Contact Us

Powered by Lybrate.com

Monday, 28 November 2016

लाइन के वो सात दिन नोटबंदी में

लाइन के वो सात दिन नोटबंदी में 


*लाइन में......👳🏽*
*पहला दिन:*
😃मजा आ गया कस्सम से! क्या छक्का मारा है मोदी ने!! बड़े-बड़ों के छक्के छूट गये..गज्जब!!
*दूसरा दिन:*
😊अरे कल गये थे पुरनका नोट चेंज कराने, पर पइसवै खतम हो गया पोस्ट आफिस में. सो जमा कराके आ गये. कौनो बात नहीं. चल जायेगा काम. आज दुइ-दुइ हजार निकाल लेंगे..मेहररुऔ के एटीएम ले आये हैं..
*तीसरा दिन:*
🙂अरे का बताएँ. कल दुइऐ हजार निकाल पाए. ससुर हमारे बारी में ही एटीएमवा टें बोल गया. पर कौनो बात नहीं. देसहित में सब सह लेंगे. आखिर देसभक्ती भी कौनो चीज है कि नहीं?अएँ?
*चौथा दिन:*
😕चार घंटा से लाइन में खड़े हैं. बता रहे हैं कि बड़का नोट नहीं है, इसलिए एटीएम जल्दी खाली होय जाय रहा है. अउर ऊप्पर से लोग चार-चार ठो एटीएम लेके पेले दे रहे हैं. दुसरे का चिन्ता नहीं है किसी को.
*पाँचवा दिन:*
😐कल्हौ नहीं पाए पइसा.. केतना उधारी लें बताइए? सरकार कह रहा है कि नोट का कउनो कमी नहीं है. त यहाँ काहे नहीं है नोट. पाँच सौ अउर दुइ हजार का नोट टिविऐ में देखेंगे का?
*छठवाँ दिन:*
😠हद है भाई! सारा देसभक्ती का ठेका हमहीं ले रखे हैं का? अरे ठीक है, सुधारिये देस को. हम कहाँ रोके हैं! पर हमको काहे पेर रहे हैं?
*सातवाँ दिन:*
😡अब उँगली में स्याही भी लगाओगे हमरे? कहते हो, हम रोज-रोज आते हैं,अएँ? अरे रुपिया नहीं पा रहे हैं, इसलिए आते हैं.हम कउनो चोर-डाकू हैं? हवाला कारोबारी हैं? अइसी की तइसी हो गयी हमारी..ऊ दिल्ली वाला पगलेटवा ठीकै तो नहीं कह रहा था कि ऊप्पर सब मिले हुए हैं जी..

No comments:

Post a Comment