ad

Tuesday, 1 November 2016

सीधे आगरा के पागलखाने से ... क्यों पहुंचा एक पति वहां ?

सीधे आगरा के पागलखाने से ... क्यों पहुंचा एक पति वहां ?

Wife : Jannu Main Apne Baal Katwa Loun????
Husband : Katwa Le...

Wife : Itni Mushkil se Lambay Kiye..
Husband : Tou Phir Na Katwa...

Wife : Magar Aj Kal Chhotay Baal in Hain...
Husband : Tou Phir Na Katwa...

Wife : Mere Friends kehti Hain Mere Face cut k sath Short Hair Suit Karengy...
Husband : Tou Phir Katwa Le....

Wife : Magar Chhotay Balon ki Chotti Nai Banti....
Husband : Tou Phir Na Katwaa...

Wife : soch Rahi hun experiment kr k dekh loun...
Husband : Tou Phir Katwa Le...

Wife : Lekin agr kharab ho Gaye Tou?
Husband : Tou Phir Na Katwa...

Wife : soch rahi hun Katwa loun...
Husband : tou phir Katwa le...

Wife : agar suit Na kiye Tou Aap responsible houngy....
Husband : Tou phir Na Katwa...

Wife : wesay chhotay baal sambhalna asan hota hai...
Husband : Tou phir katwa le...

Wife : Dar Lagta hai kaheen buray na lagen....
Husband : Tou phir na Katwa....

Wife : acha ab decide kr lia main ne katwa he leti hun...
Husband : Tou Phir Katwa Le...

Wife : Tou Phir Kab Chalengy ????
Husband : Tou Phir na katwa...

Wife : Main Ammi ki taraf janay ki baat Kar rahi hun...
Husband : Tou phir Katwa Le....

Wife : ap kia keh rahay hain???? Apki tabiyat Theek Hai ?
Husband : Tou phir Na Katwa....
" Yeh Husband Bechara ab Aagra k Pagal Khanay Main betha sara din yehi Bolta rehta hai...."

Acha Phir Katwa le
Acha phir Na Katwa

Hindi Story ..................... एक राजा को मलाई रबड़ी खाने का शौक था ।

एक राजा को मलाई रबड़ी खाने का शौक था ।

उसे रात में सोने से पहले मलाई रबड़ी खाए बिना नीद नहीं आती थी ।
इसके लिए राजा ने सुनिश्चित किया कि *खजांची* (जो राज्य के धन का लेखा जोखा रखता है) एक नौकर को रोजाना चार आने दे मलाई लाने के लिए ।
यह क्रम कई दिनों तक चलता रहा ।
कुछ समय बाद खजांची को शक हुआ कि कहीं *नौकर* चार आने की मलाई में गड़बड़ तो नहीं कर रहा ।
उसने चुपचाप नौकर पर नजर रखनी शुरू कर दी ।
खजांची ने पाया कि नौकर केवल तीन आने की मलाई लाता है और एक आना बचा लेता है ।
अपनी चोरी पकड़ी जाने पर नौकर ने खजांची को एक आने की रिश्वत देना शुरू कर दिया ।
अब राजा को दो आने की मलाई रबड़ी मिलती जिसे वह *चार आने* की समझ कर खाता ।
कुछ दिन बाद राजा को शक हुआ कि मलाई की मात्रा में कमी हो रही है ।
राजा ने अपने *खास मंत्री* को अपनी शंका बतलाई और असलियत पता करने को कहा ।
मंत्री ने पूछताछ शुरू की । खजांची ने एक आने का प्रस्ताव मंत्री को दे दिया ।
अब हालात ये हुए कि नौकर को केवल दो आने मिलते जिसमें से एक आना नौकर रख लेता और केवल एक आने की मलाई रबड़ी राजा के लिए ले जाता ।
कुछ दिन बीते । इधर हलवाई जिसकी दुकान से रोजाना मलाई रबड़ी जाती थी उसे संदेह हुआ कि पहले चार आने की मलाई जाती थी अब घटते घटते एक आने की रह गई ।
*हलवाई* ने नौकर को पूछना शुरू किया और राजा को बतलाने की धमकी दी ।
नौकर ने पूरी बात खजांची को बतलाई और खजांची ने मंत्री को ।
अंत में यह तय हुआ कि एक आना हलवाई को भी दे दिया जाए ।
अब *समस्या* यह हुई कि मलाई कहां से आएगी और राजा को क्या बताया जाएगा ।
इसकी जिम्मेदारी मंत्री ने ले ली।
इस घटना के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि राजा को मलाई की प्रतीक्षा करते नींद आ गयी ।
इसी समय मंत्री ने राजा की मूछों पर सफेद चाक(खड़िया) का घोल लगा दिया ।
अगले दिन राजा ने उठते ही नौकर को बुलाया तो मंत्री और खजांची भी दौड़े आए।
राजा ने पूछा -कल मलाई क्यों नही लाऐ ।
नौकर ने खजांची और मंत्री की ओर देखा ।
मंत्री बोला - हुजर यह लाया था, आप सो गए थे इसलिए मैने आपको सोते में ही खिला दी।
देखिए अभी तक आपकी मूछों में भी लगी है।
यह कहकर उसने राजा को आईना दिखाया।
मूछों पर लगी सफेदी को देखकर राजा को विश्वास हो गया कि उसने मलाई खाई थी।
अब यह रोज का क्रम हो गया, खजाने से चार आने निकलते और बंट जाते।
राजा के मुंह पर सफेदी लग जाती
*बचपन की सुनी यह कहानी* आज के समय में भी सामयिक है ।
आप कल्पना करें कि *आम जनता राजा* है, *मंत्री हमारे नेता* हैं और *अधिकारी व ठेकेदार क्रमश: खजांची और हलवाई* हैं ।पैसा भले कामों के लिए निकल रहा है और आम आदमी को चूना दिखाकर संतुष्ट किया जा रहा है।

मदनटेर वाले बाबा जी

वृन्दावन में मदनमोहन जी के मंदिर के निकट किसी कुटिया में बाबा रहते थे।
.
उनका नाम कोई नहीं जानता। सभी लोग उन्हें मदनटेर वाले बाबा जी के नाम से जानते थे क्योंकि वे मदनटेर पर ही रहते थे।
.
वे सुबह होते ही मदनटेर के सघन कुंजों में जा बैठते।
.
दिन भर राधा कृष्ण की लीलाओं का स्मरण करते हुए अश्रुविर्सजन करते।
.
शाम के समय गोविंद जी के मंदिर में जाकर रो रोकर उन से कुछ निवेदन करते, अपनी बात मनवाने के लिए प्रार्थना करते और लौट आते।
.
लौटते हुए दो चार घरों से कुछ मधुकरी मांग लाते और खाकर सो जाते।
.
मन ही मन ठाकुर जी से कुछ न कुछ मांगते रहते और रोते रहते। हर समय उनकी आंखों में आंसू होते।
.
एक दिन वह अपनी दृष्टि खो बैठे पर इसका उन्हें तनिक भी दुख न था।
.
वे सोचते जो नेत्र ठाकुर जी के साक्षात दर्शन न करवा पाएं उनका न रहना ही अच्छा था।
.
इसी प्रकार ठाकुर और ठकुरानी के विरह में रोते-रोते बाबा को बहुत वर्ष व्यतित हो गए थे।
.
जीवन की संध्या आ पंहुची थी। धैर्य का बांध टूट चुका था। विरह वेदना असहय हो चुकी थी।
.
कभी कभी तो भगवान से अपनी बात मनवाने की ललक में मूर्छित हो घण्टों मदनटेर के छुरमुटों में पड़े रहते। उनसे सहानुभुति करने वाला वहां कोई न था।
.
एक दिन वह ठाकुर जी से मिलने की अभिलाषा में मदनटेर पर बैठे रो रहे थे।
.
श्री राधा कृष्ण उधर से टहलते हुए आ निकले। बाबा को रोते देख श्री राधे श्री कृष्ण से बोली," बाबा हमारी याद में रो रहे हैं। इन्हें चुप करवाओ
.
श्री कृष्ण बाबा से बोले, "बाबा रो क्यों रहे हो ?"
.
बाबा झुंझलाकर बोले," जा यहां से ग्वालिया जाकर अपनी गईयां चरा। तेरे को क्या मतलब मुझ से।"
.
श्री कृष्ण राधा से बोले," बाबा तो मान ही नहीं रहे हैं। अब मैं क्या करूं ?"
.
श्री राधे बोली, "आप से न होगा, मैं अभी आती हूं।"
.
श्री राधे बाबा के पास गई और बोली," बाबा क्यों रो रहे हो ? आपकी घरवाली मर गई है क्या ?"
.
बाबा हंस पड़े बोले," अरे प्यारी लाली ! मेरी तो घरवाली है ही नहीं।"
.
श्री राधे बोली," फिर क्यों रोते हो ?"
.
बाबा बोले," मेरे जो अपने हैं वह मुझे भुल गए हैं।"
.
श्री राधे बोली, "वो कौन हैं बाबा ?"
.
बाबा बोले," वही ब्रज का छलिया उसका भजन करते करते मैं बूढ़ा हो गया हूं, घर परिवार नहीं बसाया कहीं उसके लिए मेरा प्रेम कम न हो जाए।
.
पर वो ऐसा है कि अपनी एक छलक तक नहीं दिखाता। राधा कृष्ण दोनों निष्ठुर हैं।"
.
श्री राधे चौंक गई, "मैं ! मैं निष्ठुर ! दूसरे ही क्षण अपने को छिपाती हुई बोली, मेरा भी नाम राधा है बताओ आप को क्या चाहिए ?"
.
बाबा बोले, "चाहना क्या है इस जीवन में राधा कृष्ण अपनी एक झलक दिखा जाते बस और कुछ नहीं चाहिए।"
.
श्री राधे बोली, "बाबा आप भी कितने भोले हैं आपकी आंखे तो है नहीं देखोगे कैसे ?"
.
बाबा बोले," भोली तो तू है लाली जब श्री राधा कृष्ण मेरे सम्मुख आएंगे तो क्या मेरी आंखों में ज्योति न आ जाएगी ?"
.
भोली भाली श्री राधा रानी से रहा न गया उन्होंने बारी बारी से बाबा की दोनों आंखों को स्पर्श किया और बाबा की आंखों की ज्योति आ गई।
.
अपने सामने श्री राधाकृष्ण के साक्षात दर्शन पाकर वे आनंद के कारण बेहोश हो गए।
.
बेहोशी की हालत में वह रात भर वहीं पड़े रहे। भोर फटते ही कुछ लोगों ने उन्हें पहचान लिया और वे उन्हें मदनमोहन जी के मंदिर में ले गए।
.
मदनमोहन जी के मंदिर में प्रवेश करते ही वहां के गोस्वामी जी समझ गए कि बाबा के ऊपर मदन मोहन जी की विशेष कृपा हुई है।
.
उन्होंने बाबा को घेरकर समस्त भक्तों के साथ मिल कर र्कीतन करना आरंभ किया।
.
र्कीतन ध्वनी कान में पड़ते ही बाबा की चेतना लौटने लगी।
.
गोस्वामी जी उन्हें एकांत में ले गए और उनसे मूर्छा का कारण पूछा तो रो-रो कर उन्होंने सारी घटना का वृतांत बता दिया और बोले,"
.
मैंने भगवान को अपने प्रेम के मोहुपाश में बांध कर अपने मन की तो करवा ली....
.
मगर शायद मेरे प्रेम में ही कोई कमी रह गई थी जिससे राधा कष्ण के मिलकर बिछुड़ जानें का दुख उनके न मिलने के दुख से भी अधिक असहाय हो गया है।

बोलिये भक्त वत्सल भगवान की जय।।
(((((( जय जय श्री राधे ))))))))

Jokes .............. How a surgeon and gynecologist works?

How a surgeon and gynecologist works?

Once upon a time there lived a brother and his sister.
The brother was a surgeon and the sister a gynaecologist . One day the two of them together performed a surgery and saved a farmer's daughter's life.
The farmer gave them each a hen as a token of his gratitude. He said that the hens would lay eggs of gold !!
And so they did, one egg every month. After a couple of months the surgeon's patience failed him & he decided to "open and see" and as expected he lost the hen and all the gold that would have come from it.
After some time had lapsed he noticed that his sister had become extremely rich, even more than what the eggs of gold could have made her.
He asked her. She said, "Oh brother I worked hard and put all my knowledge to use and
it seems to have worked really well"
"How ?" the brother asked !! "What is it that you are doing and I can't?" asked the brother.
"You see" she said " My ovulation induction protocol is working really well - on the hen!! 

Our Govardhan Pooja

Our Govardhan Maharaj




After pooja when we went to see a movie, luckily we booked our tickets earlier