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Thursday, 24 March 2016

ज्ञानी जी का ज्ञान....................रेस में जीतने वाले घोड़े को तो पता भी नही होता कि जीत वास्तव में क्या है

1 "क्या फर्क पड़ता है,
हमारे पास कितने लाख,
कितने करोड़,
कितने घर,
कितनी गाड़ियां हैं,
खाना तो बस दो ही रोटी है।
जीना तो बस एक ही ज़िन्दगी है।
फर्क इस बात से पड़ता है,
कितने पल हमने ख़ुशी से बिताये,
कितने लोग हमारी वजह से खुशी से जीए ...

2 ", वो तो अपने
मालिक द्वारा दी गई तकलीफ
कि वजह से ही दौड़ता है, इसलिए
यदि आपके जीवन मे कभी कोई
तकलीफ आए तो समझ
लेना कि आपका मालिक
आपको जीताना चाहता है ।

3 खाया पीया अंग लगेगा ।
दान दिया संग चलेगा ।
बाकि बचा जंग लगेगा ।।
धन घर तक साथ चलेगा ।
परीवार श्मशान तक साथ चलेगा
पर धर्म और सेवा भाव
तो दुसरे जन्म में भी आपके साथ साथ चलेगा ।

4 उद्योग ( निष्काम कर्म ) को मित्र की तरह ग्रहण करना चाहिये ।
प्रमाद को शत्रु की तरह त्यागना चाहिये ।
उद्यम से परम सिध्दि मिलती है, तथा प्रमाद से क्षय होता है ।

5 दुष्ट की विद्या विवाद के लिए,
धन अहंकार के लिए और
शक्ति दूसरों को कष्ट देने के लिए होती है ।
इसके विपरीत सज्जनों की विद्या ज्ञान के लिए,
धन दान के लिए और
शक्ति पर सेवा के लिए होती है।

6...  70 हजार की गाडी मे कभी मिट्टी का तेल नही डालते
क्यों ?
गाडी का इंजन खराब हो जायेगा...
70 हजार की गाडी की आपको इतनी चिंता है..?
कभी मन मे काम क्रोध लोभ मोह अंहकार डालने के पहले सोचा कि तन कितना खराब हो जायेगा
तो...??
करोडो के इस अनमोल शरीर के मन रूपी इंजन की भी उतनी ही चिंता करो जितनी अपनी गाडी की करते हो...

ज्ञानी जी का ज्ञान..................... ज़िन्दगी का ये हुनर भी,आज़माना चाहिए, जंग अगर अपनों से तो हार जाना चाहिए..

''जीवन वोध में जीना सीखो विरोध में नहीं, एक सुखप्रद जीवन के लिए इससे श्रेष्ठ कोई दूसरा उपाय नहीं हो सकता। जीवन अनिश्चित है और  जीवन की अनिश्चितता का मतलब यह है कि यहाँ कहीं भी और कभी भी कुछ हो सकता है।
        यहाँ पर आया प्रत्येक जीव बस कुछ दिनों का मेंहमान से ज्यादा कुछ नहीं है, इसीलिए जीवन को हंसी में जिओ, हिंसा में नहीं। चार दिन के इस जीवन को प्यार से जिओ, अत्याचार से नहीं।
      जीवन जरुर आनंद के लिए ही है इसीलिए इसे मजाक बनाकर नहीं मजे से जिओ। इस दुनियां में बाँटकर जीना सीखो बंटकर नहीं। जीवन वीणा की तरह है, ढंग से बजाना आ जाए तो आनंद ही आनंद है।
    
      एक पत्नी ने अपने पति  से आग्रह किया कि वह उसकी छह कमियाँ बताए जिन्हें सुधारने से वह बेहतर पत्नी बन जाए. पति यह सुनकर हैरान रह गया और असमंजस की स्थिति में पड़ गया. उसने सोचा कि मैं बड़ी आसानी से उसे ६ ऐसी बातों की सूची थमा सकता हूँ , जिनमें सुधार की जरूरत थी और ईश्वर जानता है कि वह ऐसी ६० बातों की सूची थमा सकती थी, जिसमें मुझे  सुधार की जरूरत थी.
       परंतु पति ने ऐसा नहीं किया और कहा - 'मुझे इस बारे में सोचने का समय दो , मैं तुम्हें सुबह इसका जबाब दे दूँगा.'
        पति अगली सुबह जल्दी ऑफिस गया और फूल वाले को फोन करके उसने अपनी पत्नी के लिए छह गुलाबों का तोहफा भिजवाने के लिए कहा जिसके साथ यह चिट्ठी लगी हो, "मुझे तुम्हारी छह कमियाँ नहीं मालूम, जिनमें सुधार की जरूरत है. तुम जैसी भी हो मुझे बहुत अच्छी लगती हो."
      उस शाम पति जब आफिस से लौटा तो देखा कि उसकी पत्नी दरवाज़े पर खड़ी उसका इंतज़ार कर रही थी, उसकी आंखौं में आँसू भरे हुए थे,यह कहने की जरूरत नहीं कि उनके जीवन की मिठास कुछ और बढ़ गयी थी। पति इस बात पर बहुत खुश था कि पत्नी के आग्रह के बावजूद उसने उसकी छह कमियों की सूची नहीं दी थी.
इसलिए यथासंभव जीवन में सराहना करने में कंजूसी न करें और आलोचना से बचकर रहने में ही समझदारी है।
         ज़िन्दगी का ये हुनर भी,
                             आज़माना चाहिए,
         जंग अगर अपनों से हो,
                              तो हार जाना चाहिए..