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Monday, 14 March 2016

ज्ञानी जी का ज्ञान........., धन की परिभाषा

A.मानव का सफर पत्थर से शुरु हुआ था। पत्थरों को ही महत्व देता है और आज पत्थर ही बन कर रह गया -

1. चूहा अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(गणेश की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित चूहा दिख जाये तो पिंजरा लगाता है और चूहा मार दवा खरीदता है।

2.सांप अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(शंकर का कंठहार मानकर)
लेकिन जीवित सांप दिख जाये तो लाठी लेकर मारता  है और जबतक मार न दे, चैन नही लेता।

3.बैल अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(शंकर की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित बैल(सांड) दिख जाये तो उससे बचकर चलता है ।

4.कुत्ता अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(शनिदेव  की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित कुत्ता दिख जाये तो 'भाग कुत्ते' कहकर अपमान करता है।

5. शेर अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(दुर्गा  की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित शेर दिख जाये तो जान बचाकर भाग खड़ा होता है।
हे मानव!
पत्थर से इतना लगाव क्यों और जीवित से इतनी नफरत क्यों?????
ये कैसा दोहरा मापदंड है तेरा?????


B.धन की परिभाषा:
जब कोई बेटा या बेटी ये कहे कि मेरे माँ बाप ही मेरे भगवान है ... ये है "धन"

जब कोई माँ बाप अपने बच्चों के लिए कि ये हमारे कलेजे की कोर है .....ये है "धन"

शादी के 20 साल बाद भी अगर पति पत्नी एक दूसरे से कहे
I Love You..... ये है "धन"

कोई सास अपनी बहू के लिए कहे ये मेरी बहु नहीं बेटी है और कोई बहू अपनी सास के लिए कहे ये मेरी सास नहीं मेरी माँ है..... ये है "धन"

जिस घर में बड़ों को मान और छोटो को प्यार भरी नज़रों से देखा जाता हो ... ये है "धन"

जब कोई अतिथि  कुछ दिन आपके घर रहने के पश्चात् जाते समय दिल से कहे आपका घर ....घर नहीं एक मंदिर है ..... ये है धन

मैं " ये दुआ करता हूँ कि आपको     ऐसे "परम धन"  की प्राप्ति हो ।

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