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Tuesday, 15 March 2016

विजय माल्या jokes series No 4 .............किंगफिशर वाले बाबू मेरा लोन चुका दे

 अब ये अफवाह
कौन फैला रहा है कि
विजय माल्या का कर्जा
Admin  चुकाने वाला है
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कुछ काम था ...SBI बैंक में फ़ोन किया अभी ..... अजीब सी कॉलर ट्यून लगा रखी है उन्होंने
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किंगफिशर वाले बाबू मेरा लोन चुका दे
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किंगफिशर वाले बाबू मेरा लोन चुका दे
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कन्हैया से लेकर माल्या तक
सब इंतज़ार कर रहे हैं...
आपके पैसे पर पलने का !
अपना टैक्स आज ही जमा कराएं !!
- आयकर विभाग.
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❗विजय मल्ल्या वो पहेला इंसान है।
❗जो कर्ज चुकाने हेतु जिसने आत्महत्या नही किया।
❗बल्कि बैंक वालो को आत्महत्या करने पर मजबूर किया.
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When a person dies, his spirit leaves and his body is left behind.
But as a special one time phenomenon, which has created history,
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Vijay Mallya's 'Body' has 'left', and his 'Spirit' is 'left behind' .
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This is really confusing !!!!
Person who manufactured the  liquor is in debt...
Gov't who taxed the liquor heavily is also in debt
People who drink the liqour are also in debt....
Then where is the money .
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 Went to an SBI branch and found it freshly painted - all in white. Felt good.
Asked branch manager if he initiated the renovation.
He said, "Nahi sir, Vijay Mallya chuna laga gaya!".
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ग्राहक :- एक गोल्ड फ्लैक देना.......!
दुकानदार:-देते हुए, 1200रु उधार हो गए है.....!
ग्राहक :- हाँ तो, ..........
मै कौन सा माल्या हूँ जो भाग जाऊँगा.......!
दुकानदार:- मै कौनसा SBI बैंक हूँ जो उधार देता
रहूँगा.................!.
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आज का ज्ञान
अगर आपका लोन 3 करोड़ का है , तो
ये आपकी समस्या है ...!
अगर आपका लोन 300 करोड़ का है , तो
ये बैंक की समस्या है ...!!
और अगर आपका लोन 30000 करोड़ का है , तो
ये सरकार की समस्या है ...!!!
   #बड़ा सोचो ...बड़ा लोन लो
- माल्या का पार्टनर.
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एंडरसन भोपाल में सेंकडो की जान ले कर और हजारों को अँधा बनाकर भाग गया...
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दाऊद बम धमाके करके भाग गया...
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नदीम गुलशन  की हत्या कर के भाग गया....
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ललित करोड़ो रु का चुना लगाके भाग गया....
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विजय
बैंको के नो हजार करोड़ ले के भाग गया ...
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लिस्ट ओर भी लंबी है ...l
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लेकिन हम पकड़ेंगे
उन्हें जो .....
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.sonography वाले डाँक्टर
.f  form  मे   minor  clerical  mistake करते है!
 

ज्ञानी जी का ज्ञान.................जीवन एक यात्रा है..........& ............मैं तो अपने जीवन से संतुष्ट हूँ

 जीवन एक यात्रा है...

और इस यात्रा में हम अकेले यात्री नहीं है,बल्कि हमारे रिश्तेदार,मित्र संबंधी आदि भी हमारे साथ सहयात्री हैं।


जिनमें कुछ सहयात्री ऐसे हैं,जो हमारी यात्रा में हमारे सहयोगी बन हमारी इस यात्रा को मनोरंजक और सरल बना देते हैं।

लेकिन कुछ यात्री ऐसे भी होते हैं जो हमारे विरोधी बन ना केवल इस यात्रा में बाधक बनते हैं ,बल्कि आगे बढ़ने से भी रोकते हैं ।

ऐसे समय में ऐसे सहयात्रियों का सामना कर अपनी यात्रा में विघ्न डालने की बजाय , उन से किनारा कर उनके प्रति शुभ भावना रखते हुए अपनी जीवन यात्रा पर निरंतर आगे बढ़ते रहना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए ।

जैसे यदि हम सड़क पर चल रहे हैं सामने से एक स्कूटर सवार आ रहा है।वह बार-बार स्कूटर को कभी इधर कभी उधर करता हुआ चल रहा है।उसकी इन हरकतो को देख कर हमारे मन में यही विचार आएगा कि शायद इस व्यक्ति का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है । इसका कोई भरोसा नहीं,कही यह हमें नुकसान ही ना पहुंचा दे।यह सोचकर बजाए हम उससे उलझने के, हम अपने सुरक्षा पर ध्यान देते हैं ।और सड़क छोड़कर एक किनारे पर खड़े हो जाते हैं । उसके निकलते ही हम चैन की सांस लेते हैं ।तो जैसे यहां हमने उस व्यक्ति का सामना करने की बजाए उससे किनारा करना उचित समझा । क्योंकि हम जानते थे कि ऐसे व्यक्ति का सामना करना अपना ही नुकसान करना है ।

ऐसे ही जीवन यात्रा में चलते हुए भाव स्वभाव की टकराहटो से स्वयं को बचा सुरक्षित रखना बहुत जरुरी है । तभी यात्रा आनंदमय हो सकती है ।" "बात अच्छी हो तो उसकी हर जगह चर्चा करो, बुरी हो तो मन में रखो

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एक दिन सुबह पार्क में हरिनाम जप करते समय एक जानकार बूढ़े व्यक्ति ने व्यंगात्मक लहजे में कहा,"बेटा ये उम्र माला करने की नहीं मेहनत करके खाने कमाने और जिम्मेदारी उठाने की है। ये काम तो फिलहाल बुढ़ापे के लिए छोड़ दो।"

मैंने पूछा,"आप कितनी माला करते हैं ?"

वो सकपकाकर बोले,"मैं नहीं करता मैं तो अपने जीवन से संतुष्ट हूँ। "

मैंने कहा,"संतुष्ट तो गधा भी होता है जीवन से क्योंकि वो जानता ही नहीं की संतुष्टि का अर्थ क्या है। वो सोचता है की दिन भर मेहनत करके शाम को २ सूखी रोटी मिल जाना ही संतुष्टि है। उसको नहीं पता की अगर वो मालिक के चुंगल से निकल जाए तो सारे हरे भरे मैदान उसके लिए मुफ्त उपलब्ध हैं।

इसलिए गधे सामान व्यक्ति ही बिना भक्ति के जीवन में संतुष्टि महसूस कर सकता है। क्योंकि उसको नहीं पता कि जन्म मृत्यु बुढ़ापे और बीमारियों से रहित इस भौतिक जीवन से परे एक नित्य शाश्वत जीवन भी है जहाँ हमारा परम पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण से सीधा सम्बन्ध है और वहां जन्म मृत्यु बुढ़ापा और बीमारियां भी नहीं होते।

वो जाने लगे तो मैंने पुकार कर कहा बाबा जी," बुढ़ापे तक जीवित रहेंगे इसका कोई गारंटी कार्ड तो है नहीं और जब जवानी में भगवान में मन नहीं लगाया तो बुढ़ापे में कैसे मन लगेगा ? और रही बात खाने कमाने की तो भक्त लोग कर्म से नहीं भागते वे तो उल्टा एक आम नागरिक से ज्यादा कर्मशील होते हैं क्योंकि वो सबसे बड़े समाज-सेवी होते हैं। वो खुद का जन्म भी सार्थक करते हैं और दूसरों का भी मार्ग दर्शन करते हैं।

मैं कृष्ण का चिंतन करता हूँ और वो मेरे जीवन यापन का चिंतन करेंगे यह पूर्ण विश्वास है मुझे।

RSS और ISIS की एक समान तुलना करने पर गुलाम नबी आज़ाद को जवाब देती नई कविता

RSS और ISIS की एक समान तुलना करने पर गुलाम नबी आज़ाद को जवाब देती नई कविता

-कवि गौरव चौहान

केसर की क्यारी में उपजा पौधा एक विषैला है,
ये गुलाम आज़ाद नबी तो बगदादी का चेला है,

सन् सैतालिश में ही भारत भाग्य लगा था फूट गया,
बटवारे के बाद यहाँ ये कूड़ा करकट छूट गया,

कूड़ा तो कूड़ा होता है बदबू को फैलाया है,
गोबर में जन्मे कीड़ों ने अपना मुख दिखलाया है,

जिनके ज़हनों में लटके अंधे मज़हब के ताले हैं,
स्वयं सेवकों को वो दहशतगर्द बताने वाले हैं,

निश्छल त्याग तपस्या व्रत को हिंसक छल से तौला है,
गंदे नालों के पानी को गंगाजल से तौला है,

तौल दिया तुमने वृक्षों को आरी और कटारी से,
भस्मासुर की तुलना कर दी चक्र सुदर्शन धारी से,

संघ,जहाँ पर मानव सेवा पाठ पढ़ाया जाता है,
संघ,जहाँ पर देश धर्म का सबक सिखाया जाता है,

संघ,जहाँ पर नारी को देवी सा माना जाता है,
संघ,जहाँ पर निज गौरव पर सीना ताना जाता है,

संघ जहाँ पर फर्क नही है हिन्दू या इस्लामी में,
एक नज़र से सेवा करते बाढ़ और सूनामी में,

संघी वो है,जिसने भू पर बीज पुण्य का बोया है,
काश्मीर-केदारनाथ के भी घावों को धोया है,

महामारियों में रोगी की छूकर सेवा करते हैं,
संघी वो हैं जो भारत की खातिर जीते मरते हैं,

इनकी तुलना कैसे कर दी,रक्त चाटने वालों से,
नन्हे मुन्हे मासूमों के शीश काटने वालों से,

नारी को अय्याशी का सामान बनाने वालों से,
बाज़ारो में इज़्ज़त को नीलाम कराने वालों से,

तुमने घर की तुलसी को विषबेल बताया,शर्म करो,
भगवा का काले झंडे से मेल बताया,शर्म करो,

अब गौरव चौहान कहे,ये सोच कहाँ से पाले हैं,
लगता है इनके दिमाग में कीड़े पड़ने वाले है,

ऐ गुलाम, मत मिटटी फेंको आज दिये की बाती पर,
वर्ना भगवा लहराएगा, मियां तुम्हारी छाती पर,

------कवि गौरव चौहान