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Wednesday, 23 March 2016

Greatest scientists of all times were invited to a reunion ...

Reunion Invitation  
Greatest scientists of all times were invited to a reunion ...

* Newton said he'd drop in.

* Socrates said he'd think about it.

* Ohm resisted the idea.

* Boyle said he was under too much pressure.

* Darwin said he'd wait to see what evolved.

* Pierre and Marie Curie radiated enthusiasm.

* Volta was electrified at the prospect.

* Pavlov positively drooled at the thought.

* Ampere was worried he wasn't current enough though alternately none were.

* Audubon said he'd have to wing it.

* Edison thought it would be illuminating.

* Einstein said it would be relatively easy to attend.

* Archimedes was buoyant at the thought.

* Dr Jekyll declined - he said he hadn't been feeling himself lately.

* Morse said, "I'll be there on the dot. Can't stop now, must dash."

* Gauss was asked to attend because of his magnetism.

* Hertz said he planned to attend with greater frequency in the future.

* Watt thought it would be a good way to let off steam.

* Wilbur Wright accepted, provided he and Orville could get a flight.

* And Dr. Sigmund Freud couldn't help but give it the slip

होली पर प्रस्तुत है स्वरचित कविता

सभी मित्रों ,वरिष्ठ एवं कनिष्ठ साथियों को होली की हार्दिक शुभ कामनायें 
होली पर प्रस्तुत है स्वरचित कविता 






गाओ, गुनगुनाओ, तो कुछ बात बने, इस होली।

बहुत हो गये  , शिकवे    शिकायतें,
न  तुम  थकते   , न  हम      थकते । 
आ जाओ करीब, कोई  कुछ न बोले।  
एक   दूसरे  को ,  नैनों   से    टटोलें। 
बिन  कुछ  बोले  ,  सब   कह  डालें ,
तो   कुछ  बात बने  ,       इस होली।१। 

बात    बात   पर  ,   रूठे       हमसे,
बोलें     न     हम ,         कुछ तुमसे। 
श्रृंगार   तुम्हारा ,  यदि   हमसे     है ,
पर्दे   में   रहना  ,   न  बस    में   है ,
बाँहों      में           अब  आ   जाओ ,
तो   कुछ बात बने,          इस होली।२। 

न       कुछ सोचो ,     न कुछ बूझो ,
बस खो जाओ , रंगों के तरकश में। 
हम     भी आयेंगे ,       तुम्हें ढूंढनें ,
छिप      न जाना ,     तुम अनजाने। 
पाकर     तुमको , भूलें सारी दुनिया ,
तो   कुछ बात बने,          इस होली।३। 

बहुत उड़ लिये , फंस जाओ मेरे पिंजरे में ,
तो कुछ बात बने,         इस   होली।

गाओ, गुनगुनाओ, तो कुछ बात बने, इस होली।

ज्ञानी जी का ज्ञान................ मत सोच की तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता.....

1 मत सोच की तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता.....
हिम्मत वालो का इरादा कभी अधुरा नहीं होता....
जिस इंसान के कर्म अच्छे होते है......
उस के जीवन में कभी अँधेरा नहीं होता......

2 अगर किसी परिस्थिती के लिए आपके पास सही शब्द नहीं हैं ...
तो सिर्फ मुस्कुरा दीजिये.
शब्द उलझा सकते हैं...
पर मुस्कराहट हमेशा काम कर जाती है..

3 फजूल ही पत्थर रगङ कर आदमी ने चिंगारी की खोज की,
अब तो आदमी आदमी से जलता है..!

4 मैने बहुत से ईन्सान देखे हैं,जिनके बदन पर लिबास नही होता।
और बहुत से लिबास देखे हैं,जिनके अंदर ईन्सान नही होता।

5 कोई हालात नहीं समझता ,कोई जज़्बात नहीं समझता,
ये तो बस अपनी अपनी समझ की बात है...,
कोई कोरा कागज़ भी पढ़ लेता है,तो कोई पूरी किताब नहीं समझता!!

6 "चंद फासला जरूर रखिए हर रिश्ते के दरमियान!
क्योंकि"नहीं भूलती दो चीज़ें चाहे जितना भुलाओ....!...
..एक "घाव"और दूसरा "लगाव"...

7 दान छपाकर नहीं,
              दान छुपाकर दो .

8 ढ़ोंग का जीवन नहीं,
              ढ़ंग का जीवन जीओ.

9 सत्य शांत होता है,
              असत्य शोर मचाता है.

10 अंतःकरण भगवान की,
              बनायी अदालत है.

11  बातों के बादशाह नहीं,
आचरण के आचार्य बनों....!!

12 जो सफर की शुरुआत करते हैं,वे मंजिल भी पा लेते हैं.
बस,
एक बार चलने का हौसला रखना जरुरी है.क्योंकि,
अच्छे इंसानों का तो रास्ते भी इन्तजार करते हैं...

ज्ञानी जी का ज्ञान.......................ठाकुर जी की सेवा

एक सासु माँ और बहू थी।

सासु माँ हर रोज ठाकुर जी पूरे नियम और श्रद्धा के साथ सेवा करती थी।

एक दिन शरद रितु मेँ सासु माँ को किसी कारण वश शहर से बाहर जाना पडा।

सासु माँ ने विचार किया के ठाकुर जी को साथ ले जाने से रास्ते मेँ उनकी सेवा-पूजा नियम से नहीँ हो सकेँगी।
सासु माँ ने विचार किया के ठाकुर जी की सेवा का कार्य अब बहु को देना पड़ेगा लेकिन बहु को तो कोई अक्कल है ही नहीँ के ठाकुर जी की सेवा कैसे करनी हैँ।
सासु माँ ने बहु ने बुलाया ओर समझाया के ठाकुर जी की सेवा कैसे करनी है।
कैसे ठाकुर जी को लाड लडाना है।
सासु माँ ने बहु को समझाया के बहु मैँ यात्रा पर जा रही हूँ और अब ठाकुर जी की सेवा पूजा का सारा कार्य तुमको  करना है।
सासु माँ ने बहु को समझाया देख ऐसे तीन बार घंटी बजाकर सुबह ठाकुर जी को जगाना।
फिर ठाकुर जी को मंगल भोग कराना।
फिर ठाकुर जी स्नान करवाना।
ठाकुर जी को कपड़े पहनाना।
फिर ठाकुर जी का श्रृंगार करना ओर फिर ठाकुर जी को दर्पण दिखाना।
दर्पण मेँ ठाकुर जी का हंस्ता हुआ मुख देखना बाद मेँ ठाकुर जी राजभोग लगाना।
इस तरह सासु माँ बहु को सारे सेवा नियम समझाकर यात्रा पर चली गई।
अब बहु ने ठाकुर जी की सेवा कार्य उसी प्रकार शुरु किया जैसा सासु माँ ने समझाया था।
ठाकुर जी को जगाया नहलाया कपड़े पहनाये श्रृंगार किया और दर्पण दिखाया।
सासु माँ ने कहा था की दर्पण मेँ ठाकुर जी का हस्ता हुआ देखकर ही राजभोग लगाना।
दर्पण मेँ ठाकुर जी का हस्ता हुआ मुख ना देखकर बहु को बड़ा आशर्चय हुआ।
बहु ने विचार किया शायद मुझसे सेवा मेँ कही कोई गलती हो गई हैँ तभी दर्पण मे ठाकुर जी का हस्ता हुआ मुख नहीँ दिख रहा।
बहु ने फिर से ठाकुर जी को नहलाया श्रृंगार किया दर्पण दिखाया।
लेकिन ठाकुर जी का हस्ता हुआ मुख नहीँ दिखा।
बहु ने फिर विचार किया की शायद फिर से कुछ गलती हो गई।
बहु ने फिर से ठाकुर जी को नहलाया श्रृंगार किया दर्पण दिखाया।
जब ठाकुर जी का हस्ता हुआ मुख नही दिखा बहु ने फिर से ठाकुर जी को नहलाया ।
ऐसे करते करते बहु ने ठाकुर जी को 12 बार स्नान किया।
हर बार दर्पण दिखाया मगर ठाकुर जी का हस्ता हुआ मुख नहीँ दिखा।
अब बहु ने 13वी बार फिर से ठाकुर जी को नहलाने की तैयारी की।
अब ठाकुर जी ने विचार किया की जो इसको हस्ता हुआ मुख नहीँ दिखा तो ये तो आज पूरा दिन नहलाती रहेगी।
अब बहु ने ठाकुर जी को नहलाया कपड़े पहनाये श्रृंगार किया और दर्पण दिखाया।
अब बहु ने जैसे ही ठाकुर जी को दर्पण दिखाया तो ठाकुर जी अपनी मनमोहनी मंद मंद मुस्कान से हंसे।
बहु को संतोष हुआ की अब ठाकुर जी ने मेरी सेवा स्वीकार करी।
अब यह रोज का नियम बन गया ठाकुर जी रोज हंसते।
सेवा करते करते अब तो ऐसा हो गया के बहु जब भी ठाकुर जी के कमरे मेँ जाती बहु को देखकर ठाकुर जी हँसने लगते।
कुछ समय बाद सासु माँ वापस आ गई।
सासु माँ ने ठाकुर जी से कहा की प्रभु क्षमा करना अगर बहु से आपकी सेवा मेँ कोई कमी रह गई हो तो अब मैँ आ गई हूँ आपकी सेवा पूजा बड़े ध्यान से करुंगी।
तभी सासु माँ ने देखा की ठाकुर जी हंसे और बोले की मैय्या आपकी सेवा भाव मेँ कोई कमी नहीँ हैँ आप बहुत सुंदर सेवा करती हैँ लेकिन मैय्या दर्पण दिखाने की सेवा तो आपकी बहु से ही करवानी है इस बहाने मेँ हँस तो लेता हूँ।

बोलो ठाकुर प्यारे की जय।   राधे राधे जय श्री राधे