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Saturday, 19 March 2016

ज्ञानी जी का ज्ञान.......................दूध के डिब्बे में एक लोटा पानी


गाँव की एक अहीर बाला दूध बेचने के लिये रोजाना दूसरे गाँव जाती। रास्ते में एक नदी पड़ती। नदी किनारे दूध का डिब्बा खोलती और उसमें से एक लोटा दूध निकालती। दूध के डिब्बे में एक लोटा पानी मिलाती और नदी पार के गाँव की ओर चल पड़ती दूध बेचने। यह उसकी रोज की दिनचर्या थी। 

नदी किनारे एक वृक्ष पर संत मलूकदास जी जप माला फेरते हुऐ इस अहीर बाला की गतिविधियों को रोज आश्चर्य से देखा करते। एक दिन उनसे रहा नहीं गया और ऊपर से आवाज लगा ही दी। -- बेटी सुनो! -- हाँ ! बाबा। बोलिये ना। -- बुरा न मानो तो तुमसे एक बात पूछना चाहता हूँ। -- पूछिये ना बाबा। आपकी बात भी कोई बुरा मानने की होती है क्या ? - बेटी ! मैं रोज देखता हूँ। तुम यहाँ आती हो। दूध के डिब्बे में से एक लोटा दूध निकालती हो और डिब्बे में एक लोटा पानी मिला देती हो ? क्यों करती हो तुम ऐसा ? 

लड़की ने नज़रें नीची कर ली। कहा--- बाबा ! मैं जिस गाँव में दूध बेचने जाती हूँ ना..वहाँ मेरी सगाई पक्की हुई है। मेरे वो वहीं रहते हैं। जबसे सगाई हुई है मैं रोज एक लोटा दूध उन्हें लेजाकर देती हूँ। दूध कम न पड़े इसलिये एक लोटा पानी डिब्बे में मिला देती हूँ... --  

पगली तू ये क्या कर रही है ? कभी हिसाब भी लगाया है तूने ? कितना दूध- पानी कर चुकी है अभी तक तू। अपने मंगेतर के लिये ? -- 

लड़की नें नज़रें तनिक उठाते हुऐ उत्तर दिया-- बाबा ! जब सारा जीवन ही उसे सौंपने का फैसला हो गया तो फिर हिसाब क्या लगाना ? जितना दे सकी दिया.. जितना दे सकूंगी देती रहूंगी। 

मलूक दास जी के हाथ से माला छूट कर नदी में जा गिरी। उस अहीर बाला के पाँव पकड़ लिये उन्होंने--- बेटी ! तूने तो मेरी आँखें ही खोल दी। माला का हिसाब लगाते लगाते मैंने तो जप का मतलब ही नहीं समझा। जब सारा जीवन ही उसे सौंप दिया तो क्या हिसाब रखना ? कितनी माला फेर ली ?
यह है प्रेम...!!!

ज्ञानी जी का ज्ञान..............निंदा " तो उसी की होती है जो " ज़िंदा " है

1 मनुष्य तो अपने आप में प्रेम का,दया का,सेवा का,और आनन्द  का मूर्तरूप होता है।


2 शब्द मुफ्त में मिलते हैं .....
       उनके चयन पर निर्भर करता है
कि उसकी कीमत मिलेगी
             या चुकानी पड़ेगी...

3 शानदार बात
"रात भर गहरी नींद आना इतना आसान नहीं...
उसके लिए दिन भर "ईमानदारी" से जीना पड़ता हैं....!

4 निंदा " तो उसी की होती है जो " ज़िंदा " है,
मरे हुए की तो बस तारीफ ही होती है !!

5 किसी व्यक्ति के जीवन की ऊंचाई मापने के तीन पैमाने है,
ह्रदय की मधुरता , उदारता और विनम्रता !!

6 सत्य के मार्ग पर चलने वाले के लिए चारों ओर कांटे लगे हुए है।

7 सत्य से प्राप्त सुख स्थाई होता है और असत्य से प्राप्त सुख क्षणिक होता है ।

8 सत्य से वाणी पवित्र होती है जैसे स्नान करने से शरीर निर्मल होता है साबुन से कपडे साफ होते है वैसे ही सत्य से वाणी निर्मल होती है ।