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Saturday, 27 February 2016

जो हमारा है ही नहीं उसके खोने का दुःख कैसा?

किसी शहर में एक रब्बाई (यहूदी पुजारी) अपनी
गुणवती पत्नी और दो प्यारे बच्चों के साथ रहता था.
एक बार उसेकिसी काम से बहुत दिनों के लिए शहर से
बाहर जाना पड़ा.जब वह दूर था तब एक त्रासद दुर्घटना
में उसके दोनों पुत्र मारे गये. ऐसी दुःख की घड़ी में
रब्बाई की पत्नी ने खुद को बड़ी मुश्किल से संभाला.

वह बहुत हिम्मती थी और ईश्वर में उसकी आस्था अटूट
थी. लेकिन उसे यह चिंता थी कि रब्बाई के लौटने पर
वह उसे यह दुखदसमाचार किस प्रकार देगी. रब्बाई स्वयं
बहुत आस्थावानव्यक्ति था लेकिन वह दिल का मरीज़
था और पूर्व में अस्पताल में भी भर्ती रह चुका था.
पत्नी को यह आशंका थी कि वह यह सदमा नहीं झेल
पायेगा. पति के आगमन की पूर्व संध्या को उसने
दृढ़तापूर्वक प्रार्थना की और शायद उसे अपनी
समस्या का कोई समाधान मिल गया. 

अगली सुबह
रब्बाई घर पहुँच गया. बड़े दिनों के बाद घर वापसी पर
वह पत्नी से गर्मजोशी से मिला और लड़कों के बारे में
पूछा. पत्नी ने कहा, "उनकी चिंता मत कीजिये. आप
नहा-धोकर आराम करिए". कुछ समय के बाद वे भोजन
करने के लिए बैठे. पत्नी ने उससे यात्रा के बारे में पूछा.
रब्बाई ने उसे इस बीच घटी बातों की जानकारी दी
और कहा कि ईश्वर की दया से सब ठीक हुआ. फिर उसने
बच्चों के बारे में पूछा. पत्नी कुछ असहज तो थी ही,
फिर भी उसने कहा, "उनके बारे में सोचकर परेशान मत
होइए. हम उनकी बात बाद में करेंगे. मैं इस वक़्त किसी
और उलझन में हूँ, आप मुझे उसका उपाय बताइए". 

रब्बाई
समझ रहा था कि कोई-न-कोई बात ज़रूर थी. उसने
पूछा, "क्या हुआ? कोई बात तो है जो तुम्हें भीतर-
ही-भीतर खाए जा रही है. मुझे बेखटके सब कुछ सच-सच
बता दो और हम साथ बैठकर ईश्वर की मदद से उसका हल
ज़रूर निकाल लेंगे". पत्नी नेकहा, "आप जब बाहर थे तब
हमारे एक मित्र ने मुझे दो बेशकीमती नगीने अहतियात
से सहेजकर रखने के लिए दिए. वे वाकई बहुत कीमती और
नायाब नगीने हैं! मैंने उन जैसी अनूठी चीज़ और कहीं
नहीं देखी है. अब वह उन्हें लेने के लिए आनेवाला है और मैं
उन्हें लौटाना नहीं चाहती. मैं चाहती हूँ कि वे हमेशा
मेरे पास ही रहें. अब आप क्या कहेंगे?" "तुम कैसी बातें
कर रही हो? ऐसी तो तुम नहीं थीं? तुममें यह
संसारिकता कहाँ से आ गयी?", रब्बाई ने आश्चर्य से
कहा. "सच यही है कि मैं उन्हें अपने से दूर होते नहीं
देखना चाहती. अगर मैं उन्हें अपने ही पास रख सकूं तो
इसमें क्या बुरा है?", पत्नी ने कहा. 

रब्बाई बोला,
"जो हमारा है ही नहीं उसके खोने का दुःख कैसा?
उन्हें अपने पास रख लेना तो उन्हें चुराना ही
कहलायेगा न? हम उन्हें लौटा देंगे और मैं यह कोशिश
करूंगा कि तुम्हें उनसे बिछुड़ने का अफ़सोस नहीं सताए.
हम आज ही यह काम करेंगे, एक साथ"."ठीक है. जैसा
आप चाहें. हम वह संपदा लौटा देंगे. और सच यह है कि
हमने वह लौटा ही दी है. 

हमारे बच्चे ही वे बेशकीमती
नगीने थे. ईश्वर ने उन्हें सहेजने के लिए हमारे सुपुर्द किया
था और आपकी गैरहाजिरी में उसने उन्हें हमसे वापस ले
लिया. वे जा चुके हैं...". रब्बाई ने अपनी पत्नी को
भींच लिया और वे दोनों अपनी आंसुओं की धारा में
भीगते रहे. रब्बाई को अपनी पत्नी की कहानी के मर्म
का बोध हो गया था. उस दिन के बाद वे साथ-साथ
उस दुःख से उबरने का प्रयास करने लगे.

बाघ की मूंछ का एक बाल

बहुत समय पहले की बात है , एक वृद्ध सन्यासी हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहता था. वह बड़ा ज्ञानी था और उसकी बुद्धिमत्ता की ख्याति दूर
-दूर तक फैली थी. 

एक दिन एक औरत उसके पास पहुंची और अपना दुखड़ा रोने लगी ,बाबा, मेरा पति मुझसे बहुत प्रेम करता था ,लेकिन वह जबसे युद्ध से लौटा है ठीक से बात तक नहीं करता .

युद्ध लोगों के साथ ऐसा ही करता है., सन्यासी बोला.

लोग कहते हैं कि आपकी दी हुई जड़ी-बूटी इंसान में फिर से प्रेम उत्पन्न कर सकती है , कृपया आप मुझे वो जड़ी-बूटी दे दें.,महिला ने विनती की. सन्यासी ने कुछ सोचा और फिर बोला ,देवी मैं तुम्हे वह जड़ी-बूटी ज़रूर दे देता लेकिन उसे बनाने के
लिए एक ऐसी चीज चाहिए जो मेरे पास नहीं है .
आपको क्या चाहिए मुझे बताइए मैं लेकर आउंगी,महिला बोली.
मुझे बाघ की मूंछ का एक बाल चाहिए ., सन्यासी बोला.


अगले ही दिन महिला बाघ की तलाश में जंगल में निकल पड़ी , बहुत खोजने के बाद उसे नदी के किनारे एक बाघ दिखा , बाघ उसे देखते ही दहाड़ा , महिला सहम गयी और तेजी से वापस चली गयी. अगले कुछ दिनों तक यही हुआ ,महिला हिम्मत कर के उस बाघ के पास पहुँचती और डर कर वापस चली जाती. महीना बीतते-बीतते बाघ को महिला की मौजूदगी की आदत पड़ गयी, और अब वह उसे देख कर सामान्य ही रहता. अब तो महिला बाघ के लिए मांस भी लाने लगी , और बाघ बड़े चाव से उसे खाता. उनकी दोस्ती बढ़ने लगी और अब महिला बाघ को थपथपाने भी लगी. और देखते देखते एक दिन वो भी आ गया जब उसने हिम्मत दिखाते हुए बाघ की मूंछ का एक बाल भी निकाल लिया. फिर क्या था , वह बिना देरी किये सन्यासी के पास पहुंची , और बोली, मैं बाल ले आई बाबा .


बहुत अच्छे .और ऐसा कहते हुए सन्यासी ने बाल को जलती हुई आग में फ़ेंक दिया। अरे ये क्या बाबा , आप नहीं जानते इस बाल को लाने के लिए मैंने कितने प्रयत्न किये और आपने इसे जला दिया ……अब मेरी जड़ी-बूटी कैसे बनेगी ?महिला घबराते हुए बोली.


अब तुम्हे किसी जड़ी-बूटी की ज़रुरत नहीं है .सन्यासी बोला .जरा सोचो , तुमने बाघ को किस तरह अपने वश में किया….जब एक हिंसक पशु को धैर्य और प्रेम से जीता जा सकता है तो क्या एक इंसान को नहीं ?

कभी नीम सी जिंदगी,कभी नमक सी जिंदगी

1 कभी नीम सी जिंदगी,कभी नमक सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक शहद सी जिंदगी।
कभी पत्थर सी जिंदगी,कभी  काँटों सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक मुलायम सी जिंदगी।
कभी तपती सी जिंदगी,कभी गीली सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक सलोनी सी जिंदगी।
कभी भागती सी जिंदगी,कभी रूकती सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक सुकून सी जिंदगी।
कभी सफ़ेद सी जिंदगी,कभी काली सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक रंगीन सी जिंदगी।
कभी पराई सी जिंदगी,कभी बेगानी सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक अपनी सी जिंदगी।
कभी दिखावे सी जिंदगी,कभी झूठी सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक सच्ची सी जिंदगी।


2 एक आदमी रात को झोपड़ी में बैठकर एक छोटे से दीये को जलाकर कोई शास्त्र पढ़ रहा था।आधी रात बीत गई,जब वह थक गया तो फूंक मार कर उसने दीया बुझा दिया।
लेकिन वह यह देख कर हैरान हो गया कि जब तक दीया जल रहा था, पूर्णिमा का चांद बाहर खड़ा रहा ।
लेकिन जैसे ही दीया बुझ गया तो चांद की किरणें उस कमरे में फैल गई ।
वह आदमी बहुत हैरान हुआ यह देख कर कि एक छोटे से दीए ने इतने बड़े चांद को बाहर रोेक कर रक्खा ।
इसी तरह हमने भी अपने जीवन में अहंकार के बहुत छोटे-छोटे दीए जला रखे हैं जिसके कारण परमात्मा का चांद बाहर ही खड़ा रह जाता है ।


3 जबतक वाणी को विश्राम नहीं दोगे तबतक मन शांत नहीं होगा।
मन शांत होगा तभी ईश्वर की उपस्थिति महसूस होगी ।

Jokes ............... एक शादी शुदा आदमी से पूछा गया सवाल...

 पत्रकार:कौन हो भाई ?
जाट:जाट
पत्रकार:कितनी ज़मीन है आपके पास ?
जाट: 122 एकड़
पत्रकार:कौन सी गाडी है आपके पास ?
जाट: पजेरो
पत्रकार:तो और क्या चाहिए ?
जाट:आरक्षण
पत्रकार: क्यूँ भाई?
जाट: मन्ने ना पता भैंस की पुंछ, ज़्यादा सवाल कोणी।आरक्षण चाहिए।तो चाहिए बस।
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 एक शादी शुदा आदमी से पूछा गया सवाल...
"यदि आपकी सास और आप की पत्नी...
एक साथ बाघ के पिंजरे में गिर जाएं...
तो आप किसे बचाएंगे...??"


वो आदमी जोर से हंसा...
हंसते-हंसते लोटपोट हो गया और बोला...

"यह भी कोई पुछने की बात है...??
मैं यकीनन बाघ को बचाऊँगा...
आखिर दुनिया में बाघ बचे ही कितने हैं....."
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गणित से परेशान एक विद्यार्थी गुरु जी से:
अगर शून्य की खोज आर्यभट्ट ने की थी,
और आर्यभट्ट का जन्म कलयुग में हुआ,
तो उससे पहले 100 कौरव और
रावण के 10 सर की गिनती किसने की थी?

गुरु जी अवकाश लेकर उत्तर की खोज में भटक रहे हैं
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 टीचर:
जिसको सुनाई नहीँ देता उसको क्या कहेँगे ?

शिष्य:
कुछ भी कह दो साले को!
कौनसा सुनाई देता है!!
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 एक घड़ी सुधारने वाले ने अपनी प्रेमिका को कुछ इस प्रकार ख़त लिखा:
मैंने हमेशा तुमारा 7:00 दिया
तुम भी मेरा 07:02
हम 02:09 को हमेशा 01:07 रहना है
इसलिए मुझे छोड़ने की गल्ती 02:12 न करना!!
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चूहे का सेहरा सुहाना लगता है
चुहिया का तो दिल दिवाना लगता है
पल भर में ऐसे कुतरते हैं कपडे
अब तो हर कपडा पुराना लगता है…….

सात रंगो से बना कपडों का ये संगम
काट देते हैं ये कपड़े बनकर के सिंघम
हर कपड़ा सिंघम से बचाना पड़ता है
कपड़ो का अब तो तकिया बनाना पड़ता है!!
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वो मुड़ मुड़ के देख रहे थे हमें,
हम मुड़ मुड़ के देख रहे थे उन्हें,
वो हमें, हम उन्हें,
हम उन्हें, वो हमें,
क्योंकि परीक्षा में …
न उन्हें कुछ आता था, न हमें !
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बॉस – आपकी शादी हो गयी?
सरदार – हाँ जी, १ लड़की से हुई है,

बॉस – शादी तो लड़कीसे ही होती है,
सरदार – ना जी मेरी बहन कि तो लड़के से हुई थी !!!
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छुट्टी कै लाने आबेदन पत्र……
सेवा मे..
श्रीमान मास्साब..
माध्मिक पाठशाला बुंदेलखंड

माहानुभव,
तो मस्साब ऐसो है कि दो दिना से चड़ रओ है जो बुखार और उपर से जा नाक बह रई सो अलग || जई के मारे हम सकूल नई आ पाहे सो तमाए पाऊ पर के निवेदन आए कि दो-चार दिना की छुट्टी दे देते, तो बडो अछछो रहतो और अगर हम नई आये तो कोन सो तमाओ सकूल बंद हो जै |||||||

तुमाओ
आग्याकारी शिष्य,
"कलुआ"
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सरदार जी एक नंबर पर कॉल लगाया..
एक लड़की ने फ़ोन उठाया….
सरदार: हेलो… कौन?
लड़की बोली: मैं सीता…
सरदार: ओ तेरी!, यह तो अयोध्या लग गया… सॉरी माते… !!!