार खोजता हुआ वह बहुत दूर निकल गया। जब अंधकार हो गया तो उसने विचार किया कि रात जंगल में ही बितानी पड़ेगी। वह वन एक तालाब के किनारे एक बेल के पेड़ पर चढ़ कर रात बीतने का इंतजार करने लगा।

बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढंका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला। पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियां तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरती चली गई। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बिल्वपत्र भी चढ़ गए। एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी हिरणी तालाब पर पानी पीने पहुंची।

शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, हिरणी बोली- 'मैं गर्भिणी हूं। शीघ्र ही प्रसव करूंगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत हो जाऊंगी, तब मार लेना।'

शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और हिरणी जंगली झाड़ियों में लुप्त हो गई। प्रत्यंचा चढ़ाने तथा ढीली करने के वक्त कुछ बिल्व पत्र अनायास ही टूट कर शिवलिंग पर गिर गए। इस प्रकार उससे अनजाने में ही प्रथम प्रहर का पूजन भी सम्पन्न हो गया।

कुछ ही देर बाद एक और हिरणी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख हिरणी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया- 'हे शिकारी! मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूं। कामातुर विरहिणी हूं। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूं। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी।' शिकारी ने उसे भी जाने दिया।

दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। इस बार भी धनुष से लग कर कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर जा गिरे तथा दूसरे प्रहर की पूजन भी सम्पन्न हो गई।

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तभी एक अन्य हिरणी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली। शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर नहीं लगाई। वह तीर छोड़ने ही वाला था कि हिरणी बोली- 'हे शिकारी! मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊंगी। इस समय मुझे मत मारो।'

शिकारी हंसा और बोला- 'सामने आए शिकार को छोड़ दूं, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूं। मेरे बच्चे भूख-प्यास से व्यग्र हो रहे होंगे।'

उत्तर में हिरणी ने फिर कहा- जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी। हे शिकारी! मेरा विश्वास करो, मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूं।

हिरणी का दुखभरा स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के अभाव में तथा भूख-प्यास से व्याकुल शिकारी अनजाने में ही बेल-वृक्ष पर बैठा बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य करेगा। शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला- ' हे शिकारी! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है, तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि मुझे उनके वियोग में एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े। मैं उन हिरणियों का पति हूं। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण का जीवन देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे समक्ष उपस्थित हो जाऊंगा।'

मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटनाचक्र घूम गया। उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा- 'मेरी तीनों पत्नियां जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएंगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूं।'

शिकारी ने उसे भी जाने दिया। इस प्रकार प्रात: हो आई। उपवास, रात्रि-जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ने से अनजाने में ही पर शिवरात्रि की पूजा पूर्ण हो गई। पर अनजाने में ही की हुई पूजन का परिणाम उसे तत्काल मिला। शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया। उसमें भगवद्शक्ति का वास हो गया।

थोड़ी ही देर बाद वह मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसने मृग परिवार को जीवनदान दे दिया।

अनजाने में शिवरात्रि के व्रत का पालन करने पर भी शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई। जब मृत्यु काल में यमदूत उसके जीव को ले जाने आए तो शिवगणों ने उन्हें वापस भेज दिया तथा शिकारी को शिवलोक ले गए। शिवजी की कृपा से ही अपने इस जन्म में राजा चित्रभानु अपने पिछले जन्म को याद रख पाए तथा महाशिवरात्रि के महत्व को जानकर उसका अगले जन्म में भी पालन कर पाए।
शिव कथा का यह है संदेश

शिकारी की कथानुसार महादेव तो अनजाने में किए गए व्रत का भी फल दे देते हैं। पर वास्तव में महादेव शिकारी की दया भाव से प्रसन्न हुए। अपने परिवार के कष्ट का ध्यान होते हुए भी शिकारी ने मृग परिवार को जाने दिया। यह करुणा ही वस्तुत: उस शिकारी को उन पंडित एवं पुजारियों से उत्कृष्ट बना देती है जो कि सिर्फ रात्रि जागरण, उपवास एवं दूध, दही, बेल-पत्र आदि द्वारा शिव को प्रसन्न कर लेना चाहते हैं। इस कथा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कथा में 'अनजाने में हुए पूजन' पर विशेष बल दिया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि शिव किसी भी प्रकार से किए गए पूजन को स्वीकार कर लेते हैं अथवा भोलेनाथ जाने या अनजाने में हुए पूजन में भेद नहीं कर सकते हैं।

वास्तव में वह शिकारी शिव पूजन नहीं कर रहा था। इसका अर्थ यह भी हुआ कि वह किसी तरह के किसी फल की कामना भी नहीं कर रहा था। उसने मृग परिवार को समय एवं जीवन दान दिया जो कि शिव पूजन के समान है। शिव का अर्थ ही कल्याण होता है। उन निरीह प्राणियों का कल्याण करने के कारण ही वह शिव तत्व को जान पाया तथा उसका शिव से साक्षात्कार हुआ।

परोपकार करने के लिए महाशिवरात्रि का दिवस होना भी आवश्यक नहीं है। पुराण में चार प्रकार के शिवरात्रि पूजन का वर्णन है। मासिक शिवरात्रि, प्रथम आदि शिवरात्रि, तथा महाशिवरात्रि। पुराण वर्णित अंतिम शिवरात्रि है- नित्य शिवरात्रि। वस्तुत: प्रत्येक रात्रि ही शिवरात्रि' है अगर हम उन परम कल्याणकारी आशुतोष भगवान में स्वयं को लीन कर दें तथा कल्याण मार्ग का अनुसरण करें, वही शिवरात्रि का सच्चा व्रत है। 

फेस बुक और व्हाट्सप्प के बाबत सत्य

बेहतरीन पोस्ट लोड करने और एक भी लाइक न मिलने पर , जब अर्जुन ने खिन्न होकर अपना मोबाइल नीचे रख दिया, तब श्री कृष्ण ने फेस बुक और व्हाट्सप्प के बाबत निम्न सत्य का ज्ञान उपदेश उसे दिये :

1. हे पार्थ !, जिन्हें तुम्हारे विचार अच्छे लगते हैं, वो बिना पढ़े ही तुम्हारी पोस्ट लाइक करेंगे ।

2. मुरलीधर कहते हैं, हे मोबाइल धर, कुछ महारथी तुम्हारी पोस्ट लाइक तो करेंगे, पर किन्ही कारण वश ग्रुप में दर्शा नही पाएंगे , ऐसे जातक तुम्हारी अन्य माध्यम से ज़रूर प्रशंसा करेंगे ।

3. देवकीनंदन सावधान करते हुए बोले , अनेक अस्थिर प्रवृत्ति के मानव, जो तुम्हे पसंद नहीं करते, वो किसी भी स्तिथि में तुम्हारी किसी भी पोस्ट को लाइक नहीं करेंगे ,चाहे पोस्ट उन्हें कितनी भी पसंद आई हो ।

4. प्रभु बोले , परंतु पार्थ, तुम लाइक , शेयर और कमेंट के इस मोह चक्र से अपने को सर्वथा अलग रखना , और सतत् निष्काम भाव से लिखते रहना । आनंद से भरे सर्वोत्तम मेसेज फॉरवर्ड करते रहो । इसी में तुम्हारा कल्याण है ।

5. अपने अंतिम श्लोक में प्रभु कहते हैं, हे अर्जुन,! अपना मोबाइल रुपी गांडीव ,हमेशा अपने साथ रखना, यही तुम्हे मेरे विश्व रूप का दर्शन हर समय कराता रहेगा ।

कल्याणम भवतु 👍

Hindi Chutkule


 अफसर: आप नौसेना में भर्ती होने आये है,और आपको तैरना नहीं आता?



पप्पू: तो क्या हुआ सर! जो वायुसेना में जाते है,उनहे उड़ना थोड़ी आता है
अफ़सर का अंतिम संस्कार कल हे.
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डॉक्टर  - क्या तकलीफ है...?

मरीज  - सीने में बोहोत दर्द हो रहा है ।

डॉक्टर - सिगरेट पीते हो..?

मरीज - हा पर " गोल्ड फ्लैक" ही मंगवाना....
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 पत्नी: तुम हर बात में मेरे मायके वालों को बीच में क्यों लाते हो?

जो बोलना हो सीधा मुझे बोला करो।

पति: देखो जब टीवी में कोईं खराबी आती है तो कोई टीवी को थोड़े ही बोलता है,

गाली तो कंपनी वाले ही खाते है ना।
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 Boy = आपका नाम क्या है ?
. Girl = पूजा हज़ारिका और
आपका ?
Boy = पप्पू 500 का .
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भोली भाली पत्नियों का सबसे सुंदर डायलॉग...

ये पीते नहीं हैं जी .....दरअसल  इनके दोस्त ही नालायक हैं ।


लेकिन उस बेचारी को क्या मालूम कि, अपना गंगाधर ही शक्तिमान है।.
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Today's Special 

...पति और पत्नी का ज़ोरदार
झगड़ा होता है।
पति गुस्से से: तेरी जैसी 50
मिलेंगी।
.....
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पत्नी हंसके:
अभी भी मेरी जैसी ही चाहिए!!!!!!
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आज कल के  बच्चे भी ना

छोटा बच्चा :- पापा आपकी शादी हो गई?
पापा :- हां!
बच्चा :- किस से हुई?
पापा :- बेवकूफ तेरी मम्मी से!....
बच्चा :- वाह पापा घर में ही सैटिंग कर ली..!!

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 इतनी नफरत भी ठीक नहीं, 
एक आदमी पैदल ही जा राहा था

मैंने बोला आओ बैठ लो..मेरी साईकिल पर 
तो वो बोला

"मैं बीजेपी से हूँ"  .
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 *अखिलेश यादव ने अमिताभ बच्चन से पूछा है ...."की क्या गधों का भी विज्ञापन होता है"*

अभिताब बच्चन का जवाब....

*जो इंसान राहुल गांधी का प्रचार कर रहा हो, उसे ये पूछने का हक़ है क्या भाई??*.   .
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आज मेने अपनी पत्नी से बोला कि मेरा दिल एक मोबाईल है और तुम उसकी सिम हो
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पत्नि बोली : एक बात पूछूं आप से..??
मेने कहा: हां पूछो क्या बात है 
तो वो बोली: तुम्हारा मोबाईल डबल सिम वाला तो नही है ना..??
हद है यार  

Majedar Jokes in Hindi ...........


 SHAADI SEASON SPECIAL
इधर मेरी मुहब्बत किसी और की होने जा रही थी और उधर कुछ कमबख्त लोग कह रहे थे....
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हलवा सही नही बना है..
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 कस्टूमर केअर : गुड मॉर्निंग सर, एयरटेल में आपका स्वागत है, बोलिये मैंआपकी क्या सेवा कर सकती हूँ  ?
पप्पू : मेरे पड़ोस की पुष्पा का नंबर दे दो ।
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 एक गाँव में शेर घुस गया।
पता है फिर क्या हुआ??????
जो काम सरकार सालों से नहीं कर सकी वो काम शेर ने 3 दिनों में कर दिया।
गाँव वालों की खुले में शौच जाने की आदत बदल गई।
("स्वच्छ भारत अभियान")
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 लड़की वाले- हमें ऐसा लड़का चाहिए
जो कुछ खाता पीता ना हो, और कुछ
गलत काम ना करता हो।
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पंडित- ऐसा लड़का तो आपको ICU में ही मिलेगा।
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 डॉक्टर - तुम्हारा कान कैसे जला?
बंता - मैं कमीज प्रेस कर रहा था, कि फोन आ गया, मैंने जल्दी में फोन की जगह प्रेस को कान पर लगा लिया।
डॉक्टर- तो दूसरा कान कैसे जला?
बंता- अब एम्बुलेंस को भी फोन करना था ना।
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 किसी ने ग़ालिब से पूछा:
"मोहब्बत शादी से पहले
करनी चाहिए या शादी
के बाद?!?"
ग़ालिब ने कहा:............
"कभी भी करो पर बीवी को
पता नहीं चलना चाहिए!"
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 कांग्रेसी खटिया दे रहे है

भाजपाई 6000 ₹ दे रहे है ...
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अब बस.... सपा- बसपा में जो लुगाई की व्यवस्था करेगा, समझ लो मेरा वोट उसी को मिलेगा !!!
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पलट दूँगा सारी दुनिया मैं ए खुदा..
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बस रजाई में से निकलने की  ताकत दे दे..
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संता एक काला और एक सफ़ेद जुराब पहनकर स्कूल गया।
अध्यापक: घर जाओ और मोज़े बदलकर आओ।
संता: कोई फायदा नहीं वहां भी एक काला और एक सफ़ेद ही है।
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 सिपाही:-  चल भाई ,
तेरी फाँसी का समय हो गया।
कैदी:-   पर   मुझे तो  फाँसी
20 दिन बाद होने वाली थी।
सिपाही:-  जेलर साहब कह कर गए हैं  कि " तू उनके गाँव का है ,
इसलिए तेरा काम पहले।