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Saturday, 24 June 2017

Story in Hindi ......रेगिस्तान


 एक बार एक व्यक्ति रेगिस्तान में कहीं भटक गया।उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी बहुत चीजें थीं,वो जल्द ही ख़त्म हो गयीं और पिछले दो दिनों से वह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था।वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घण्टों में अगर उसे कहीं से पानी नहीं मिला तो उसकी मौत निश्चित है। पर कहीं न कहीं उसे ईश्वर पर यकीन था कि कुछ चमत्कार होगा और उसे पानी मिल जाएगा।तभी उसे एक झोँपड़ी दिखाई दी । उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ।पहले भी वह मृगतृष्णा और भ्रम के कारण धोखा खा चुका था,पर बेचारे के पास यकीन करने के अलावा कोई चारा भी तो न था।आखिर यह उसकी आखिरी उम्मीद जो थी।
वह अपनी बची खुची ताकत से झोँपडी की तरफ चलने लगा। जैसे-जैसे करीब पहुँचता, उसकी उम्मीद बढती जाती और इस बार भाग्य भी उसके साथ था। सचमुच वहाँ एक झोँपड़ी थी । पर यह क्या ? झोँपडी तो वीरान पड़ी थी,मानो सालों से कोई वहाँ भटका न हो। फिर भी पानी की उम्मीद में वह व्यक्ति झोँपड़ी के अन्दर घुसा, अन्दर का नजारा देख उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ।
वहाँ एक हैण्ड पम्प लगा था। वह व्यक्ति एक नयी उर्जा से भर गया।पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसता वह तेजी से हैण्ड पम्प को चलाने लगा लेकिन हैण्ड पम्प तो कब का सूख चुका था। वह व्यक्ति निराश हो गया, उसे लगा कि अब उसे मरने से कोई नहीं बचा सकता।वह निढाल होकर गिर पड़ा।
तभी उसे झोँपड़ी की छत से बंधी पानी से भरी एक बोतल दिखाई दी । वह किसी तरह उसकी तरफ लपका और उसे खोलकर पीने ही वाला था कि तभी उसे बोतल से चिपका एक कागज़ दिखा उस पर लिखा था - *"इस पानी का प्रयोग हैण्ड पम्प चलाने के लिए करो और वापिस बोतल भरकर रखना ना भूलना ?"
यह एक अजीब सी स्थिति थी। उस व्यक्ति को समझ नहीं आ रहा था कि वह पानी पीये या उसे हैण्ड पम्प में डालकर चालू करे। उसके मन में तमाम सवाल उठने लगे,
अगर पानी डालने पर भी पम्प नहीं चला।
अगर यहाँ लिखी बात झूठी हुई और क्या पता जमीन के नीचे का पानी भी सूख चुका हो।
लेकिन क्या पता पम्प चल ही पड़े,
क्या पता यहाँ लिखी बात सच हो, वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे ?
फिर कुछ सोचने के बाद उसने बोतल खोली और कांपते हाथों से पानी पम्प में डालने लगा। पानी डालकर उसने भगवान से प्रार्थना की और पम्प चलाने लगा। एक, दो, तीन और हैण्ड पम्प से ठण्डा-ठण्डा पानी निकलने लगा।
वह पानी किसी अमृत से कम नहीं था। उस व्यक्ति ने जी भरकर पानी पिया, उसकी जान में जान आ गयी।दिमाग काम करने लगा।उसने बोतल में फिर से पानी भर दिया और उसे छत से बांध दिया।जब वो ऐसा कर रहा था, तभी उसे अपने सामने एक और शीशे की बोतल दिखी। खोला तो उसमें एक पेंसिल और एक नक्शा पड़ा हुआ था, जिसमें रेगिस्तान से निकलने का रास्ता था।
उस व्यक्ति ने रास्ता याद कर लिया और नक़्शे वाली बोतल को वापस वहीँ रख दिया। इसके बाद उसने अपनी बोतलों में (जो पहले से ही उसके पास थीं) पानी भरकर वहाँ से जाने लगा। कुछ आगे बढ़कर उसने एक बार पीछे मुड़कर देखा, फिर कुछ सोचकर वापिस उस झोँपडी में गया और पानी से भरी बोतल पर चिपके कागज़ को उतारकर उस पर कुछ लिखने लगा। उसने लिखा - *"मेरा यकीन करिए यह हैण्ड पम्प काम करता है।
यह कहानी सम्पूर्ण जीवन के बारे में है।
यह हमें सिखाती है कि बुरी से बुरी स्थिति में भी अपनी उम्मीद नहीं छोडनी चाहिए और 
इस कहानी से यह भी शिक्षा मिलती है कि कुछ बहुत बड़ा पाने से पहले हमें अपनी ओर से भी कुछ देना होता है।जैसे उस व्यक्ति ने नल चलाने के लिए मौजूद पूरा पानी उसमें डाल दिया।
देखा जाए तो इस कहानी में पानी जीवन में मौजूद महत्वपूर्ण चीजों को दर्शाता है, कुछ ऐसी चीजें जिनकी हमारी नजरों में विशेष कीमत है।
किसी के लिए मेरा यह सन्देश ज्ञान हो सकता है तो किसी के लिए प्रेम तो किसी और के लिए पैसा।
यह जो कुछ भी है, उसे पाने के लिए पहले हमें अपनी तरफ से उसे कर्म रुपी हैण्ड पम्प में डालना होता है और फिर बदले में आप अपने योगदान से कहीं अधिक मात्रा में उसे वापिस पाते हैं।
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एक दरोगा संत दादू की ईश्वर भक्ति और सिद्धि से बहुत प्रभावित था !
उन्हें गुरु मानने की इच्छा से वह उनकी खोज में निकल पड़ा !लगभग आधा जंगल पार करने के बाद दरोगा को केवल धोती पहने एक साधारण-सा व्यक्ति दिखाई दिया !वह उसके पास जाकर बोला -क्यों बे तुझे मालूम है कि संत दादू का आश्रम कहाँ है ?
वह व्यक्ति दरोगा की बात अनसुनी कर के अपना काम करता रहा !भला दरोगा को यह सब कैसे सहन होता ?लोग तो उसके नाम से ही थर-थर काँपते थे !उसने आव देखा न ताव लगा ग़रीब की धुनाई करने !
इस पर भी जब वह व्यक्ति मौन धारण किये अपना काम करता ही रहा तो दरोगा ने आग बबूला होते हुए एक ठोकर मारी और आगे बढ़ गया !
थोड़ा आगे जाने पर दरोगा को एक और आदमी मिला !दरोगा ने उसे भी रोक कर पूछा -क्या तुम्हें मालूम है संत दादू कहाँ रहते है ?वह व्यक्ति बोला -उन्हें भला कौन नहीं जानता ?वे तो उधर ही रहते हैं जिधर से आप आ रहे हैं !यहाँ से थोड़ी ही दूर पर उनका आश्रम है !मैं भी उनके दर्शन के लिये ही जा रहा था आप मेरे साथ ही चलिये !दरोगा मन ही मन प्रसन्न होते हुए साथ चल दिया !
राहगीर जिस व्यक्ति के पास दरोगा को ले गया उसे देख कर वह लज्जित हो उठा क्योंकि संत दादू वही व्यक्ति थे जिसको दरोगा ने मामूली आदमी समझ कर अपमानित किया था !वह दादू के चरणों में गिर कर क्षमा माँगने लगा ;बोला -महात्मन मुझे क्षमा कर दीजिये मुझसे अनजाने में अपराध हो गया !
दरोगा की बात सुनकर संत दादू हँसते हुए बोले -भाई इसमें बुरा मानने की क्या बात ?कोई मिट्टी का एक घड़ा भी ख़रीदता है तो ठोक बजा कर देख लेता है फिर तुम तो मुझे गुरु बनाने आये थे !
संत दादू की सहिष्णुता के आगे दरोगा नतमस्तक हो गया!

अरुंधती राय ने जब अजीत डोवाल (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार⁠⁠⁠⁠ ) को दी बिन मांगी सलाह तब श्री अजीत डोवाल ने उन्हें दिया वो जवाब जो पढ़ कर आप हो जायेंगे गौरवान्वित..

अरुंधती राय ने जब अजीत डोवाल (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार⁠⁠⁠⁠ ) को दी बिन मांगी सलाह तब श्री अजीत डोवाल ने उन्हें दिया वो जवाब जो पढ़ कर आप हो जायेंगे गौरवान्वित.. पढ़े एक एक शब्द

अरुंधती रॉय अब शायद किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं , भले ही कोई उन्हें किसी भी प्रकार के बयानों और कामों के लिए जाने.. उनके सेना के जवानो के लिए , कश्मीरी पत्थरबाज़ों के लिए हो , भारत के प्रधानमंत्री के लिए हो या हिन्दू और हिंदुत्व के लिए हो .. उनके बयानों से लगभग सभी लोग वाकिफ हैं .. JNU से ले कर कश्मीर तक के मुद्दे पर उनके बयानों ने उन्हें सदा ही सुर्खियों में रखा ..

उन्ही अरुंधति ने भारत के NSA अजीत डोवाल को एक बिन मांगी सलाह जब दी तब अजीत डोवाल ने उन्हें प्रतिउत्तर दिया और वो प्रतुत्तर अपने आप में एक नजीर बन गयी है जिसे पढ़ने के बाद शायद उन्हें सही और सटीक जवाब मिल गया हो .

आइये पढ़िए उस प्रतुत्तर को हिंदी में जो है खुद में एक नजीर . ...

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार,दक्षिण ब्लॉक,
रायसीना हिल,नई दिल्ली -११००११

प्रिय चिंतित नागरिक,भारतीय सेना द्वारा हिरासत में लिए गए, और बाद में राष्ट्रीय सुधार प्रणाली में स्थानांतरित किये गए, आईएसआईएस और एलईटी आतंकवादियों के उपचार को लेकर आपने गहन चिंता व्यक्त करते हुए हाल ही में जो पत्र लिखा, उसके लिए धन्यवाद ।

हमारे प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और आपके अभिमत को नई दिल्ली में स्पष्टता से सुना और समझा गया है । आप जैसे नागरिकों की चिंताओं का धन्यवाद; और आपको जानकर खुशी होगी कि हम राष्ट्रीय रक्षा विभाग में एक नया विभाग बनाने जा रहे हैं, जिसे 'लिबरल्स एक्सेप्ट रिस्पांसिबिलिटी फॉर किलर्स' (हत्यारों की जिम्मेदारी स्वीकारते उदारवादी) के नाम से जाना जाएगा, संक्षेप में कहें तो - एलएआरआर ।इस नए कार्यक्रम के दिशानिर्देशों के अनुसार, हमने एक आतंकवादी को अपने यहाँ से हटाकर उसे आपकी व्यक्तिगत देखभाल में रखने का निर्णय लिया है। आपके उस बंदी को चुन लिया गया है और अगले सोमवार को उसे भारी सशस्त्र बल के साथ मुंबई में आपके घर स्थानांतरित कर दिया जाएगा ।

अली मोहम्मद अहमद बिन महमूद (आप उसे केवल अहमद कह सकती हैं) की देखभाल आपके द्वारा दिए गए शिकायत पत्र में उल्लेखित मानकों के अनुरूप की जानी है! संभवतः आपके लिए यह जरूरी होगा कि आप इस कार्य में सहयोग के लिए कुछ सवैतनिक सहायकों की व्यवस्था करें | हम यह सुनिश्चित करने के लिए साप्ताहिक निरीक्षण का आयोजन करेंगे कि अहमद की देखभाल आपके द्वारा पत्र में सुझाये गए मानकों के अनुरूप हो रही है, अथवा नहीं । यद्यपि अहमद का व्यवहार अत्यंत असामाजिक और बेहद हिंसक है, फिर भी हम आशा करते हैं कि आप इस व्यक्ति की इन चारित्रिक दुर्बलताओं को अपनी संवेदनशीलता से दूर करने में सफल होंगी, जैसा कि आपने अपने पत्र में सहज attitudinal problem (व्यवहार संबंधी समस्या) बताते हुए उल्लेख किया है । शायद आप सही हों और ये समस्याएं आपके बताये अनुसार महज सांस्कृतिक अंतर ही हों ।

हमारा मानना है कि आपकी योजना "परामर्श और गृह विद्यालय" की पेशकश करने की हैं। 'आपका दत्तक आतंकवादी केवल हाथों के द्वारा निपटने में बहुत ही कुशल है और पेंसिल या नेल कटर जैसी सामान्य बस्तुओं की मदद से ही मानव जीवन का अंत कर सकता है । हमारी सलाह है कि आप अपने अगले योग समूह में, उसे उसके इस कौशल का प्रदर्शन करने को न कहें ।अपने मित्रों, पड़ोसियों या रिश्तेदारों को सचेत रखें क्योंकि आपके घर आया यह अतिथि उत्तेजित या हिंसक भी हो सकता है, लेकिन हमें यकीन है कि आप उसके साथ तर्क कर समझा सकती हैं। वह आम घरेलू उत्पाद से विस्फोटक उपकरणों की एक विस्तृतसंरचना बनाने में भी विशेषज्ञ हैं, अतः शायद आप उन वस्तुओं को लॉक करके रखना पसंद करें, क्योंकि आपकी राय के अनुसार यह चीजें उसे उत्प्रेरित या कि उत्तेजित कर सकती हैं |अहमद आप या आपकी बेटियों के साथ यौन विषय को छोड़कर अन्य किसी विषय पर बातचीत करना पसंद नहीं करेंगे, क्योंकि वह महिलाओं को संपत्ति का एक मानव रूप मानते है । जिसे उनके साथ यौन संबंधों से इनकार का कोई अधिकार नहीं है। यह उनके लिए एक विशेष रूप से संवेदनशील विषय है और उन्हें उन महिलाओं के साथ हिंसक प्रवृत्तियों प्रदर्शित करने के लिए जाना जाता है, जो उनके ड्रेस कोड का अनुपालन करने में असफल रहती हैं, क्योंकि वे महिलाओं हेतु उपयुक्त पोशाक की "अनुशंसा" करते हैं ।मुझे यकीन है कि आपपूरे समय बुरका का लुत्फ़ लेंगी । बस याद रखें कि यह आपके पत्र में वर्णित 'उनकी संस्कृति और धार्मिक विश्वासों के सम्मान' का हिस्सा है।आपके द्वारा व्यक्त की गई चिंता के लिए पुनः धन्यवाद |हम वास्तव में सराहना करते हैं जब आप जैसे लोग हमें अपना काम उचित तरीके से करने के लिए निर्देशित करते हैं और हमारे अधीनस्थों की देखभाल के लिए आगे आते हैं | आप अहमद की अच्छे से देखभाल करें और याद रखें कि हम भी देख रहे होंगे।

सौभाग्य आपके साथ हो और ईश्वर आप पर कृपा करें..

सौहार्द के साथ,

अजित डोवाल 
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार⁠⁠⁠⁠

Thursday, 15 June 2017

Are holier than thou the best ?................ by Dr Neeraj Nagpal


Are  holier  than  thou  the  best ?

Dear  Dr  Ramakant  Panda

I  am  the  best  endoscopist  in  the  city. Dr  D...., Dr S......, Dr M......  are  all  novices  when  compared  to  me. They  cause  complications, cheat  patients, and  do  not  know  anything  about  their  subject.  Obviously  these  statements  made  to  patients  would  be  patently  false  and  should  be    punishable. But Sir, if  jousting  of  this  kind  is blatantly  wrong , so  also  is  claiming  to  be  more  honest  than  others  in huge   hoardings. When  you  claim  not  to  give  commissions  to  doctors  you  imply  that  all  others  give  commission  to  doctors  and  hence  you  are  the  best. This  is  not  only  blatantly  false  propaganda but  also  unethical  act  as  a  medical  professional  which  if  only  our  medical  associations / councils  had  some  testosterone  should  be  sufficient  to  debar  you  from  practice  of  medicine  for  bringing  the  profession  into  disrepute.

However  I  come  to  a  more  important  issue  which  needs urgent  discussion. What  is  cheating ? Is  charging  Rs  3000  for  a  CT  Scan  and  spending   500  towards direct  business  development (commission)  cheating  or  is  charging  6000  and  spending  2000  in  a  different  method  of  business development  by  putting  hoardings  in  prominent  places  which  cost  50000  per  month  cheating. After  all  why  does  Asian  Heart  Institute  need  its  name  on  a  bill  board  in  the first  place  if  not  for  business  sourcing.  To  answer  the  question  we  need  to  first decide  what  is  a  rational, reasonable  , fair  price  for  a  test / procedure / surgery   which  gives  a  reasonable  earning  to  the  doctor  as  well  as  does  not  fleece  the  patient  keeping  cost  of  equipment, infrastructure , human  resource and  utilities  in  mind.

The  only  reference  on  charges  of  medical  procedures  is  the  CGHS  handbook  and  this  is  if  anything  the  source  of  corruption  in  medical  profession. Rates  of  procedures  have  been  included  which  are  at  best  laughable  for  want  of  a  more  appropriate  word . Hospitals  bill  unnecessary  procedures, medicines  and  lab  investigations  to  sustain  and  to  survive  in-spite  of  delayed  payments  and  commissions  needed  to  be  paid  to  release  the  bills  raised . Hospitals  need  a  department  to  deal  with  CGHS, ECHS, and  other  empanelments  which  is  beyond  the  resources  of  a  professional  running  a  small  establishment.   

A  video  UGI Endoscope  costs  about  20  lacs  and  its  life  is  about  3  years . Leaving  aside  the  cost  of  his  expertise a  doctor  needs  to  do   3-4 UGIE  per  day  for  3  years  6  days  per  week  to  recover  the  cost  at  CGHS  rates if  one  has  to  pay salaries in time, pay  for  infrastructure loans and  utility  bills.  If  no  earning  is  to  accrue  to  the  doctor  why  should  he  work  and  be  liable  to  pay  compensation  in  crores  for  one  accident.

What  is  needed  is  an  authentic  rate  list  which  is  reasonable  to  both  the  consumer  as  well  as  the  service  provider. Having  written  multiple  times  about  this  and  uselessly looking  up  to  big brother  IMA  to  do  something  about  it , MLAG  has  now  decided  to  compile  a  genuine  rate  list  which  would  be  put  forth  for  future  use. I  request  all  doctors / nursing  homes, hospitals  to  kindly  use  the  CHHS  book and  let  MLAG  know  what  is  a  genuine  rate  for  all  procedures  given  in  the  book  and  done  by  them. Central  as  well  as  various  state  Governments  are  keen  on  bringing  out  and  enforcing  rates  of  medical  procedures. It  is  upto  us  to  prepare  a  rate  list  which  would  be  fair  to  all  lest  we  crib  later  and  find unethical  solutions  to  low  rates  prescribed  by  the  Government.

MLAG  will  advertise  in  National  Newspapers  soon  to  collect  this data. Meanwhile  I  request  all  to  kindly  share  your  rates  for  various  medical  procedures  as  per  the  CGHS  list  of  procedures  along  with  the  type  of  establishment  graded  as  follows
1)      Clinic  only
2)      Clinic  &  Day  care  centre
3)      Nursing  home/ Hospital without  OT / labour  Room
4)      Nursing  Home / Hospital  with  OT/ Labour  Room  but  without  24  hr  emergency
5)      Nursing  Home/ Hospital  with  OT / Labour Room and  24  hr  emergency  but  no  ICU
6)      Nursing  home with OT, 24 hr Emergency , ICU and Blood  Bank
7)      Teaching  Hospital / Corporate Hospital with  NABH / JCI  Accredition

Kindly  send  your  rates  with  the  serial  number  of  CGHS  list  to  mlagindemnity@gmail.com  . Please  note  that  this  is  not  a  quotation  for  lowest  rates  acceptable  but  your  genuine  rates  which  you  charge  your  normal  patients  or  would  charge  your  normal  patients  if  CGHS etc  was  not  on  the  scene.
Dr  Neeraj  Nagpal 
Convenor,Medicos  Legal  Action  Group,   Managing Director MLAG  Indemnity, 
Ex  President  IMA  Chandigarh
Director Hope Gastrointestinal Diagnostic Clinic,
1184, Sector 21 B Chandigarh  
09316517176  , 9814013735
0172; 4633735, 2707935, 2706024, 5087794
For  Contributions; "Medicos  Legal  Action Group"  Ac  No 499601010036479  IFSC  code  UBIN0549967 Union  Bank Sector  35 C Chandigarh;

Story .... मन का हाल

एक बार एक सेठ ने पंडित जी को निमंत्रण किया पर पंडित जी का एकादशी का व्रत था तो पंडित जी नहीं जा सके पर पंडित जी ने अपने दो शिष्यो को सेठ के यहाँ भोजन के लिए भेज दिया.

पर जब दोनों शिष्य वापस लौटे तो उनमे एक शिष्य दुखी और दूसरा प्रसन्न था!

पंडित जी को देखकर आश्चर्य हुआ और पूछा बेटा क्यो दुखी हो -- क्या सेठ नेभोजन मे अंतर कर दिया ? 

"नहीं गुरु जी" 

क्या सेठ ने आसन मे अंतर कर दिया ? 

"नहीं गुरु जी" 

क्या सेठ ने दच्छिना मे अंतर कर दिया ? 

"नहीं गुरु जी ,बराबर दच्छिना दी 2 रुपये मुझे और 2 रुपये दूसरे को"

अब तो गुरु जी को और भी आश्चर्य हुआ और पूछा फिर क्या कारण है ? 
जो तुम दुखी हो ?

तब दुखी चेला बोला गुरु जी मे तो सोचता था सेठ बहुत बड़ा आदमी है कम से कम 10 रुपये दच्छिना देगा पर उसने 2 रुपये दिये इसलिए मे दुखी हू !!

अब दूसरे से पूछा तुम क्यो प्रसन्न हो ?

तो दूसरा बोला गुरु जी मे जानता था सेठ बहुत कंजूस है आठ आने से ज्यादा दच्छिना नहीं देगा पर उसने 2 रुपए दे दिये तो मे प्रसन्न हू ...!

बस यही हमारे मन का हाल है संसार मे घटनाए समान रूप से घटती है पर कोई उनही घटनाओ से सुख प्राप्त करता है कोई दुखी होता है ,पर असल मे न दुख है न सुख ये हमारे मन की स्थिति पर निर्भर है!

इसलिए मन प्रभु चरणों मे लगाओ ,क्योकि - कामना पूरी न हो तो दुख और कामना पूरी हो जाये तो सुख पर यदि कोई कामना ही न हो तो आनंद ...🙏🙏

Tuesday, 13 June 2017

*आने वाले दिनों में रेलवे का सीन:* रेलवे टिकट खिड़की पर:


*आने वाले दिनों में रेलवे का सीन:*
रेलवे टिकट खिड़की पर:

यात्री: सर दिल्ली से लखनऊ का एक रिजर्व टिकट चाहिए....
क्लर्क: 750 रुपये

ग्राहक: पर पहले तो 400/- था
क्लर्क: सोमवार को 400/- है, मंगल बुध गुरु को 600/- शनिवार को 700 तुम संडे को जा रहे हो तो 750

ग्राहक :ओह! अच्छा लोअर दीजियेगा, पिताजी को जाना है 
क्लर्क :फिर 50 रुपये और लगेंगे….

ग्राहक :अरे! लोवर के अलग! साइड लोवर दे दीजिए न….
क्लर्क: उसके 25 रुपये और लगेंगे....

ग्राहक:हद है, न टॉयलेट में पानी होता है न कोच में सफ़ाई, किराया बढ़ता जा रहा है...

क्लर्क: टॉयलेट यूज का 50 रुपये और लगेगा, शूगर तो नहीं है न? 24 घंटे में 4 बार यानी रात भर में 2 बार से ज़्यादा जाएंगे तो हर बार 10 रुपये एक्स्ट्रा लगेंगे....

ग्राहक: हैं! अब रेलवे हगने मूतने का भी पैसा लेगा! और बता दो भाई, किस किस बात के पैसे लगने हैं एक्स्ट्रा..........

क्लर्क: देखो भाई, अगर फोन चार्ज करोगे तो 10 रुपये प्रति घंटा। अगर खर्राटे आएंगे तो 25 रुपये प्रति घंटा। अगर किसी सुन्दर महिला के पास सीट चाहिए तो 100 रुपये का अलग चार्ज है।
अगर कोई महिला आसपास कोई खडूस मर्द नहीं चाहती तो उसे भी 100 रूपये देना पड़ेगा। एक ब्रीफकेस प्रति व्यक्ति से अधिक लगेज पर 10 रुपये प्रति लगेज नग।
मोबाइल पर गाना सुनने की पररमिशन के लिए 25 रुपये एक मुश्त अलग-से । घर से लाया खाना खाने पर 20 रुपये का सरचार्ज़। उसके बाद अगर अपानवायु गर्जन हो गया तो 25 रुपये प्रदूषण शुल्क.....।

ग्राहक(सर पकड़ के): ग़ज़बै है भाई, लेकिन ई सब वसूलेगा कौन...??
क्लर्क:अरे अम्बानी से समझौता हुआ है, उसके आदमी वसूलेंगे.......

ग्राहक: एक आख़िरी बात बताओ। तुम्हें अभी कूटना हो तो कितना लगेगा......

क्लर्क: काहे बेट्टा ! हमको बोट दिए थे? अब अच्छे दिन आये हैं तो हमको काहे कूटोगे बे? जिसकी भक्ति की थी उसको कूटौ और अब और एक सवाल किया तो 10 रूपए अलग से। 3 और पूछो और 100 का नोट निकालो।
काहे कि छुट्टा तो है नहीं हमारे पास.......।

Sunday, 11 June 2017

Jokes and chutkule in Hindi


  ☎ट्रिंग ट्रिंग☎

लड़का ~ हेल्लो कौन?
लड़की ~ मैं पूनम और तुम कौन???

लड़का ~ मैं अमावस
😂😂😂😂😂😂
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 😁😁😁
हद तो जब हो गई जब एक शानदार बारात में…

लाइट पकड़ने वाली एक औरत

दुल्हे के पास जाकर बोली…..

बाबूजी…
पहचाना….????
दूल्हा- नही
लाइट वाली- में एंजेल प्रिया आपकी
Facebook Friend
😜😂😂😂😂😂😜
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महिलाओं ने शराब की🍷 दुकानें बन्द करा दी है पुरुषों को चाहिए कि ब्यूटीपार्लर बन्द करा दे औरतों का असली चेहरा😼 सामने आ जायेगा 

                 भड़का हुआ एक शराबी
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😀😀😀😀😀😀😀😀
👩 पत्नी:- I Love U
       I cnt live without u!
मर जाउंगी...!
मिट जाउंगी..! 
जहर पी जाउंगी....!
तेरे प्यार में फनाह हो जाउंगी ..!

👨 पति;- 
देख ले जैसा तुझे ठीक लगे............
 ...😄😄 😝😜😜😜😜😜
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 मालिक ने नौकर से कहा: मच्छर मार दो, बहुत हो गए हैं...!
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नौकर आलस में पड़ा रहा...!
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थोड़ी देर बाद भी मच्छर गुनगुना रहे थे...!
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मालिक ने फिर नौकर से कहा, मच्छर मारे नहीं क्या...?
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नौकर ने मालिक से कहा: मच्छर को तो कब के मार दिये, 
ये तो उनकी विधवा पत्नियों की रोने की आवाज़ें है...!
😂😜😋😜😂😜😜😜😜😂👍👍
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छुट्टी  वाले  दिन  घर  पर  बैठा  पति

पत्नी  को  टेम्परेरी  सास  जैसा लगता  है..🤣

😆😁😄
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,बहुत थे मेरे भी चाहने वाले,
फिर इश्क़ हुआ और हम लावारिस हो गये..
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 🙏कोई सुलह करा दे आज जिन्दगी की उलझनों से।
      बड़ी तलब लगी है आज मुस्कराने की ।।
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.लाइफ बड़ी बोर सी हो गयी है 🙇🏻
हे भगवन उठा ले...
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और....

गोवा में पटक दे। 🍹🏊🏼🏄🏼
😜😜😛😛😂
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 सोया हुआ कुत्ता
और
सेल्फ़ी लेती हुई लड़की को कभी नहीं
छेड़ना चाहिए
 😜😜

Saturday, 10 June 2017

Story..... छोटा पाप




*एक ब्राह्मण दरिद्रता से बहुत दुखी होकर राजा के यहां धन याचना करने के लिए चल पड़ा। कई दिन की यात्रा करके राजधानी पहुंचा और राजमहल में प्रवेश करने की चेष्टा करने लगा।*
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*उस नगर का राजा बहुत चतुर था। वह सिर्फ सुपात्रों को दान देता था। याचक सुपात्र है या कुपात्र इसकी परीक्षा होती थी। परीक्षा के लिए राजमहल के चारों दरवाजों पर उसने समुचित व्यवस्था कर रखी थी।*
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*ब्राह्मण ने महल के पहले दरवाजे में प्रवेश किया ही था कि एक वेश्या निकल कर सामने आई। उसने राजमहल में प्रवेश करने का कारण ब्राह्मण से पूछा।*
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*ब्राह्मण ने उत्तर दिया कि मैं राजा से धन याचना के लिए आया हूं। इसलिए मुझे राजा से मिलना आवश्यक है ताकि कुछ धन प्राप्तकर अपने परिवार का गुजारा कर लूं।*
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*वेश्या ने कहा- महोदय आप राजा के पास धन मांगने जरूर जाएं पर इस दरवाजे पर तो मेरा अधिकार है। मैं अभी कामपीड़ित हूं। आप यहां से अन्दर तभी जा सकते हैं जब मुझसे रमण कर लें। अन्यथा दूसरे दरवाजे से जाइए।*
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*ब्राह्मण को वेश्या की शर्त स्वीकार न हुई। अधर्म का आचरण करने की अपेक्षा दूसरे द्वार से जाना उन्हें पसंद आया। वहां से लौट आये और दूसरे दरवाजे पर जाकर प्रवेश करने लगे।*
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*दो ही कदम भीतर पड़े होंगे कि एक प्रहरी सामने आया। उसने कहा इस दरवाजे पर महल के मुख्य रक्षक का अधिकार है। यहां वही प्रवेश कर सकता है जो हमारे स्वामी से मित्रता कर ले। हमारे स्वामी को मांसाहार अतिप्रिय है। भोजन का समय भी हो गया है इसलिए पहले आप भोजन कर लें फिर प्रसन्नता पूर्वक भीतर जा सकते हैं। आज भोजन में हिरण का मांस बना है।*
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*ब्राह्मण ने कहा कि मैं मांसाहार नहीं कर सकता। यह अनुचित है। प्रहरी ने साफ-साफ बता दिया कि फिर आपको इस दरवाजे से जाने की अनुमति नहीं मिल सकती। किसी और दरवाजे से होकर महल में जाने का प्रयास कीजिए।*
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*तीसरे दरवाजे में प्रवेश करने की तैयारी कर ही रहा था कि वहां कुछ लोग मदिरा और प्याले लिए बैठे मदिरा पी रहे थे। ब्राह्मण उन्हें अनदेखा करके घुसने लगा तो एक प्रहरी आया और कहा थोड़ा हमारे साथ मद्य पीयो तभी भीतर जा सकते हो। यह दरवाजा सिर्फ उनके लिए है जो मदिरापान करते हैं। ब्राह्मण ने मद्यपान नहीं किया और उलटे पांव चौथे दरवाजे की ओर चल दिया।*
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*चौथे दरवाजे पर पहुंचकर ब्राह्मण ने देखा कि वहां जुआ हो रहा है। जो लोग जुआ खेलते हैं वे ही भीतर घुस पाते हैं। जुआ खेलना भी धर्म विरुद्ध है।*
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*ब्राह्मण बड़े सोच-विचार में पड़ा। अब किस तरह भीतर प्रवेश हो, चारों दरवाजों पर धर्म विरोधी शर्तें हैं। पैसे की मुझे बहुत जरूरत है इसलिए भीतर प्रवेश करना भी जरूरी है। एक ओर धर्म था तो दूसरी ओर धन। दोनों के बीच घमासान युद्ध उसके मस्तिष्क में होने लगा। ब्राह्मण जरा सा फिसला।*
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*उसने सोचा जुआ छोटा पाप है। इसको थोड़ा सा कर लें तो तनिक सा पाप होगा। मेरे पास एक रुपया बचा है। क्यों न इस रुपये से जुआ खेल लूं और भीतर प्रवेश पाने का अधिकारी हो जाऊं। विचारों को विश्वास रूप में बदलते देर न लगी। ब्राह्मण जुआ खेलने लगा। एक रुपये के दो हुए, दो के चार, चार के आठ, जीत पर जीत होने लगी। ब्राह्मण राजा के पास जाना भूल गया और अब जुआ खेलने लगा। जीत पर जीत होने लगी। शाम तक हजारों रुपयों का ढेर जमा हो गया। जुआ बन्द हुआ। ब्राह्मण ने रुपयों की गठरी बांध ली. दिन भर से खाया कुछ न था। भूख जोर से लग रही थी। पास में कोई भोजन की दुकान न थी। ब्राह्मण ने सोचा रात का समय है कौन देखता है चलकर दूसरे दरवाजे पर मांस का भोजन मिलता है वही क्यों न खा लिया जाए?*
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*स्वादिष्ट भोजन मिलता है और पैसा भी खर्च नहीं होता, दोहरा लाभ है। जरा सा पाप करने में कुछ हर्ज नहीं। मैं तो लोगों के पाप के प्रायश्चित कराता हूं। फिर अपनी क्या चिंता है, कर लेंगे कुछ न कुछ। ब्राह्मण ने मांस मिश्रित स्वादिष्ट भोजन को छककर खाया।*
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*अस्वाभाविक भोजन को पचाने के लिए अस्वाभाविक पाचक पदार्थों की जरूरत पड़ती है। तामसी, विकृत भोजन करने वाले अक्सर पान, बीड़ी, शराब की शरण लिया करते हैं। कभी मांस खाया न था। इसलिए पेट में जाकर मांस अपना करतब दिखाने लगा। अब उन्हें मद्यपान की आवश्यकता महसूस हुई। आगे के दरवाजे की ओर चले और मदिरा की कई प्यालियां चढ़ाई। अब वह तीन प्रकार के नशे में थे। धन काफी था साथ में सो धन का नशा, मांसाहार का नशा और मदिरा भी आ गई थी।*
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*कंचन के बाद कुछ का, सुरा के बाद सुन्दरी का, ध्यान आना स्वाभाविक है। पहले दरवाजे पर पहुंचे और वेश्या के यहां जा विराजे। वेश्या ने उन्हें संतुष्ट किया और पुरस्कार स्वरूप जुए में जीता हुआ सारा धन ले लिया।*
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*एक पूरा दिन चारों द्वारों पर व्यतीत करके दूसरे दिन प्रातःकाल ब्राह्मण महोदय उठे। वेश्या ने उन्हें घृणा के साथ देखा और शीघ्र घर से निकाल देने के लिए अपने नौकरों को आदेश दिया। उन्हें घसीटकर घर से बाहर कर दिया गया।*
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*राजा को सारी सूचना पहुंच चुकी थी। ब्राह्मण फिर चारों दरवाजों पर गया और सब जगह खुद ही कहा कि वह शर्तें पूरी करने के लिए तैयार है प्रवेश करने दो पर आज वहां शर्तों के साथ भी कोई अंदर जाने देने को राजी न हुआ। सब जगह से उन्हें दुत्कार दिया गया। ब्राह्मण को न माया मिली न राम! "जरा सा" पाप करने में कोई बड़ी हानि नहीं है, यही समझने की भूल में उसने धर्म और धन दोनों गंवा दिए।*
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*अपने ऊपर विचार करें कहीं ऐसी ही गलतियां हम भी तो नहीं कर रहे हैं। किसी पाप को छोटा समझकर उसमें एक बार फंस जाने से फिर छुटकारा पाना कठिन होता है। जैसे ही हम बस एक कदम नीचे की ओर गिरने के लिए बढ़ा देते हैं फिर पतन का प्रवाह तीव्र होता जाता है और अन्त में बड़े से बड़े पापों के करने में भी हिचक नहीं होती। हर पाप के लिए हम खोखले तर्क भी तैयार कर लेते हैं पर याद रखें जो खोखला है वह खोखला है। छोटे पापों से भी वैसे ही बचना चाहिए जैसे अग्नि की छोटी चिंगारी से सावधान रहते हैं।  सम्राटों के सम्राट परमात्मा के दरबार में पहुंचकर अनन्त रूपी धन की याचना करने के लिए जीव रूपी ब्राह्मण जाता है*
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*प्रवेश द्वार काम, क्रोध लोभ, मोह के चार पहरेदार बैठे हुए हैं। वे जीव को तरह-तरह से बहकाते हैं और अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यदि जीव उनमें फंस गया तो पूर्व पुण्यों रूपी गांठ की कमाई भी उसी तरह दे बैठता है जैसे कि ब्राह्मण अपने घर का एक रुपया भी दे बैठा था। जीवन इन्हीं पाप जंजालों में व्यतीत हो जाता है और अन्त में वेश्या सरूपी ममता के द्वार से दुत्कारा जाकर रोता पीटता इस संसार से विदा होता है। देखना कहीं हम भी उस ब्राह्मण की नकल तो नहीं कर रहे हैं। कोई भी व्यक्ति दो के समक्ष कुछ नहीं छुपा सकता। एक तो वह स्वयं और दूसरा ईश्वर। हमारी अंतरात्मा हमें कई बार हल्का सा ही सही एक संकेत देती जाती हैं कि आप जो कर रहे हैं वह उचित नहीं है। हमें सही को चुनना है।

Majedar new jokes in Hindi



 अब ये अफ़वाह कौन फैला रहा है कि चाँद पर कदम रखने वाले पहले इंसान बाहुबली थे। 

नाम को अंग्रेज़ी में ट्रांस्लेट करके ARMSTRONG रख लिया था।
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दोस्त  : यार ये शादी का क्या मतलब होता हे ?





पप्पू  : धूमधाम से खुद की सुपारी देना ......?
😃😃😃😜😜😜😏😏😔😔😒😳😳
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 लड़का शादी के लिए लड़की देखने गया ..😄😃😃😃
उसने सोचा , क्यों न लड़की से अंग्रेजी में बात करूँ .
उसने लड़की से पूछा -  इंग्लिस चलेगी ना ...?😃😃😃
लड़की शरमाते हुए बोली - जी प्याज और नमकीन साथ हो तो देशी भी चलेगी ..😆😅😀😊
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 प्रश्न : *पत्नी क्या है???*

उत्तर : *पत्नी  वो शक्ति है जिसके घूरने मात्र से लौकी की सब्ज़ी में पनीर का स्वाद आने लगता है..*!😉
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 *आज की गुदगुदी*
😜😝😃🙃😆😅😁😃😝
PUNJABI SPECIAL. ...
Wife: 
सुनो जी अगर मैं मर गयी ते तुसी किन्ने दिन बाद दूजा व्याह करोगे?

Santa:
महंगाई दा जमाना है कोशिश ते एही रवेगी कि भोग दे नाल ही  reception adjust हो जावे।     
 😂😂😂😂😂😂😜😁😇
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 हिंदुओं को तीन तलाक का अधिकार भले मत दो ...

"लेकिन यह तो कर दो कि जब हिंदू पुरुष अपनी पत्नियों को 3 बार बोले -चुप..चुप..चुप..

 तो वह कम से कम चुप तो  हो जाए....
😉😉😉
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 बारहवीं में *टॉप करने वाले* और पास करने वालों को निकट भविष्य में इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, जॉर्नलिस्ट इत्यादि बनने कि शुभकामनाएं ।।

*तथा*

इस परीक्षा में *फेल हो गए छात्रों* को भी विधायक , सांसद , मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री बनने की अग्रिम बधाई।।।
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जयपुर का मशहूर बाजार है....
*#चांदपोल_बाजार*

शाम के 5 बजे बाजार भीड़ से भरा हुआ था। इसी भीड़ में पति-पत्नी एक दूसरे से लड़ने में व्यस्त थे और लगभग 200  लोग उनके इस तमाशे का मज़ा ले रहे थे। 

बात कुछ यूँ थी कि पत्नी जिद कर रही थी अपने पति से कि आज आप कार खरीद ही लीजीये मैं थक गई हूं आपकी मोटर साइकिल पर बैठ बैठ कर।  

पति ने कहा....... ओए पागल औरत तमाशा ना बना मेरा दुनिया के सामने।  मोटर साइकिल की चाभी मुझे दे। 

पत्नी- नहीं, तुम्हारे पास इतना पैसा है । आज कार लोगे तो ही घर जाऊंगी। 

पति-"अच्छा तो ले लुँगा अब चाभी दो" 

पत्नी - नहीं दूंगी। 

पति- "अच्छा ना दो मैं ताला ही तोड़ देता हूँ"

पत्नी ने कहा.... तोड़ दो लेकिन ना चाभी मिलेगी ना में साथ जाऊँगी ।

पति - "अच्छा तो ये ले मैं ताला तोड़ने लगा हूँ जाओ तुम्हारी मर्ज़ी मेरे घर ना आना" 

पत्नी - जाओ जाओ नहीं आती तुम जैसे कंजूस के घर। 

पति ने लोगों की मदद से मोटरसाइकिल का ताला खोल लिया,  अपनी बाइक पर बैठ गया और बोला, "तुम आती हो या मैं जाऊँ"

वहाँ खड़े लोगों ने पत्नी को समझाया -  चली जाओ इतनी सी बात पर अपना घर न खराब करो। 

फिर पत्नी ने पति से वादा लिया कि वह बाइक बेचकर जल्द ही कार लेगा। दोनों की सुलह हो गयी और दोनों चले गए। 

अच्छी कहानी है न 
लेकिन अभी ख़त्म नहीं हुई है

तो जनाब.........

ठीक आधे घंटे बाद उसी जगह  पर फिर से भीड़ लगी थी। 

*एक बंदा चिल्ला रहा था........*
*कोई मेरी मोटरसाइकिल दिन दहाडे चुरा कर ले गया।*😳😭
😁😁😁😁😁😁 
चोरो से सावधान
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 एक बिहारी ने परीक्षा में १००००० रूपए में सेटिंग करी ....
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शिक्षा अधिकारी को एडवांस ५०००० दे दिए..बाकि रकम बाद में देने का वादा किया....
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कॉपी चेक होने के बाद शिक्षा अधिकारी ने फ़ोन किया और बाकि रकम की मांग की..
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बिहारी बाकि रकम देने से मुकर गया तो बाबू ने अधिकारी से पूंछा अब क्या करें सर?
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अधिकारी बोला : साले को टॉप करवा दो...अपने आप भुगतेगा....
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आयकर के departmental exam का प्रश्न  :

"सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे सन्तु निरामया
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु
मा कश्चित् दुःखभाग भवेत"

इसका अर्थ बताओ।

Topper अधिकारी का जवाब:- 

सरकार आयकर अधिकारियों को निर्देश दे रही है -

"सभी सुखी लोगों के यहाँ सर्वे करो,
सभी निरोग लोगों के यहाँ सर्वे करो,
जो लोग देखने में भद्र (सज्जन) लगें उनके वहाँ सर्वे करो । 
कोई भी इस सर्वे रूपी दुःख से भागने ना पाये।

😳😳😭😭

Thursday, 8 June 2017

Did you see any coverage of Dilli Chalo movement of Indian Medical Association in Print media?




Did you see any coverage of Dilli Chalo movement of Indian Medical Association in Print media? Almost  non.
Media coverage has been dismal.

Reasons?

1. 10000 people in a rally at Rajghat but no traffic Jam to report
2. All hospitals closed their OPDs but ambulance chasers couldn't find any death to report as emergency services were running and most of the government hospitals just observed one hour symbolic pen down strike.

3. It was such a huge gathering of angry & disappointed doctors but no burning of buses, no road blockades, no violence 

So you understand what this fourth pillar of democracy needs to give you a voice, media needs anarchy and violence to give you voice.

They need sensationalism, they will always love to show you as villain. Media doesn't need heroes.

Dear friends, we ensured that our agitation should cause minimum inconvenience to public but still our voice should be heard & represented.

We have list of our grievances, which is becoming longer everyday. Hope wisdom will prevail in highest corridors of powers and government will take proactive steps to resolve our justified grievances. Media has always failed this democracy and hence we can expect least from them.

IMA has given government time till 18th August to resolve issues. If government fails, that will be last nail in the coffin of medical profession.
This profession will lose all reasons to serve this nation.
You can not expect us to continue to work in insecure work place, under threat of violence, you never want to be labeled as a criminal for results beyond your humanly controls and for clerical errors, you cannot continue to be made scapegoats for failures of governance & government.

We are among the brightest brains and can easily switch profession as we are no punching bags and opted this profession for a dignified life.

Here is brief summary of our Satyagrah on 6th June, which media failed to report due to lack of any sensational news.

On 6th June doctors protested against unfair treatment with them , all over country. It was a massive buildup. 10000 doctors across country physically attended the protest march & gathering under banner of Indian Medical association at Rajghat and Indira Gandhi Indoor Stadium. Around 45,000 attended webcast & were directly connected. Around 65000 doctors signed petition according to official statistics of IMA.

Doctors all over country kept their OPDs closed between 8 am to 2 PM. Others participated by pen down strike between 10 am to 11 am on 6th June . It was unprecedented.

IMA has decided that it and its membership will be forced to take extreme steps of stopping to work, if government doesn't listen to our *Justified Demands*. No one can continue to work under fear & threats. Let government fulfil its slogan of *Sabka Sarath Sabka Vikas*

After 18th August, it is squarely responsibility of our government, public & intelligentsia, if medical profession refuse to work under prevailing situations & circumstances.

From the Facebook page of Dr.Kinshuk Biswas, an Eye Specialist in Delhi NCR:

Wednesday, 7 June 2017

*' ॥ गंगा स्नान कथा॥ '*


*' ॥ गंगा स्नान कथा॥ '*

एक समय शिव जी महाराज पार्वती के साथ हरिद्वार में घूम रहे थे । पार्वती जी ने देखा कि सहस्त्रों मनुष्य गंगा में नहा-नहाकर 'हर-हर गंगे' कहते चले जा रहे हैं परंतु प्राय: सभी दुखी और पाप परायण हैं ।      ब     पार्वती जी ने बड़े आश्चर्य से शिव जी से पूछा कि " हे देव ! गंगा में इतनी बार स्नान करने पर भी इनके पाप और दुखों का नाश क्यों नहीं हुआ ? क्या गंगा में सामर्थ्य नहीं रही ?'
शिवजी ने कहा, '' प्रिये ! गंगा में तो वही सामर्थ्य है, परंतु इन लोगों ने पापनाशिनी गंगा में स्नान ही नहीं किया है तब इन्हें लाभ कैसे हो ?''
पार्वती जी ने आश्चर्य से कहा कि - '' स्नान कैसे नहीं किया ? सभी तो नहा-नहा कर आ रहे हैं ? अभी तक इनके शरीर भी नहीं सूखे हैं ।''
शिवजी ने कहा, ''ये केवल जल में डुबकी लगाकर आ रहे हैं । तुम्हें कल इसका रहस्य समझाऊंगा ।''
दूसरे दिन बड़े जोर की बरसात होने लगी । गलियां कीचड़ से भर गईं । एक चौड़े रास्ते में एक गहरा गड्ढा था, चारों ओर लपटीला कीचड़ भर रहा था । शिवजी ने लीला से ही वृद्ध रूप धारण कर लिया और दीन-विवश की तरह गड्ढे में जाकर ऐसे पड़ गए, जैसे कोई मनुष्य चलता-चलता गड्ढे में गिर पड़ा हो और निकलने की चेष्टा करने पर भी न निकल पा रहा हो ।
पार्वती जी को उन्होंने यह समझाकर गड्ढे के पास बैठा दिया कि -- *" देखो, तुम लोगों को सुना-सुनाकर यूं पुकारती रहो कि मेरे वृद्ध पति अकस्मात गड्ढे में गिर पड़े हैं कोई पुण्यात्मा इन्हें निकालकर इनके प्राण बचाए और मुझ असहाय की सहायता करे । शिवजी ने यह और समझा दिया कि जब कोई गड्ढे में से मुझे निकालने को तैयार हो तब इतना और कह देना कि ' भाई ! मेरे पति सर्वथा निष्पाप हैं इन्हें वही छुए जो स्वयं निष्पाप हो यदि आप निष्पाप हैं तो इनके हाथ लगाइए नहीं तो हाथ लगाते ही आप भस्म हो जाएंगे ।''*
पार्वती जी 'तथास्तु' कह कर गड्ढे के किनारे बैठ गईं और आने-जाने वालों को सुना-सुनाकर शिवजी की सिखाई हुई बात कहने लगीं । गंगा में नहाकर लोगों के दल के दल आ रहे हैं । सुंदर युवती को यूं बैठी देख कर कइयों के मन में पाप आया, कई लोक लज्जा से डरे तो कइयों को कुछ धर्म का भय हुआ, कई कानून से डरे । कुछ लोगों ने तो पार्वती जी को यह भी सुना दिया कि ' मरने दे बुड्ढे को क्यों उसके लिए रोती है ?' आगे और कुछ दयालु सच्चरित्र पुरुष थे, उन्होंने करुणावश हो युवती के पति को निकालना चाहा परंतु पार्वती के वचन सुनकर वे भी रुक गए । उन्होंने सोचा कि *' हम गंगा में नहाकर आए हैं तो क्या हुआ, पापी तो हैं ही, कहीं होम करते हाथ न जल जाएं । बूढ़े को निकालने जाकर इस स्त्री के कथनानुसार हम स्वयं भस्म न हो जाएं ।'* किसी का साहस नहीं हुआ । सैंकड़ों आए, सैंकड़ों ने पूछा और चले गए । संध्या हो चली । शिवजी ने कहा, '' पार्वती ! देखा, आया कोई सच्चे ह्रदय से गंगा में नहाने वाला है ?''
थोड़ी देर बाद एक जवान हाथ में लोटा लिए हर-हर गंगे करता हुआ निकला, पार्वती ने उसे भी वही बात कही । युवक का हृदय करूणा से भर आया । उसने शिवजी को निकालने की तैयारी की । पार्वती ने रोक कर कहा कि '' भाई यदि तुम सर्वथा निष्पाप नहीं होगे तो मेरे पति को छूते ही जल जाओगे ।''
उसने उसी समय बिना किसी संकोच के दृढ़ निश्चय के साथ पार्वती से कहा कि *" माता ! मेरे निष्पाप होने में तुझे संदेह क्यों होता है ? देखती नहीं मैं अभी गंगा नहाकर आया हूं । भला, गंगा में गोता लगाने के बाद भी कभी पाप रहते हैं ? तेरे पति को निकालता हूं । युवक ने लपककर बूढ़े को ऊपर उठा लिया " । शिव-पार्वती ने उसे अधिकारी समझकर अपना असली स्वरूप प्रकट कर उसे दर्शन देकर कृतार्थ किया ।'* शिवजी ने पार्वती से कहा कि ''इतने लोगों में से इस एक ने ही गंगा स्नान किया है ।''
इसी दृष्टांत के अनुसार जो लोग बिना श्रद्धा और विश्वास के केवल दंभ के लिए गंगा स्नान करते हैं उन्हें वास्तविक फल नहीं मिलता परंतु इसका यह मतलब नहीं कि गंगा स्नान व्यर्थ जाता है । गंगा स्नान का बहुत पुण्य भी है ।
                        *॥ हर हर गंगे हर हर महादेव ॥*

Tuesday, 6 June 2017

हिंदी कहानी --जादूगर और प्रार्थना


हिंदी कहानी --जादूगर और प्रार्थना


एक जादूगर जो मृत्यु के करीब था, उसने मृत्यु से पहले अपने बेटे को चाँदी के सिक्कों से भरा थैला दिया और बताया की "जब भी इस थैले से चाँदी के सिक्के खत्म हो जाएँ तो मैं तुम्हें एक प्रार्थना बताता हूँ, उसे दोहराने से चाँदी के सिक्के फिर से भरने लग जाएँगे । उसने बेटे के कान में चार शब्दों की प्रार्थना कही और वह मर गया । 
अब बेटा चाँदी के सिक्कों से भरा थैला पाकर आनंदित हो उठा और उसे खर्च करने में लग गया । वह थैला इतना बड़ा था की उसे खर्च करने में कई साल बीत गए, इस बीच वह प्रार्थना भूल गया । जब थैला खत्म होने को आया तब उसे याद आया कि "अरे! वह चार शब्दों की प्रार्थना क्या थी ।" उसने बहुत याद किया, उसे याद ही नहीं आया ।

अब वह लोगों से पूँछने लगा । पहले पड़ोसी से पूछता है की "ऐसी कोई प्रार्थना तुम जानते हो क्या, जिसमें चार शब्द हैं । पड़ोसी ने कहा, "हाँ, एक चार शब्दों की प्रार्थना मुझे मालूम है, "ईश्वर मेरी मदद करो ।" उसने सुना और उसे लगा की ये वे शब्द नहीं थे, कुछ अलग थे ।  फिर भी उसने वह शब्द बहुत बार दोहराए, लेकिन चाँदी के सिक्के नहीं बढ़े तो वह बहुत दुःखी हुआ । फिर एक फादर से मिला, उन्होंने बताया की "ईश्वर तुम महान हो" ये चार शब्दों की प्रार्थना हो सकती है, मगर इसके दोहराने से भी थैला नहीं भरा । 
वह एक नेता से मिला, उसने कहा "ईश्वर मुझे वोट दिलाओ" यह प्रार्थना भी कारगर साबित नहीं हुई । वह बहुत उदास हुआ ।

उसने सभी से मिलकर देखा मगर उसे वह प्रार्थना नहीं मिली, जो पिताजी ने बताई थी । 
वह उदास होकर घर में बैठा हुआ था तब एक भिखारी उसके दरवाजे पर आया । उसने कहा, "सुबह से कुछ नहीं खाया, खाने के लिए कुछ हो तो दो ।" उस लड़के ने बचा हुआ खाना भिखारी को दे दिया । भिखारी खाना खाकर बोला :-
 *"हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद ।"* 
अचानक वह चोंक पड़ा और चिल्लाया की "अरे! यही तो वह चार शब्द थे ।" उसने वे शब्द दोहराने शुरू किए-
"हे ईश्वर तुम्हारा धन्यवाद"....
और उसके सिक्के बढ़ते गए... बढ़ते गए... इस तरह उसका पूरा थैला भर गया 
*किसी की मदद की तब उसे वह मंत्र फिर से मिल गया ।  "हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद ।" 
यही उच्च प्रार्थना है क्योंकि जिस चीज के प्रति हम धन्यवाद देते हैं, वह चीज बढ़ती है । अगर पैसे के लिए धन्यवाद देते हैं तो पैसा बढ़ता है, प्रेम के लिए धन्यवाद देते हैं तो प्रेम बढ़ता है । ईश्वर या गुरूजी के प्रति धन्यवाद के भाव निकलते हैं कि ऐसा ज्ञान सुनने तथा पढ़ने का मौका हमें प्राप्त हुआ है । बिना किसी प्रयास से यह ज्ञान हमारे जीवन में उतर रहा है ।

Jokes.......... Statements of different leaders on India's win over Pakistan


केजरीवाल :- जनता पाकिस्तान के साथ है, फिर भारत ये मैच कैसे जीत सकता है ?? मोदी जी ने स्कोरबोर्ड से छेड़छाड़ करवाई है जी। जब 40 ओवर में 213 रन बनते हैं,10 ओवर में 53 के हिसाब से,तो अंतिम 8 ओवर में इन्होंने100 से ज्यादा रन कैसे बना लिए इसकी जाँच होनी चाहिये। मोदी जी देश की आँखों में धूल झोंक रहे हैं।



सौरभ भारद्वाज :- मैंने विदेशों में काफी कार्य किया है।मैं जानता हूँ कि स्कोरबोर्ड कैसे हैक किया जाता है। मैं केवल 90 सेकंड में मैं स्कोरबोर्ड हैक कर सकता हूँ।मैं चुनौती देता हूँ, केवल 90 सेकंड मुझे दे दो,फिर देखना केवल पाकिस्तान ही जीतेगा।



मायावती :- मोदी जी मनुवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। वो दूसरों को आगे बढ़ने  देना नही चाहते। उनके राज में मुस्लिमों पर अत्याचार बढ़ा है। हमारी संवेदनायें पाकिस्तान के साथ है।



राहुल गाँधी :- मोदी जी केवल एक विचारधारा सब पर थोपना चाहते हैं। इसलिये उन्होंने पहले तो पाकिस्तानियों को खूब मारा और फिर जब उनकी बल्लेबाजी आयी,तो जल्दी आउट कर दिया। ये उनकी आवाज दबाने की कोशिश है। उन्हें भी हक है चौके छक्के मारने का। उन्हें भी हक था कि वो पुरे 48 ओवर्स बल्लेबाजी करते। इस तरह आप उन्हें नही हरा  सकते। आप उनका हक छीन रहे हो ।हम उनके हक के लिए हमेशा लड़ते रहे हैं, और आगे भी लड़ेंगे। हम मोदी जी से डरने वाले नही हैं।



के सी त्यागी :- देखिये,क्रिकेट एक सेक्युलर खेल है, और यही इसकी खूबसूरती है। आप इस तरह किसी को नही हरा सकते । मैं मानता हूँ कि अंतिम के ओवरों में कोहली को ज्यादा आक्रामक नही होना चाहिए था, और पंड्या ने जो लगातार तीन छक्के मारे मैं उससे बिल्कुल भी सहमत नही हूँ। ऐसा नही होना चाहिये था।यह घटना दुखद घटना है। मैं इसकी निंदा करता हूँ।



मुलायम सिंह यादव :- पाकिस्तान को जिताने के लिये अगर मुझे कई खिलाड़ियों के टिकट काटने पड़ते,तो भी मैं पीछे नही हटता।



लालू यादव :- हॉप बुड़बक, ई कौनो अपने से जीता है।मोदिया जितवाया है सबके।ई सब संघी विचारधारा के लोग भारत के लिए खतरा है।बताईये त, अपना बेरी चार बार पानी गिरवाये, सुस्ता सुस्ता के बैटिंग किए.... अउ जब पाकिस्तान का बारी आया तो धूप निकलवा दिये। एतना गर्मी में कौन खेले पायेगा। अब देखियेगा, हम सब ऊपरे वाला मिल के ई सब संघी लोग के कैसे आउट करेंगे....जाइये रहे हैं दिल्ली।
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