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Thursday, 31 March 2016

ज्ञानी जी का ज्ञान....... काल

 एक चतुर व्यक्ति को काल से बहुत डर लगता था. एक दिन उसे   चतुराई सूझी और काल को अपना मित्र बना लिया. उसने अपने मित्र काल से कहा- मित्र, तुम किसी को भी नहीं छोड़ते हो,किसी दिन मुझे भी ले चलोगो! काल ने कहा- ये मृत्यु लोक है. जो आया है उसे मरना ही है.सृष्टि का यह शाश्वत नियम है इस लिए मैं मजबूर हूं. पर तुम मित्र हो इसलिए मैं जितनी रियायत कर सकता हूं, करूंगा.मुझ से क्या आशा रखते हो साफ-साफ कहो. व्यक्ति ने कहा- मित्र मैं इतना ही चाहता हूं कि आप मुझे अपने लोक ले जाने के लिए आने से कुछ दिन पहले एक पत्र अवश्य लिख देना ताकि मैं अपने बाल- बच्चों को कारोबार की सभी बातें अच्छी तरह से समझा दूं और स्वयं भी भगवान भजन में लग जाऊं.काल ने प्रेम से कहा- यह कौन सी बड़ी बात है, मैं एक नहीं आपको चार पत्र भेज दूंगा. चिंता मत करो.
चारों पत्रों के बीच समय भी अच्छा खासा दूंगा ताकि तुम सचेत होकर काम निपटा लो. मनुष्य बड़ा प्रसन्न हुआ सोचने लगा कि आज से मेरे मन
से काल का भय भी निकल गया, मैं जाने से पूर्व अपने सभी कार्य पूर्ण करके जाऊंगा तो देवता भी मेरा स्वागत करेंगे. दिन बीतते गये आखिर मृत्यु की घड़ी आ पहुंची. काल अपने दूतों सहित उसके समीप आकर बोला- मित्र अब समय पूरा हुआ. मेरे साथ चलिए. मैं सत्यता और दृढ़तापूर्वक अपने स्वामी की आज्ञा का पालन करते हुए एक क्षण भी तुम्हें और यहां नहीं छोड़ूंगा. मनुष्य के माथे पर बल पड़ गए, भृकुटी तन गयी और कहने लगा- धिक्कार है तुम्हारे जैसे मित्रों पर. मेरे साथ विश्वासघात करते हुए तुम्हें लज्जा नहीं आती? तुमने मुझे वचन दिया था कि लेने आने से पहले पत्र लिखूंगा. मुझे बड़ा दुःख है कि तुम बिना किसी सूचना के अचानक दूतों सहित मेरे ऊपर चढ़ आए.मित्रता तो दूर रही तुमने अपने वचनों को भी नहीं निभाया.काल हंसा और बोला-मित्र इतना झूठ तो न बोलो.मेरे सामने ही मुझे झूठा सिद्ध कर रहे हो. मैंने आपको एक नहीं चार पत्र भेजे. आपने एक भी उत्तर नहीं दिया.मनुष्य ने चौंककर पूछा–कौन से पत्र?कोई प्रमाण है?मुझे पत्र प्राप्त कराने के आपके पास,है तो दिखाओ. काल ने कहा–घबराओ नहीं,मेरे चारों पत्र इस समय आपके पास मौजूद हैं.मेरा पहला पत्र आपके सिर पर चढ़कर बोला, आपके काले सुन्दर बालों को पकड़ कर उन्हें सफ़ेद कर दिया और यह भी कहा कि सावधान हो जाओ, जो करना है कर डालो.नाम,बड़ाई और धन-संग्रह के झंझटो को छोड़कर भजन में लग जाओ पर मेरे पत्र का आपके ऊपर जरा भी असर नहीं हुआ.बनावटी रंग लगा कर आपने अपने बालों को फिर से काला कर लिया और पुनः जवान बनने के सपनों में खो गए. आज तक मेरे श्वेत अक्षर आपके सिर पर लिखे हुए हैं.कुछ दिन बाद मैंने दूसरा पत्र आपके नेत्रों के प्रति भेजा.नेत्रों की ज्योति मंद होने लगी.फिर भी आंखों पर मोटे शीशे चढ़ा कर आप जगत को देखने का प्रयत्न करने लगे. दो मिनिट भी संसार की ओर से आंखे बंद करके,ज्योतिस्वरूप प्रभु का ध्यान मन में नहीं किया.इतने पर भी सावधान नहीं हुए तो मुझे आपकी
दीनदशा पर बहुत तरस आया और मित्रता के नाते मैंने तीसरा पत्र भी भेजा.इस पत्र ने आपके दांतो को छुआ, हिलाया और तोड़ दिया.आपने इस पत्र का भी जवाब न दिया बल्कि नकली दांत लगवाये और जबरदस्ती संसार के भौतिक पदार्थों का स्वाद लेने लगे.मुझे बहुत दुःख हुआ कि मैं सदा इसके भले की सोचता हूँ और यह हर बात एक नया,बनावटी रास्ता अपनाने को तैयार रहता है. अपने अन्तिम पत्र के रूप में मैंने रोग- क्लेश तथा पीड़ाओ को भेजा परन्तु आपने अहंकार वश सब अनसुना कर दिया. जब मनुष्य ने काल के भेजे हुए पत्रों को समझा तो फूट-फूट कर रोने लगा और अपने विपरीत कर्मो पर पश्चाताप करने लगा. उसने स्वीकार किया कि मैंने गफलत में शुभ चेतावनी भरे इन पत्रों को नहीं पढ़ा. मैं सदा यही सोचता रहा कि कल से भगवान का भजन करूंगा.अपनी कमाई अच्छे शुभ कार्यो में लगाऊंगा,पर वह कल नहीं आया.काल ने कहा–आज तक तुमने जो कुछ भी किया,राग-रंग,स्वार्थ और भोगों के लिए किया.जान बूझकर ईश्वरीय नियमों को तोड़कर जो काम करता है,वह अक्षम्य है.मनुष्य को जब अपनी बातों से काम बनता नज़र नहीं
आया तो उसने काल को करोड़ों की सम्पत्ति का लोभ दिखाया. काल ने हंसकर कहा- मित्र यह मेरे लिए धूल से अधिक कुछ भी नहीं है. धन-दौलत, शोहरत, सत्ता, ये सब लोभ संसारी लोगो को वश में कर सकता है, मुझे नहीं. मनुष्य ने पूछा- क्या कोई ऐसी वस्तु नहीं जो तुम्हें भी प्रिय हो,जिससे तुम्हें लुभाया जा सके.ऐसा कैसे हो
सकता है!काल ने उत्तर दिया-यदि तुम मुझे लुभाना ही चाहते थे तो सच्चाई और शुभ कर्मो का धन संग्रह करते. यह ऐसा धन है जिसके आगे मैं विवश हो सकता था.अपने निर्णय पर पुनर्विचार को बाध्य हो सकता था.पर
तुम्हारे पास तो यह धन धेले भर का भी नहीं है. तुम्हारे ये सारे रूपए-पैसे, जमीन-जायदाद, तिजोरी में जमा धन-संपत्ति सब यहीं छूट जाएगा.मेरे साथ तुम भी उसी प्रकार निवस्त्र जाओगे जैसे कोई भिखारी की आत्मा जाती है. काल ने जब मनुष्य की एक भी बात नहीं सुनी तो वह हाय-हाय करके रोने लगा. सभी सम्बन्धियों को पुकारा परन्तु काल ने उसके प्राण पकड़ लिए और चल पड़ा अपने गन्तव्य की ओर. काल ने कितनी बड़ी बात कही. एक ही सत्य है जो अटल है वह है कि हम एक दिन मरेेंगे जरूर. हम जीवन में
कितनी दौलत जमा करेंगे, कितनी शोहरत पाएंगे,कैसी संतान होगी यह सब अनिश्चित होता है,समय के गर्भ में छुपा होता है. परंतु हम मरेगे एक दिन बस यही एक ही बात जन्म के साथ ही तय हो जाती है. ध्रुव सत्य है मृ्त्यु. काल कभी भी दस्तक दे सकता है. प्रतिदिन उसकी तैयारी करनी होगी. समय के साथ उम्र की निशानियों को देख कर तो कम से कम हमें प्रभु की याद में रहने का अभ्यास करना चाहिए और अभी तो कलयुग का अन्तिम समय है इस में तो हर एक को चाहे छोटा हो या बड़ा सब को प्रभु
की याद में रहकर ही कर्म करने हैं
 उसने स्वीकार किया कि मैंने गफलत में शुभ चेतावनी भरे इन पत्रों को नहीं पढ़ा. मैं सदा यही सोचता रहा कि कल से भगवान का भजन करूंगा.अपनी कमाई अच्छे शुभ कार्यो में लगाऊंगा,पर वह कल नहीं आया.काल ने कहा–आज तक तुमने जो कुछ भी किया,राग-रंग,स्वार्थ और भोगों के लिए किया.जान बूझकर ईश्वरीय नियमों को तोड़कर जो काम करता है,वह अक्षम्य है.मनुष्य को जब अपनी बातों से काम बनता नज़र नहीं
आया तो उसने काल को करोड़ों की सम्पत्ति का लोभ दिखाया. काल ने हंसकर कहा- मित्र यह मेरे लिए धूल से अधिक कुछ भी नहीं है. धन-दौलत, शोहरत, सत्ता, ये सब लोभ संसारी लोगो को वश में कर सकता है, मुझे नहीं. मनुष्य ने पूछा- क्या कोई ऐसी वस्तु नहीं जो तुम्हें भी प्रिय हो,जिससे तुम्हें लुभाया जा सके.ऐसा कैसे हो
सकता है!काल ने उत्तर दिया-यदि तुम मुझे लुभाना ही चाहते थे तो सच्चाई और शुभ कर्मो का धन संग्रह करते. यह ऐसा धन है जिसके आगे मैं विवश हो सकता था.अपने निर्णय पर पुनर्विचार को बाध्य हो सकता था.पर
तुम्हारे पास तो यह धन धेले भर का भी नहीं है. तुम्हारे ये सारे रूपए-पैसे, जमीन-जायदाद, तिजोरी में जमा धन-संपत्ति सब यहीं छूट जाएगा.मेरे साथ तुम भी उसी प्रकार निवस्त्र जाओगे जैसे कोई भिखारी की आत्मा जाती है. काल ने जब मनुष्य की एक भी बात नहीं सुनी तो वह हाय-हाय करके रोने लगा. सभी सम्बन्धियों को पुकारा परन्तु काल ने उसके प्राण पकड़ लिए और चल पड़ा अपने गन्तव्य की ओर. काल ने कितनी बड़ी बात कही. एक ही सत्य है जो अटल है वह है कि हम एक दिन मरेेंगे जरूर. हम जीवन में
कितनी दौलत जमा करेंगे, कितनी शोहरत पाएंगे,कैसी संतान होगी यह सब अनिश्चित होता है,समय के गर्भ में छुपा होता है. परंतु हम मरेगे एक दिन बस यही एक ही बात जन्म के साथ ही तय हो जाती है. ध्रुव सत्य है मृ्त्यु. काल कभी भी दस्तक दे सकता है. प्रतिदिन उसकी तैयारी करनी होगी. समय के साथ उम्र की निशानियों को देख कर तो कम से कम हमें प्रभु की याद में रहने का अभ्यास करना चाहिए और अभी तो कलयुग का अन्तिम समय है इस में तो हर एक को चाहे छोटा हो या बड़ा सब को प्रभु
की याद में रहकर ही कर्म करने हैं

Tuesday, 29 March 2016

ज्ञानी जी का ज्ञान...................आम का पौधा

एक गरीब वृद्ध पिता के पास अपने अंतिम समय में दो बेटों को देने के लिए मात्र एक आम था। पिताजी आशीर्वादस्वरूप दोनों को वही देना चाहते थे, किंतु बड़े भाई ने आम हठपूर्वक ले लिया। रस चूस लिया छिल्का अपनी गाय को खिला दिया। गुठली छोटे भाई के आँगन में फेंकते हुए कहा- ' लो, ये पिताजी का तुम्हारे लिए आशीर्वाद है।'

छोटे भाई ने ब़ड़ी श्रद्धापूर्वक गुठली को अपनी आँखों व सिर से लगाकर गमले में गाढ़ दिया। छोटी बहू पूजा के बाद बचा हुआ जल गमले में डालने लगी। कुछ समय बाद आम का पौधा उग आया, जो देखते ही देखते बढ़ने लगा। छोटे भाई ने उसे गमले से निकालकर अपने आँगन में लगा दिया। कुछ वर्षों बाद उसने वृक्ष का रूप ले लिया। वृक्ष के कारण घर की धूप से रक्षा होने लगी, साथ ही प्राणवायु भी मिलने लगी। बसंत में कोयल की मधुर कूक सुनाई देने लगी। बच्चे पेड़ की छाँव में किलकारियाँ
भरकर खेलने लगे।

पेड़ की शाख से झूला बाँधकर झूलने लगे। पेड़ की छोटी-छोटी लक़िड़याँ हवन करने एवं बड़ी लकड़ियाँ
घर के दरवाजे-खिड़कियों में भी काम आने लगीं। आम के पत्ते त्योहारों पर तोरण बाँधने के काम में आने लगे। धीरे-धीरे वृक्ष में कैरियाँ लग गईं। कैरियों से अचार व मुरब्बा डाल दिया गया। आम के रस से घर-परिवार के सदस्य रस-विभोर हो गए तो बाजार में आम के अच्छे दाम मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई। रस से पाप़ड़ भी बनाए गए, जो पूरे साल मेहमानों व घर वालों को आम रस की याद दिलाते रहते। ब़ड़े बेटे को आम फल का सुख क्षणिक ही मिला तो छोटे बेटे को पिता का ' आशीर्वाद' दीर्घकालिक व सुख- समृद्धिदायक मिला।

यही हाल हमारा भी है परमात्मा हमे सब कुछ देता है सही उपयोग हम करते नही हैं दोष परमात्मा और किस्मत को देते हैं।

ज्ञानी जी का ज्ञान...................'मेरा तो कोई एक है, ये काल का सब संसार'

कामी क्रोधी लालची,इनसे ना भगती होय।
         भगती करै कोई सुरमा,जात वर्ण कुल खोय
एक राजा बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य मालिक को बडी श्रद्धा, आराधना से याद करता था।
एक दिन भगवान ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा---"राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हैं। बोलो तुम्हारी  कोई इच्छा है?"
प्रजा को चाहने वाला राजा बोला मेरे पास आपका दिया सब कुछ है। आपकी कृपा से राज्य में सब प्रकार सुख-शान्ति है। फिर भी मेरी एक ईच्छा है कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी दर्शन दीजिये।"
"यह तो सम्भव नहीं है।"भगवान ने राजा को समझाया। परन्तु राजा जिद्द करने लगा। आखिर भगवान को अपने साधक के सामने झुकना पडा ओर वे बोले--"ठीक है, कल सबको उस पहाडी के पास लाना। मैं पहाडी के ऊपर से दर्शन दूँगा।"
राजा अत्यन्त प्रसन्न हुआ और प्रभु को धन्यवाद दिया।
अगले दिन सारे नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि कल सभी पहाड के नीचे मेरे साथ पहुँचे, वहाँ मालिक आप सबको दर्शन देंगे।
दूसरे दिन राजा अपने समस्त प्रजा और स्वजनों को साथ लेकर पहाडी की ओर चलने लगा।
चलते-चलते रास्ते में एक स्थान पर तांबे कि सिक्कों का पहाड देखा। प्रजा में से कुछ उस ओर भागने लगे। तभी राजा ने सबको सतर्क किया कि कोई उस ओर ध्यान न दे क्योंकि तुम सब प्रभु से मिलने जा रहे हो,इन तांबे के सिक्कों के पीछे अपने भाग्य को लात मत मारो।परन्तु लोभ-लालच में वशीभूत कुछ तांबे कि सिक्कों वाली पहाडी की ओर भाग गये और सिक्कों कि गठरी बनाकर अपने घर कि ओर चलने लगे। वे मन ही मन सोच रहे थे कि पहले ये सिक्कों को समेट ले,मालिक से तो फिर कभी मिल लेंगे।

राजा खिन्न मन से आगे बढ़े।कुछ दूर चलने पर चांदी के सिक्कों का चमचमाता पहाड़ दिखाई दिया। इस बार भी बचे हुये प्रजा में से कुछ लोग उस ओर भागने लगे ओर चांदी के सिक्कों को गठरी बनाकर अपनी घर की ओर चलने लगे। उनके मन में विचार चल रहा था कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता है। चांदी के इतने सारे सिक्के  फिर मिले न मिले,प्रभु तो फिर कभी मिल जायेगें।

इसी प्रकार कुछ दूर और चलने पर सोने के सिक्कों का पहाड़ नजर आया। अब तो बचे हुये लोग तथा स्वजन भी उस ओर भागने लगे। वे भी दूसरों की तरह सिक्कों की गठरी लाद कर अपने-अपने घरों की ओर चल दिये।अब केवल राजा ओर रानी ही शेष रह गये थे। राजा रानी से कहने लगे---"देखो कितने लोभी ये लोग। भगवान से मिलने का महत्व ही नहीं जानते हैं। जिनके सामने सारी दुनिया कि दौलत क्या चीज है?" सही बात है--रानी ने राजा कि बात का समर्थन किया।

कुछ दुर चलने पर देखा कि सप्तरंगी आभा बिखरता हीरों का पहाड है। अब तो रानी से रहा नहीं गया, हीरों के आर्कषण से वह भी दौड़ पडी और हीरों की गठरी बनाने लगी। फिर भी उसका मन नहीं भरा तो साड़ी के पल्लू मेँ भी बाँधने लगी। वजन के कारण रानी के वस्त्र देह से अलग हो गये,परंतु हीरों की तृष्णा अभी भी नहीं मिटी। यह देख राजा को अत्यन्त ग्लानि ओर विरक्ति हुई।बड़े दुःखद मन से राजा अकेले ही आगे बढ़ते गये।

वहाँ सचमुच प्रभु खड़े उसका इन्तजार कर रहे थे। राजा को देखते ही मुस्कुराये और पूछा --"कहाँ है सब। मैं तो कब से उनसे मिलने के लिये बेकरारी से उनका इन्तजार कर रहा हुँ।"राजा ने शर्म और आत्म-ग्लानि से अपना सर झुका दिया। तब प्रभु ने राजा को समझाया--
"राजन जो लोग भौतिक सांसारिक प्राप्ति को मुझसे अधिक मानते है, उन्हें कदाचित मेरी प्राप्ति नहीं होती और वह मेरे स्नेह तथा आर्शीवाद से भी वंचित रह जाते हैं।"
सार.
जो जीव अपनी मन और बुद्धि से मालिक पर कुर्बान हो जाते हैं, सर्वभाव से प्रभु चरणों में समर्पित हो जाते है......वह मालिक  के प्रिय बनते हैं, उन्हीं पर प्रभु की विशेष रजा व दया होती है।
सर्वभाव से समर्पित आत्मा को सतलोक जाने में कोई बाधा नहीं होती।
यहाँ 'सर्वभाव' से आशय यह है...
"जो सतगुरु को सर्वप्रथम माने..
"जो गुरुजी के एक-एक वचन को माने और उस पर चलें..
"जो सतगुरु की पूर्ण मर्यादा में रहकर आधीन भाव से सत्भक्ति करता रहें..
सतगुरु हमें यहाँ से हंस बनाकर सतलोक ले जायेंगे।
सतगुरु कहते है कि...'मेरा तो कोई एक है, ये काल का सब संसार'!!

Sunday, 27 March 2016

Jokes ............. कान्हा की फरियाद अपनी माँ से ............ मईया मोरी व्हाट्सएप्प बहुत सतायो

कान्हा की फरियाद अपनी माँ से 

मईया मोरी व्हाट्सएप्प
बहुत सतायो
सब ग्वाल बाल मिल जुल
नया ग्रुप बनायो

मईया मोरी व्हाट्सएप्प
बहुत सतायो


मैं सबसे छोटा सा बालक
ग्रुप में जगह न पायो
सब बैठे चैटटिंग करते है
मोसो गाय चरवायो
मईया मोरी व्हाट्सएप्प
बहुत सतायो


बलदाऊ कहते है मुझसे
बंसी मती बजायो
बंसी की धुन सुन सुन के
रिंगटोन भूली जायो
मईया मोरी व्हाट्सएप्प
बहुत सतायो


राधा के संग सभी गोपियाँ
व्हाट्सएप्प पर बतियायो
राधा को अब मेरी बतियाँ
तनिको नाही सुहायो
मईया मोरी व्हाट्सएप्प
बहुत सतायो


किसके घर कितना माखन है
सब गूगल पर आयो
माखन मिश्री छोड़ ग्वाल सब
बर्गर पिज़्ज़ा खायो
मईया मोरी व्हाट्सएप्प
बहुत सतायो


सब घर काफी चाय बनत है
दूध खतम हुई जायो
अब माखन के नाम पर सब
अमूल का भोग लगायो
मईया मोरी व्हाट्सएप्प
बहुत सतायो


मैं माखन का चोर कहाउँ
पर माखन ना पायो
भूख लगी मेरे तनमन को
बुझा भक्त बनी जाओ
मईया मोरी व्हाट्स एप बहुत सतायो।

Saturday, 26 March 2016

Jokes ............. आज बियर तृतीया है

आज बियर तृतीया है.

हर साल यह पर्व जब सूर्य वृषभ राशि में रहता है जब गर्मी अपनी पूर्ण यौवन पर होती हैं।

इसे "बियर तीज" भी कई जगह कहा जाता है।

इसका शुभ मुहूर्त आज संध्या 6 बजे से रात 12 बजे तक है.

इस दिन घर पर या दोस्तों की महफ़िल में बियर पीने पिलाने से साल भर बीबी से कचकच नही होती ।

जो जातक दारु नही पीते फिर भी पत्नी की रोज की चक चक से परेशान रहते है ।
उन्हें शुभ मुहूर्त में 9 बियर चढ़ा कर दोस्तों को पिला कर मात्र चखना चबाने से पूर्ण पुण्य मिलता है.

नोट:- बियर पिलाने में जात धर्म का कोई बंधन नही रहता। बियर तृतीया 
मनाने की विधि

1. संध्या काल स्नान आदि के बाद हलके वस्त्रो में एसी चला कर बैठें।

2. समयानुसार पृष्ठभूमि में "मुन्नी बदनाम हुई" जैसे भजन की सीडी लगा लें।

3. बियर सामग्री को फ्रिज से निकाल कर टेबिल पर सजा लें।

4. प्रसाद के लिए कुछ नमकीन, काजू (भुने हुए), दालमोठ इत्यादि का प्रबंध करें।

5. पूर्वी और दक्षिण भारत में फ्राई करी हुई मछली से भी प्रसाद चढ़ाया जाता है। कुछ न होने पर सदा पापड़ भून कर प्रसाद चढ़ाये।

6. बियर को ग्लास में निकाले, ध्यान रहे कि बियर के झाग टेबिल पर न गिरें। टेबिल पत्नी को साफ़ करनी है और आज के दिन पत्नी की अप्रसन्नता वर्जित है।

7. श्रद्धानुसार एक, दो, तीन बियर के ग्लास पीते जाएँ जब तक पत्नी का चेहरा लाल न हो जाये।

8. अंत में पत्नी को नमस्कार कर के घर से बाहर निकल जाएँ और खाना खा कर ही घर वापस आएं।

9. आज कल बियर तृतीया का पर्व सामूहिक रूप से दोस्तों के साथ भी मनाया जाता है।

Thursday, 24 March 2016

ज्ञानी जी का ज्ञान....................रेस में जीतने वाले घोड़े को तो पता भी नही होता कि जीत वास्तव में क्या है

1 "क्या फर्क पड़ता है,
हमारे पास कितने लाख,
कितने करोड़,
कितने घर,
कितनी गाड़ियां हैं,
खाना तो बस दो ही रोटी है।
जीना तो बस एक ही ज़िन्दगी है।
फर्क इस बात से पड़ता है,
कितने पल हमने ख़ुशी से बिताये,
कितने लोग हमारी वजह से खुशी से जीए ...

2 ", वो तो अपने
मालिक द्वारा दी गई तकलीफ
कि वजह से ही दौड़ता है, इसलिए
यदि आपके जीवन मे कभी कोई
तकलीफ आए तो समझ
लेना कि आपका मालिक
आपको जीताना चाहता है ।

3 खाया पीया अंग लगेगा ।
दान दिया संग चलेगा ।
बाकि बचा जंग लगेगा ।।
धन घर तक साथ चलेगा ।
परीवार श्मशान तक साथ चलेगा
पर धर्म और सेवा भाव
तो दुसरे जन्म में भी आपके साथ साथ चलेगा ।

4 उद्योग ( निष्काम कर्म ) को मित्र की तरह ग्रहण करना चाहिये ।
प्रमाद को शत्रु की तरह त्यागना चाहिये ।
उद्यम से परम सिध्दि मिलती है, तथा प्रमाद से क्षय होता है ।

5 दुष्ट की विद्या विवाद के लिए,
धन अहंकार के लिए और
शक्ति दूसरों को कष्ट देने के लिए होती है ।
इसके विपरीत सज्जनों की विद्या ज्ञान के लिए,
धन दान के लिए और
शक्ति पर सेवा के लिए होती है।

6...  70 हजार की गाडी मे कभी मिट्टी का तेल नही डालते
क्यों ?
गाडी का इंजन खराब हो जायेगा...
70 हजार की गाडी की आपको इतनी चिंता है..?
कभी मन मे काम क्रोध लोभ मोह अंहकार डालने के पहले सोचा कि तन कितना खराब हो जायेगा
तो...??
करोडो के इस अनमोल शरीर के मन रूपी इंजन की भी उतनी ही चिंता करो जितनी अपनी गाडी की करते हो...

ज्ञानी जी का ज्ञान..................... ज़िन्दगी का ये हुनर भी,आज़माना चाहिए, जंग अगर अपनों से तो हार जाना चाहिए..

''जीवन वोध में जीना सीखो विरोध में नहीं, एक सुखप्रद जीवन के लिए इससे श्रेष्ठ कोई दूसरा उपाय नहीं हो सकता। जीवन अनिश्चित है और  जीवन की अनिश्चितता का मतलब यह है कि यहाँ कहीं भी और कभी भी कुछ हो सकता है।
        यहाँ पर आया प्रत्येक जीव बस कुछ दिनों का मेंहमान से ज्यादा कुछ नहीं है, इसीलिए जीवन को हंसी में जिओ, हिंसा में नहीं। चार दिन के इस जीवन को प्यार से जिओ, अत्याचार से नहीं।
      जीवन जरुर आनंद के लिए ही है इसीलिए इसे मजाक बनाकर नहीं मजे से जिओ। इस दुनियां में बाँटकर जीना सीखो बंटकर नहीं। जीवन वीणा की तरह है, ढंग से बजाना आ जाए तो आनंद ही आनंद है।
    
      एक पत्नी ने अपने पति  से आग्रह किया कि वह उसकी छह कमियाँ बताए जिन्हें सुधारने से वह बेहतर पत्नी बन जाए. पति यह सुनकर हैरान रह गया और असमंजस की स्थिति में पड़ गया. उसने सोचा कि मैं बड़ी आसानी से उसे ६ ऐसी बातों की सूची थमा सकता हूँ , जिनमें सुधार की जरूरत थी और ईश्वर जानता है कि वह ऐसी ६० बातों की सूची थमा सकती थी, जिसमें मुझे  सुधार की जरूरत थी.
       परंतु पति ने ऐसा नहीं किया और कहा - 'मुझे इस बारे में सोचने का समय दो , मैं तुम्हें सुबह इसका जबाब दे दूँगा.'
        पति अगली सुबह जल्दी ऑफिस गया और फूल वाले को फोन करके उसने अपनी पत्नी के लिए छह गुलाबों का तोहफा भिजवाने के लिए कहा जिसके साथ यह चिट्ठी लगी हो, "मुझे तुम्हारी छह कमियाँ नहीं मालूम, जिनमें सुधार की जरूरत है. तुम जैसी भी हो मुझे बहुत अच्छी लगती हो."
      उस शाम पति जब आफिस से लौटा तो देखा कि उसकी पत्नी दरवाज़े पर खड़ी उसका इंतज़ार कर रही थी, उसकी आंखौं में आँसू भरे हुए थे,यह कहने की जरूरत नहीं कि उनके जीवन की मिठास कुछ और बढ़ गयी थी। पति इस बात पर बहुत खुश था कि पत्नी के आग्रह के बावजूद उसने उसकी छह कमियों की सूची नहीं दी थी.
इसलिए यथासंभव जीवन में सराहना करने में कंजूसी न करें और आलोचना से बचकर रहने में ही समझदारी है।
         ज़िन्दगी का ये हुनर भी,
                             आज़माना चाहिए,
         जंग अगर अपनों से हो,
                              तो हार जाना चाहिए..

Wednesday, 23 March 2016

Greatest scientists of all times were invited to a reunion ...

Reunion Invitation  
Greatest scientists of all times were invited to a reunion ...

* Newton said he'd drop in.

* Socrates said he'd think about it.

* Ohm resisted the idea.

* Boyle said he was under too much pressure.

* Darwin said he'd wait to see what evolved.

* Pierre and Marie Curie radiated enthusiasm.

* Volta was electrified at the prospect.

* Pavlov positively drooled at the thought.

* Ampere was worried he wasn't current enough though alternately none were.

* Audubon said he'd have to wing it.

* Edison thought it would be illuminating.

* Einstein said it would be relatively easy to attend.

* Archimedes was buoyant at the thought.

* Dr Jekyll declined - he said he hadn't been feeling himself lately.

* Morse said, "I'll be there on the dot. Can't stop now, must dash."

* Gauss was asked to attend because of his magnetism.

* Hertz said he planned to attend with greater frequency in the future.

* Watt thought it would be a good way to let off steam.

* Wilbur Wright accepted, provided he and Orville could get a flight.

* And Dr. Sigmund Freud couldn't help but give it the slip

होली पर प्रस्तुत है स्वरचित कविता

सभी मित्रों ,वरिष्ठ एवं कनिष्ठ साथियों को होली की हार्दिक शुभ कामनायें 
होली पर प्रस्तुत है स्वरचित कविता 






गाओ, गुनगुनाओ, तो कुछ बात बने, इस होली।

बहुत हो गये  , शिकवे    शिकायतें,
न  तुम  थकते   , न  हम      थकते । 
आ जाओ करीब, कोई  कुछ न बोले।  
एक   दूसरे  को ,  नैनों   से    टटोलें। 
बिन  कुछ  बोले  ,  सब   कह  डालें ,
तो   कुछ  बात बने  ,       इस होली।१। 

बात    बात   पर  ,   रूठे       हमसे,
बोलें     न     हम ,         कुछ तुमसे। 
श्रृंगार   तुम्हारा ,  यदि   हमसे     है ,
पर्दे   में   रहना  ,   न  बस    में   है ,
बाँहों      में           अब  आ   जाओ ,
तो   कुछ बात बने,          इस होली।२। 

न       कुछ सोचो ,     न कुछ बूझो ,
बस खो जाओ , रंगों के तरकश में। 
हम     भी आयेंगे ,       तुम्हें ढूंढनें ,
छिप      न जाना ,     तुम अनजाने। 
पाकर     तुमको , भूलें सारी दुनिया ,
तो   कुछ बात बने,          इस होली।३। 

बहुत उड़ लिये , फंस जाओ मेरे पिंजरे में ,
तो कुछ बात बने,         इस   होली।

गाओ, गुनगुनाओ, तो कुछ बात बने, इस होली।

ज्ञानी जी का ज्ञान................ मत सोच की तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता.....

1 मत सोच की तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता.....
हिम्मत वालो का इरादा कभी अधुरा नहीं होता....
जिस इंसान के कर्म अच्छे होते है......
उस के जीवन में कभी अँधेरा नहीं होता......

2 अगर किसी परिस्थिती के लिए आपके पास सही शब्द नहीं हैं ...
तो सिर्फ मुस्कुरा दीजिये.
शब्द उलझा सकते हैं...
पर मुस्कराहट हमेशा काम कर जाती है..

3 फजूल ही पत्थर रगङ कर आदमी ने चिंगारी की खोज की,
अब तो आदमी आदमी से जलता है..!

4 मैने बहुत से ईन्सान देखे हैं,जिनके बदन पर लिबास नही होता।
और बहुत से लिबास देखे हैं,जिनके अंदर ईन्सान नही होता।

5 कोई हालात नहीं समझता ,कोई जज़्बात नहीं समझता,
ये तो बस अपनी अपनी समझ की बात है...,
कोई कोरा कागज़ भी पढ़ लेता है,तो कोई पूरी किताब नहीं समझता!!

6 "चंद फासला जरूर रखिए हर रिश्ते के दरमियान!
क्योंकि"नहीं भूलती दो चीज़ें चाहे जितना भुलाओ....!...
..एक "घाव"और दूसरा "लगाव"...

7 दान छपाकर नहीं,
              दान छुपाकर दो .

8 ढ़ोंग का जीवन नहीं,
              ढ़ंग का जीवन जीओ.

9 सत्य शांत होता है,
              असत्य शोर मचाता है.

10 अंतःकरण भगवान की,
              बनायी अदालत है.

11  बातों के बादशाह नहीं,
आचरण के आचार्य बनों....!!

12 जो सफर की शुरुआत करते हैं,वे मंजिल भी पा लेते हैं.
बस,
एक बार चलने का हौसला रखना जरुरी है.क्योंकि,
अच्छे इंसानों का तो रास्ते भी इन्तजार करते हैं...

ज्ञानी जी का ज्ञान.......................ठाकुर जी की सेवा

एक सासु माँ और बहू थी।

सासु माँ हर रोज ठाकुर जी पूरे नियम और श्रद्धा के साथ सेवा करती थी।

एक दिन शरद रितु मेँ सासु माँ को किसी कारण वश शहर से बाहर जाना पडा।

सासु माँ ने विचार किया के ठाकुर जी को साथ ले जाने से रास्ते मेँ उनकी सेवा-पूजा नियम से नहीँ हो सकेँगी।
सासु माँ ने विचार किया के ठाकुर जी की सेवा का कार्य अब बहु को देना पड़ेगा लेकिन बहु को तो कोई अक्कल है ही नहीँ के ठाकुर जी की सेवा कैसे करनी हैँ।
सासु माँ ने बहु ने बुलाया ओर समझाया के ठाकुर जी की सेवा कैसे करनी है।
कैसे ठाकुर जी को लाड लडाना है।
सासु माँ ने बहु को समझाया के बहु मैँ यात्रा पर जा रही हूँ और अब ठाकुर जी की सेवा पूजा का सारा कार्य तुमको  करना है।
सासु माँ ने बहु को समझाया देख ऐसे तीन बार घंटी बजाकर सुबह ठाकुर जी को जगाना।
फिर ठाकुर जी को मंगल भोग कराना।
फिर ठाकुर जी स्नान करवाना।
ठाकुर जी को कपड़े पहनाना।
फिर ठाकुर जी का श्रृंगार करना ओर फिर ठाकुर जी को दर्पण दिखाना।
दर्पण मेँ ठाकुर जी का हंस्ता हुआ मुख देखना बाद मेँ ठाकुर जी राजभोग लगाना।
इस तरह सासु माँ बहु को सारे सेवा नियम समझाकर यात्रा पर चली गई।
अब बहु ने ठाकुर जी की सेवा कार्य उसी प्रकार शुरु किया जैसा सासु माँ ने समझाया था।
ठाकुर जी को जगाया नहलाया कपड़े पहनाये श्रृंगार किया और दर्पण दिखाया।
सासु माँ ने कहा था की दर्पण मेँ ठाकुर जी का हस्ता हुआ देखकर ही राजभोग लगाना।
दर्पण मेँ ठाकुर जी का हस्ता हुआ मुख ना देखकर बहु को बड़ा आशर्चय हुआ।
बहु ने विचार किया शायद मुझसे सेवा मेँ कही कोई गलती हो गई हैँ तभी दर्पण मे ठाकुर जी का हस्ता हुआ मुख नहीँ दिख रहा।
बहु ने फिर से ठाकुर जी को नहलाया श्रृंगार किया दर्पण दिखाया।
लेकिन ठाकुर जी का हस्ता हुआ मुख नहीँ दिखा।
बहु ने फिर विचार किया की शायद फिर से कुछ गलती हो गई।
बहु ने फिर से ठाकुर जी को नहलाया श्रृंगार किया दर्पण दिखाया।
जब ठाकुर जी का हस्ता हुआ मुख नही दिखा बहु ने फिर से ठाकुर जी को नहलाया ।
ऐसे करते करते बहु ने ठाकुर जी को 12 बार स्नान किया।
हर बार दर्पण दिखाया मगर ठाकुर जी का हस्ता हुआ मुख नहीँ दिखा।
अब बहु ने 13वी बार फिर से ठाकुर जी को नहलाने की तैयारी की।
अब ठाकुर जी ने विचार किया की जो इसको हस्ता हुआ मुख नहीँ दिखा तो ये तो आज पूरा दिन नहलाती रहेगी।
अब बहु ने ठाकुर जी को नहलाया कपड़े पहनाये श्रृंगार किया और दर्पण दिखाया।
अब बहु ने जैसे ही ठाकुर जी को दर्पण दिखाया तो ठाकुर जी अपनी मनमोहनी मंद मंद मुस्कान से हंसे।
बहु को संतोष हुआ की अब ठाकुर जी ने मेरी सेवा स्वीकार करी।
अब यह रोज का नियम बन गया ठाकुर जी रोज हंसते।
सेवा करते करते अब तो ऐसा हो गया के बहु जब भी ठाकुर जी के कमरे मेँ जाती बहु को देखकर ठाकुर जी हँसने लगते।
कुछ समय बाद सासु माँ वापस आ गई।
सासु माँ ने ठाकुर जी से कहा की प्रभु क्षमा करना अगर बहु से आपकी सेवा मेँ कोई कमी रह गई हो तो अब मैँ आ गई हूँ आपकी सेवा पूजा बड़े ध्यान से करुंगी।
तभी सासु माँ ने देखा की ठाकुर जी हंसे और बोले की मैय्या आपकी सेवा भाव मेँ कोई कमी नहीँ हैँ आप बहुत सुंदर सेवा करती हैँ लेकिन मैय्या दर्पण दिखाने की सेवा तो आपकी बहु से ही करवानी है इस बहाने मेँ हँस तो लेता हूँ।

बोलो ठाकुर प्यारे की जय।   राधे राधे जय श्री राधे  

Monday, 21 March 2016

Jokes ........... JNU ke Sholay

JNU ke Sholay

मौसी: लेकिन बेटा, बुरा नहीं मानना, इतना तो पूछना ही पड़ता है, के लड़के का खानदान क्या है, उसके लच्छन कैसे है, कमाता कितना है?
दोस्त : कमाने का तो यह है,
मौसी....के एक बार स्टाईपेंड बंद हो गयी तो ... कमाने भी लगेगा |
मौसी : स्टाईपेंड मतलब? लड़का पढ रहा है ? फिर इतनी कम उमर में शादी ?
दोस्त : नहीं नहीं ये मैने कब कहा मौसी | लड़का तो २९ साल का है|
मौसी : हाय दैया, इतना बड़ा लड़का ? और रहता कहाँ है, होस्टल में ?
दोस्त : वैसे रहता होस्टल में है पर कभी कभी पुलिस थाने में भी सोना पड़ता है |
मौसी :  पुलिस थाने में ? तो क्या चोर है ?
दोस्त : वो और चोर ना... ना, मौसी वो तो क्रांतिकारी है | अब कभी कभी दोस्तों के साथ  अफज़ल के समर्थन के नारे देता पकड़ा गया तो पुलिस उठा के ले जाती है |
मौसी  : ओहो.. बस यही एक कमी रह गयी थी ?मतलब देशद्रोही है, वो |
दोस्त : मौसी आप तो मेरे दोस्त को गलत समझ रही हैं | वो तो इतना सीधा और भोला है की, आजादी के चक्कर में उसे होश ही नही रहता की वो कौनसे देश का है |
मौसी : अरे बेटा , मुझ बुढिया
को समझा रहे हो, मेरे बचपन में ही हम आज़ाद हो चुके हैं | अब कौनसी आज़ादी  मांग रहा है?
दोस्त: बस मौसी, उसका पता चलते ही हम आप को खबर दे देंगे|
मौसी  : एक बात की दाद दूंगी बेटा, भले सौ बुराईया हैं तुम्हारे दोस्त में, फिर भी तुम्हारे मुंह से उस के लिए, तारिफे ही निकलती है | 
दोस्त : अब क्या करुं मौसी.... मेरा तो नाम ही केजरीवाल  है |

Sunday, 20 March 2016

आज देश में चिकित्सा व्यवसाय की अजीब स्थिति है

आज देश में चिकित्सा व्यवसाय की अजीब स्थिति है 
डॉक्टर्स के बच्चे ही आज चिकित्सक बनने से भाग रहे हैं,

नेता और ब्यूरोक्रेट्स फिर भी सेवाओं में सुधार की, बांग लगा रहे हैं 
लम्बी शिक्षा , कठिन परीक्षा , मांगो अधिकार , तो सबको आता है गुस्सा।

आज देश की स्वास्थय सेवाएं बदहाल हैं 
क्योकि आज देश के डॉक्टर ही बीमार हैं। 

पैसा हर कोई कमाना चाहता है
पर डॉक्टर मांगे फीस, 
तो यह नहीं भाता है।

चिकित्सा अब बन गई, व्यापारिक वस्तु है
पर समाज के प्रति फिर भी चिकित्सक की , 
सामाजिक जिम्मेदारी है 
आपात काल में हुए खर्चे की न कोई , सरकारी जिम्मेदारी है 
पर जो हो जाए गल्ती तो , 
कीमत भारी है।

विधायक जनसेवा करते , अपना भत्ता बढ़ा रहे हैं 
डॉक्टर मांगे कितनी फीस , उसपे गुर्रा रहे हैं
सांसद परामेडिकल्स को भी, डॉक्टर्स बना रहे हैं
कॉर्पोरेट्स के चक्कर में, डॉक्टर्स को गुलाम बना रहे हैं।

क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट , पी एन डी टी एक्ट
अफस्पा से भी खतरनाक हैं 
छोटी सी प्रशाशनिक गलती पर 
भारी जुर्माने और जेल का प्रावधान है।

देश के नेता, जिम्मेदारी से भाग रहे हैं 
बिना समझे स्थिति को, बेरहम कानून बना रहे हैं 
अपनी जिम्मेदारियों का ठीकरा , चिकत्सकों पर फोड़ रहे हैं 
देश में चिकित्सकों का, मनोबल तोड़ रहे हैं।

डॉक्टर बनते हैं समाज सेवा और आजीविका के लिए , 
न की ता जिंदगी बात- बात पर, अदालत जाने के लिए ,
आजीविका कमाने के और भी लाख साधन और समाधान हैं 
क्योंकि नहीं चिकित्सा के लिए देश में , न्याय संगत विधान है।

स्थिति कितनी भी विकट है, या मुश्किल विधान है 
मुझे फिर भी ख़ुशी और चिकित्सक होने का अभिमान है ,
कमाता हूँ मैं इज़्ज़त से , समाज में सम्मान है ,

चाहे कोई कुछ भी समझे ,यह सबसे बेहतरीन काम है।
पैसा कमाना जरूरी है , हर इंसान की मजबूरी है 

पर जब किसी दुखी मरीज , की तकलीफ दूर हो जाती है 
उससे बड़ी डॉक्टर के लिए , दुनिया की कोई ख़ुशी नहीं होती 
किसी की कृतज्ञ मुस्कराहट से बड़ी, कोई पारितोषिक नहीं होती।

ज्ञानी जी का ज्ञान.....................गंदे बहेलिये की झोंपड़ी

राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण सुनातें हुए जब शुकदेव जी महाराज को छह दिन बीत गए और तक्षक ( सर्प ) के काटने से मृत्यु होने का एक दिन शेष रह गया, तब भी राजा परीक्षित का शोक और मृत्यु का भय दूर नहीं हुआ। अपने मरने की घड़ी निकट आती देखकर राजा का मन क्षुब्ध हो रहा था। तब शुकदेव जी महाराज ने परीक्षित को एक कथा सुनानी आरंभ की।

बहुत समय पहले की बात है, एक राजा किसी जंगल में शिकार खेलने गया। संयोगवश वह रास्ता भूलकर बड़े घने जंगल में जा पहुँचा। उसे रास्ता ढूंढते-ढूंढते रात्रि पड़ गई और भारी वर्षा पड़ने लगी। जंगल में सिंह व्याघ्र आदि बोलने लगे। वह राजा बहुत डर गया और किसी प्रकार उस भयानक जंगल में रात्रि बिताने के लिए विश्राम का स्थान ढूंढने लगा।
रात के समय में अंधेरा होने की वजह से उसे एक दीपक दिखाई दिया। वहाँ पहुँचकर उसने एक गंदे बहेलिये की झोंपड़ी देखी । वह बहेलिया ज्यादा चल-फिर नहीं सकता था, इसलिए झोंपड़ी में ही एक ओर उसने मल-मूत्र त्यागने का स्थान बना रखा था। अपने खाने के लिए जानवरों का मांस उसने झोंपड़ी की छत पर लटका रखा था। बड़ी गंदी, छोटी, अंधेरी और दुर्गंधयुक्त वह झोंपड़ी थी।

उस झोंपड़ी को देखकर पहले तो राजा ठिठका, लेकिन पीछे उसने सिर छिपाने का कोई और आश्रय न देखकर उस बहेलिये से अपनी झोंपड़ी में रात भर ठहर जाने देने के लिए प्रार्थना की।बहेलिये ने कहा कि आश्रय के लोभी राहगीर कभी-कभी यहाँ आ भटकते हैं। मैं उन्हें ठहरा तो लेता हूँ, लेकिन दूसरे दिन जाते समय वे बहुत झंझट करते हैं। इस झोंपड़ी की गंध उन्हें ऐसी भा जाती है कि फिर वे उसे छोड़ना ही नहीं चाहते और इसी में ही रहने की कोशिश करते हैं एवं अपना कब्जा जमाते हैं। ऐसे झंझट में मैं कई बार पड़ चुका हूँ।। इसलिए मैं अब किसी को भी यहां नहीं ठहरने देता। मैं आपको भी इसमें नहीं ठहरने दूंगा।राजा ने प्रतिज्ञा की कि वह सुबह होते ही इस झोंपड़ी को अवश्य खाली कर देगा। उसका काम तो बहुत बड़ा है, यहाँ तो वह संयोगवश भटकते हुए आया है, सिर्फ एक रात्रि ही काटनी है।बहेलिये ने राजा को ठहरने की अनुमति दे दी, पर सुबह होते ही बिना कोई झंझट किए झोंपड़ी खाली कर देने की शर्त को फिर दोहरा दिया।

राजा रात भर एक कोने में पड़ा सोता रहा। सोने में झोंपड़ी की दुर्गंध उसके मस्तिष्क में ऐसी बस गई कि सुबह उठा तो वही सब परमप्रिय लगने लगा। अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूलकर वहीं निवास करने की बात सोचने लगा।

वह बहेलिये से और ठहरने की प्रार्थना करने लगा। इस पर बहेलिया भड़क गया और राजा को भला-बुरा कहने लगा। राजा को अब वह जगह छोड़ना झंझट लगने लगा और दोनों के बीच उस स्थान को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
कथा सुनाकर शुकदेव जी महाराज ने परीक्षित से पूछा," परीक्षित ! बताओ, उस राजा का उस स्थान पर सदा के लिए रहने के लिए झंझट करना उचित था ? "

परीक्षित ने उत्तर दिया," भगवन् ! वह कौन राजा था, उसका नाम तो बताइये ? वह तो बड़ा भारी मूर्ख जान पड़ता है, जो ऐसी गंदी झोंपड़ी में, अपनी प्रतिज्ञा तोड़कर एवं अपना वास्तविक उद्देश्य भूलकर, नियत अवधि से भी अधिक रहना चाहता है। उसकी मूर्खता पर तो मुझे आश्चर्य होता है। "
श्री शुकदेव जी महाराज ने कहा," हे राजा परीक्षित ! वह बड़े भारी मूर्ख तो स्वयं आप ही हैं। इस मल-मूल की गठरी देह ( शरीर ) में जितने समय आपकी आत्मा को रहना आवश्यक था, वह अवधि तो कल समाप्त हो रही है। अब आपको उस लोक जाना है, जहाँ से आप आएं हैं। फिर भी आप झंझट फैला रहे हैं और मरना नहीं चाहते। क्या यह आपकी मूर्खता नहीं है ?
राजा परीक्षित का ज्ञान जाग पड़ा और वे बंधन मुक्ति के लिए सहर्ष तैयार हो गए।

वास्तव में यही सत्य है। जब एक जीव अपनी माँ की कोख से जन्म लेता है तो अपनी माँ की कोख के अन्दर भगवान से प्रार्थना करता है कि हे भगवन् ! मुझे यहाँ ( इस कोख ) से मुक्त कीजिए, मैं आपका भजन-सुमिरन करूँगा। और जब वह जन्म लेकर इस संसार में आता है तो ( उस राजा की तरह हैरान होकर ) सोचने लगता है कि मैं ये कहाँ आ गया ( और पैदा होते ही रोने लगता है ) फिर उस गंध से भरी झोंपड़ी की तरह उसे यहाँ की खुशबू ऐसी भा जाती है कि वह अपना वास्तविक उद्देश्य भूलकर यहाँ से जाना ही नहीं चाहता है। यह मेरी भी कथा है और आपकी भी।

Saturday, 19 March 2016

ज्ञानी जी का ज्ञान.......................दूध के डिब्बे में एक लोटा पानी


गाँव की एक अहीर बाला दूध बेचने के लिये रोजाना दूसरे गाँव जाती। रास्ते में एक नदी पड़ती। नदी किनारे दूध का डिब्बा खोलती और उसमें से एक लोटा दूध निकालती। दूध के डिब्बे में एक लोटा पानी मिलाती और नदी पार के गाँव की ओर चल पड़ती दूध बेचने। यह उसकी रोज की दिनचर्या थी। 

नदी किनारे एक वृक्ष पर संत मलूकदास जी जप माला फेरते हुऐ इस अहीर बाला की गतिविधियों को रोज आश्चर्य से देखा करते। एक दिन उनसे रहा नहीं गया और ऊपर से आवाज लगा ही दी। -- बेटी सुनो! -- हाँ ! बाबा। बोलिये ना। -- बुरा न मानो तो तुमसे एक बात पूछना चाहता हूँ। -- पूछिये ना बाबा। आपकी बात भी कोई बुरा मानने की होती है क्या ? - बेटी ! मैं रोज देखता हूँ। तुम यहाँ आती हो। दूध के डिब्बे में से एक लोटा दूध निकालती हो और डिब्बे में एक लोटा पानी मिला देती हो ? क्यों करती हो तुम ऐसा ? 

लड़की ने नज़रें नीची कर ली। कहा--- बाबा ! मैं जिस गाँव में दूध बेचने जाती हूँ ना..वहाँ मेरी सगाई पक्की हुई है। मेरे वो वहीं रहते हैं। जबसे सगाई हुई है मैं रोज एक लोटा दूध उन्हें लेजाकर देती हूँ। दूध कम न पड़े इसलिये एक लोटा पानी डिब्बे में मिला देती हूँ... --  

पगली तू ये क्या कर रही है ? कभी हिसाब भी लगाया है तूने ? कितना दूध- पानी कर चुकी है अभी तक तू। अपने मंगेतर के लिये ? -- 

लड़की नें नज़रें तनिक उठाते हुऐ उत्तर दिया-- बाबा ! जब सारा जीवन ही उसे सौंपने का फैसला हो गया तो फिर हिसाब क्या लगाना ? जितना दे सकी दिया.. जितना दे सकूंगी देती रहूंगी। 

मलूक दास जी के हाथ से माला छूट कर नदी में जा गिरी। उस अहीर बाला के पाँव पकड़ लिये उन्होंने--- बेटी ! तूने तो मेरी आँखें ही खोल दी। माला का हिसाब लगाते लगाते मैंने तो जप का मतलब ही नहीं समझा। जब सारा जीवन ही उसे सौंप दिया तो क्या हिसाब रखना ? कितनी माला फेर ली ?
यह है प्रेम...!!!

ज्ञानी जी का ज्ञान..............निंदा " तो उसी की होती है जो " ज़िंदा " है

1 मनुष्य तो अपने आप में प्रेम का,दया का,सेवा का,और आनन्द  का मूर्तरूप होता है।


2 शब्द मुफ्त में मिलते हैं .....
       उनके चयन पर निर्भर करता है
कि उसकी कीमत मिलेगी
             या चुकानी पड़ेगी...

3 शानदार बात
"रात भर गहरी नींद आना इतना आसान नहीं...
उसके लिए दिन भर "ईमानदारी" से जीना पड़ता हैं....!

4 निंदा " तो उसी की होती है जो " ज़िंदा " है,
मरे हुए की तो बस तारीफ ही होती है !!

5 किसी व्यक्ति के जीवन की ऊंचाई मापने के तीन पैमाने है,
ह्रदय की मधुरता , उदारता और विनम्रता !!

6 सत्य के मार्ग पर चलने वाले के लिए चारों ओर कांटे लगे हुए है।

7 सत्य से प्राप्त सुख स्थाई होता है और असत्य से प्राप्त सुख क्षणिक होता है ।

8 सत्य से वाणी पवित्र होती है जैसे स्नान करने से शरीर निर्मल होता है साबुन से कपडे साफ होते है वैसे ही सत्य से वाणी निर्मल होती है ।

Friday, 18 March 2016

Jokes ................ मुझे बहोत ख़ुशी है की आज ऑफिस में एक साथ दस स्टाफ की बीवी प्रेग्नेंट है

तिवारी साहब एकदम कडक ऑफिसर ................,


स्टाफ अगर लेट आये तो उनको बिलकुल बर्दाश्त नहीं होता।
नियम यह था की लेट जो भी आएगा वो रजिस्टर पे लेट आने का कारन भी लिखेगा......

उस दिन ऑफिस आने पे जब तिवारी जी ने रजिस्टर देखा तो उनका दिमाग ही ख़राब हो गया..........

तुरंत दस स्टाफ को केबिन में बुलाया गया............,
दसो स्टाफ केबिन में लाइन से गर्दन झुका के खड़े थे......

तिवारी साहब के आँखों से अंगार निकल रही थी और गुस्से से लाल पिले हो रहे थे......

इतने में ही peon अंदर एक मिठाई का डब्बा लेके आया...

इतने में तिवारी साहब उठे......
आँखे तरेरते हुए सारे स्टाफ को मिठाई हाथ में दी और कहा - "खाओ'....



किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था पर डर के मारे मिठाई खा ली...

"बधाई हो बधाई", तिवारी साहब चिल्लाये....
और कहा....
"मुझे बहोत ख़ुशी है की आज ऑफिस में एक साथ दस स्टाफ की बीवी प्रेग्नेंट है".........
और इससे भी आश्चर्य की बात यह है की सबकी सोनोग्राफी भी आज ही हुई है"



"बेवकूफो रजिस्टर पे लिखते समय यह तो देखो की ऊपर वाले ने क्या लिखा है....बिना देखे 'Same As Above' लिख देते हो........ ,



 और इससे भी बड़ा आश्चर्य यह है की इन दस जनो में दो लेडीज स्टाफ है। 

ज्ञानी जी का ज्ञान.... जहां मन पहुंच जाता है, वहां धर्म नहीं है

एक मुसलमान फकीर हुआ—हाजी मोहम्मद। साधु पुरुष था। एक रात उसने सपना देखा कि वह मर गया है और एक चौराहे पर खड़ा है, जहां से एक रास्ता स्वर्ग को जाता है, एक नरक को; एक रास्ता पृथ्वी को जाता है, एक मोक्ष को। चौराहे पर एक देवदूत खड़ा है—एक फरिश्ता, और वह हर आदमी को उसके कर्मों के अनुसार रास्ते पर भेज रहा है।

हाजी मोहम्मद तो जरा भी घबडाया नहीं; जीवनभर साधु था। हर दिन की नमाज पांच बार पूरी पढ़ी थी। साठ बार हज की, इसलिए हाजी मोहम्मद उसका नाम हो गया। अकड़कर जाकर द्वार पर खड़ा हो गया देवदूत के सामने। 
देवदूत ने कहा, ‘हाजी मोहम्मद! ‘ देवदूत ने इशारा किया, ‘नरक की तरफ यह रास्ता है।’ 
हाजी मोहम्मद ने कहा, ‘ आप समझे नहीं शायद। कुछ भूल—चूक हो रही है। साठ बार हज किये हैं।’

देवदूत ने कहा, ‘वह व्यर्थ गयी; क्योंकि जब भी कोई तुमसे पूछता तो तुम कहते, हाजी मोहम्मद! तुमने उसका काफी फायदा जमीन पर ले लिया। तुम बड़े अकड़ गये उसके कारण। कुछ और किया है?’
हाजी मोहम्मद के पैर थोडे डगमगा गये। जब साठ बार की हज व्यर्थ हो गयी, तो अब आशा टूटने लगी। उसने कहा, ‘ही, रोज पांच बार की नमाज पूरी—पूरी पढ़ता था।’ 
उस देवदूत ने कहा, ‘वह भी व्यर्थ गयी; क्योंकि जब कोई देखने वाला होता था तो तुम जरा थोड़ी देर तक नमाज पढ़ते थे। जब कोई भी न होता तो तुम जल्दी खत्म कर देते थे। तुम्हारी नजर परमात्मा पर नहीं थी; देखने वालों पर थी। एक बार तुम्हारे घर कुछ लोग बाहर से आये हुए थे, तो तुम बड़ी देर तक नमाज पढ़ते रहे। वह नमाज झूठी थी। ध्यान में परमात्मा न था, वे लोग थे। लोग देख रहे है तो जरा ज्यादा नमाज, ताकि पता चल जाये कि मैं धार्मिक आदमी हूं—हाजी मोहम्मद; वह बेकार गयी; कुछ और किया है?’ 

अब तो हाजी मोहम्मद घबड़ा गया और घबड़ाहट में उसकी नींद टूट गयी। सपने के साथ जिंदगी बदल गयी। उस दिन से उसने अपने नाम के साथ हाजी बोलना बंद कर दिया। नमाज छिपकर पढ़ने लगा; किसी को पता भी न हो। 
गांव में खबर भी पहुंच गयी कि हाजी मोहम्मद अब धार्मिक नहीं रहा। कहते हैं कि नमाज तक बंद कर दी है! बुढ़ापे में सठिया गया है। लेकिन उसने इसका कोई खंडन न किया। वह चोरी छिपे नमाज पढ़ता। वह नमाज सार्थक होने लगी। कहते है, मरकर हाजी मोहम्मद स्वर्ग गया।

तुम्हारा मन प्रार्थना भी करेगा, तो भी प्रार्थना न होने देगा। तुम्हारा मन प्रार्थना से भी अहंकार को भरने लगेगा। अपने ध्यान की चर्चा मत करना, उसे छिपाना। उसे संभालना, जैसे कोई बहुमूल्य हीरा मिल गया हो और उसे तुम छिपाते हो, उछालते नहीं फिरते हो। संपदा को तुम गड़ा देते हो—ऐसे ही तुम ध्यान को गडा देना। उसकी तुम चर्चा मत करना। उससे तुम अहंकार मत भरने लगना। अन्यथा मन की बेल वहां भी पहुंच गयी और वह चूस लेगी। और जहां मन पहुंच जाता है, वहां धर्म नहीं है। और जहां मन नहीं पहुंचता, वहां धर्म है। मन बहिर्मुखता है। उसका ध्यान दूसरे पर होता है, अपने पर नहीं होता। ध्यान अंतर्मुखता है।

Jokes ................ Hindi ki shaadi hui

Indian puns:

Pankaj udhas dips his french fries in Afsauce.

Hindi ki shaadi hui, badi maatra mein log aaye.

A potato was interrogated by cops. After 3 hours of torture, it gave in an said 'Main batata hun, main batata hoon....'

What do you call drunk Pandavas?
High Five.

What does Barack Obama have for lunch?
Michelle pav.

When a bimbo looks in the mirror, what does she see?
Her pratibimbo

If Da Vinci was born in Kolkata, he would have been Vinci Da.

Thursday, 17 March 2016

Jokes .............. 3 Idiots part 2..... Rancho: *Smiling*

3 Idiots part 2.....
Rancho: *Smiling* 
Teacher: Aap muskura kyu rahe ho? 
Rancho: Bahot dino se Whatsapp me account banane ki ichha thi...aaj bana diya hai...bohot maza aa raha hai.
Teacher: Zyaada maza lene ki zarurat nai hai...
Tell me, what is a Post?
Rancho: Anything that is posted on Whatsapp is a Post, Sir.
Teacher: Can you please elaborate? 
Rancho: Sir...jo bhi Whatsapp pe log daalte hai post hai sir...
Ghumne gaye...photo daal diya! Post hai Sir.
Match dekha, score daal diya!
Post hai Sir...
Katrina ki pic se Ronaldo ki kick tak! Sab post hai sir!
Ek second me comment, ek second me reply!
Comment-reply...
Comment-reply... 
Teacher: Shut up! Account banake ye karoge? Comment-reply.. Comment-reply..?
Haan Chatur, tum batao.
Chatur: Pictures, texts or videos posted through mobile or tablet via different operating systems using internet on whatsapp is called a Post... 
Teacher: Excellent!
Rancho: Par sir maine bhi toh wahi bola seedhe shabdo mein...
Teacher: Seedhe shabdo me karna hai toh Facebook ya twitter ke pages pe account banao... 
Rancho: Par sir dusre sites bhi toh...
Teacher: Get out! 
Rancho: Why sir?
Teacher: Seedhe shabdo me bahar jaiye.
Rancho goes out and comes back.
Teacher: Kya hua?
Rancho: Kuch bhool gaya tha sir.
Teacher: Kya?
Rancho: A utility button given to us, to protect our private data i.e. pictures, messages or personal information for being stolen or used for bad purpose by hackers or anyone else...
Teacher: Arre, kehna kya chaahte ho!?!?
Rancho: Logout sir! Logout karna bhool gaya tha. 
Teacher: Toh seedha seedha nahi bol sakte the?!
Rancho: Thodi der pehle try kiya tha sir, Aapko pasand nahi aaya...





Jaldi forward karo, market mein naya hein
 

ज्ञानी जी का ज्ञान............... अहंकार

एक नगर में एक जुलाहा रहता था। वह स्वाभाव से अत्यंत शांत, नम्र तथा वफादार था। उसे क्रोध तो कभी आता ही नहीं था।
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एक बार कुछ लड़कों को शरारत सूझी। वे सब उस जुलाहे के पास यह सोचकर पहुँचे कि देखें इसे गुस्सा कैसे नहीं आता ?
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उन में एक लड़का धनवान माता-पिता का पुत्र था। वहाँ पहुँचकर वह बोला यह साड़ी कितने की दोगे ?
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जुलाहे ने कहा - दस रुपये की।
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तब लडके ने उसे चिढ़ाने के उद्देश्य से साड़ी के दो टुकड़े कर दिये और एक टुकड़ा हाथ में लेकर बोला - मुझे पूरी साड़ी नहीं चाहिए, आधी चाहिए। इसका क्या दाम लोगे ?
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जुलाहे ने बड़ी शान्ति से कहा पाँच रुपये।
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लडके ने उस टुकड़े के भी दो भाग किये और दाम पूछा ? जुलाहा अब भी शांत था। उसने बताया - ढाई रुपये। लड़का इसी प्रकार साड़ी के टुकड़े करता गया।
अंत में बोला - अब मुझे यह साड़ी नहीं चाहिए। यह टुकड़े मेरे किस काम के ?
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जुलाहे ने शांत भाव से कहा - बेटे ! अब यह टुकड़े तुम्हारे ही क्या, किसी के भी काम के नहीं रहे।
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अब लडके को शर्म आई और कहने लगा - मैंने आपका नुकसान किया है। अंतः मैं आपकी साड़ी का दाम दे देता हूँ।
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संत जुलाहे ने कहा कि जब आपने साड़ी ली ही नहीं तब मैं आपसे पैसे कैसे ले सकता हूँ ?
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लडके का धनभिमान जागा और वह कहने लगा कि ,मैं बहुत अमीर आदमी हूँ। तुम गरीब हो। मैं रुपये दे दूँगा तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा,पर तुम यह घाटा कैसे सहोगे ? और नुकसान मैंने किया है तो घाटा भी मुझे ही पूरा करना चाहिए।
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संत जुलाहा मुस्कुराते हुए कहने लगे - तुम यह घाटा पूरा नहीं कर सकते। सोचो, किसान का कितना श्रम लगा तब कपास पैदा हुई। फिर मेरी स्त्री ने अपनी मेहनत से उस कपास को बीना और सूत काता। फिर मैंने उसे रंगा और बुना। इतनी मेहनत तभी सफल हो जब इसे कोई पहनता, इससे लाभ उठाता, इसका उपयोग करता। पर तुमने उसके टुकड़े-टुकड़े कर डाले। रुपये से यह घाटा कैसे पूरा होगा ? जुलाहे की आवाज़ में आक्रोश के स्थान पर अत्यंत दया और सौम्यता थी।
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लड़का शर्म से पानी-पानी हो गया। उसकी आँखे भर आई और वह संत के पैरो में गिर गया।
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जुलाहे ने बड़े प्यार से उसे उठाकर उसकी पीठ पर हाथ फिराते हुए कहा -
बेटा, यदि मैं तुम्हारे रुपये ले लेता तो है उस में मेरा काम चल जाता। पर तुम्हारी ज़िन्दगी का वही हाल होता जो उस साड़ी का हुआ। कोई भी उससे लाभ नहीं होता।साड़ी एक गई, मैं दूसरी बना दूँगा। पर तुम्हारी ज़िन्दगी एक बार अहंकार में नष्ट हो गई तो दूसरी कहाँ से लाओगे तुम ?तुम्हारा पश्चाताप ही मेरे लिए बहुत कीमती है l

ज्ञानी जी का ज्ञान.....,थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफ़िर; मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा...!!

Very .nice line...
एक ट्रक में मारबल का सामान जा रहा था, 
उसमे टाईल्स भी थी , और 
भगवान की मूर्ती भी थी ...!!
रास्ते में टाईल्स ने मूर्ती से पूछा ..  
"भाई ऊपर वाले ने हमारे साथ ऐसा भेद-भाव क्यों किया है?"
मूर्ती ने पूछा, "कैसा भेद भाव?"
टाईल्स ने कहा,
"तुम भी पथ्थर मै भी पथतर ..!!
तुम भी उसी खान से निकले , 
मै भी..
तुम्हे भी उसी ने ख़रीदा बेचा , मुझे भी..
तुम भी मन्दिर में जाओगे, मै भी ...
पर वहां तुम्हारी पूजा होगी ...
और मै पैरो तले रौंदा जाउंगा.. ऐसा क्यों?"
मूर्ती ने बड़ी शालीनता से जवाब दिया,
"तुम्हे जब तराशा गया,
तब तुमसे दर्द सहन नही हुवा;
और तुम टूट गये टुकड़ो में बंट गये ...
और मुझे जब तराशा गया तब मैने दर्द सहा,
मुझ पर लाखो हथोड़े बरसाये गये , 
मै रोया नही...!!
मेरी आँख बनी, कान बने, हाथ बना, पांव बने..
फिर भी मैं टूटा नही .... !!
इस तरहा मेरा रूप निखर गया ...
और मै पूजनीय हो गया ... !!
तुम भी दर्द सहते तो तुम भी पूजे जाते..
मगर तुम टूट गए ...
और टूटने वाले हमेशा पैरों तले रोंदे जाते है..!!"
# मोरल #
भगवान जब आपको तराश रहा हो तो, 
टूट मत जाना ...
हिम्मत मत हारना ...!!
अपनी रफ़्तार से आगे बढते जाना, 
मंजिल जरूर मिलेगी .... !!
सुन्दर पंक्तियाँ:
मुश्किलें केवल बहतरीन लोगों 
के हिस्से में ही आती हैं...
क्यूंकि वो लोग ही उसे बेहतरीन 
तरीके से अंजाम देने की ताकत
रखते हैं..!!
"रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा;
प्यासे के पास चलकर समंदर भी
आयेगा..!
थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफ़िर;
मंजिल भी मिलेगी और 
जीने का मजा भी आयेगा...!!"

Tuesday, 15 March 2016

विजय माल्या jokes series No 4 .............किंगफिशर वाले बाबू मेरा लोन चुका दे

 अब ये अफवाह
कौन फैला रहा है कि
विजय माल्या का कर्जा
Admin  चुकाने वाला है
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कुछ काम था ...SBI बैंक में फ़ोन किया अभी ..... अजीब सी कॉलर ट्यून लगा रखी है उन्होंने
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किंगफिशर वाले बाबू मेरा लोन चुका दे
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किंगफिशर वाले बाबू मेरा लोन चुका दे
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कन्हैया से लेकर माल्या तक
सब इंतज़ार कर रहे हैं...
आपके पैसे पर पलने का !
अपना टैक्स आज ही जमा कराएं !!
- आयकर विभाग.
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❗विजय मल्ल्या वो पहेला इंसान है।
❗जो कर्ज चुकाने हेतु जिसने आत्महत्या नही किया।
❗बल्कि बैंक वालो को आत्महत्या करने पर मजबूर किया.
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When a person dies, his spirit leaves and his body is left behind.
But as a special one time phenomenon, which has created history,
.....
....
...
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Vijay Mallya's 'Body' has 'left', and his 'Spirit' is 'left behind' .
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This is really confusing !!!!
Person who manufactured the  liquor is in debt...
Gov't who taxed the liquor heavily is also in debt
People who drink the liqour are also in debt....
Then where is the money .
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 Went to an SBI branch and found it freshly painted - all in white. Felt good.
Asked branch manager if he initiated the renovation.
He said, "Nahi sir, Vijay Mallya chuna laga gaya!".
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ग्राहक :- एक गोल्ड फ्लैक देना.......!
दुकानदार:-देते हुए, 1200रु उधार हो गए है.....!
ग्राहक :- हाँ तो, ..........
मै कौन सा माल्या हूँ जो भाग जाऊँगा.......!
दुकानदार:- मै कौनसा SBI बैंक हूँ जो उधार देता
रहूँगा.................!.
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आज का ज्ञान
अगर आपका लोन 3 करोड़ का है , तो
ये आपकी समस्या है ...!
अगर आपका लोन 300 करोड़ का है , तो
ये बैंक की समस्या है ...!!
और अगर आपका लोन 30000 करोड़ का है , तो
ये सरकार की समस्या है ...!!!
   #बड़ा सोचो ...बड़ा लोन लो
- माल्या का पार्टनर.
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एंडरसन भोपाल में सेंकडो की जान ले कर और हजारों को अँधा बनाकर भाग गया...
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दाऊद बम धमाके करके भाग गया...
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नदीम गुलशन  की हत्या कर के भाग गया....
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ललित करोड़ो रु का चुना लगाके भाग गया....
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विजय
बैंको के नो हजार करोड़ ले के भाग गया ...
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लिस्ट ओर भी लंबी है ...l
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लेकिन हम पकड़ेंगे
उन्हें जो .....
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.sonography वाले डाँक्टर
.f  form  मे   minor  clerical  mistake करते है!
 

ज्ञानी जी का ज्ञान.................जीवन एक यात्रा है..........& ............मैं तो अपने जीवन से संतुष्ट हूँ

 जीवन एक यात्रा है...

और इस यात्रा में हम अकेले यात्री नहीं है,बल्कि हमारे रिश्तेदार,मित्र संबंधी आदि भी हमारे साथ सहयात्री हैं।


जिनमें कुछ सहयात्री ऐसे हैं,जो हमारी यात्रा में हमारे सहयोगी बन हमारी इस यात्रा को मनोरंजक और सरल बना देते हैं।

लेकिन कुछ यात्री ऐसे भी होते हैं जो हमारे विरोधी बन ना केवल इस यात्रा में बाधक बनते हैं ,बल्कि आगे बढ़ने से भी रोकते हैं ।

ऐसे समय में ऐसे सहयात्रियों का सामना कर अपनी यात्रा में विघ्न डालने की बजाय , उन से किनारा कर उनके प्रति शुभ भावना रखते हुए अपनी जीवन यात्रा पर निरंतर आगे बढ़ते रहना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए ।

जैसे यदि हम सड़क पर चल रहे हैं सामने से एक स्कूटर सवार आ रहा है।वह बार-बार स्कूटर को कभी इधर कभी उधर करता हुआ चल रहा है।उसकी इन हरकतो को देख कर हमारे मन में यही विचार आएगा कि शायद इस व्यक्ति का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है । इसका कोई भरोसा नहीं,कही यह हमें नुकसान ही ना पहुंचा दे।यह सोचकर बजाए हम उससे उलझने के, हम अपने सुरक्षा पर ध्यान देते हैं ।और सड़क छोड़कर एक किनारे पर खड़े हो जाते हैं । उसके निकलते ही हम चैन की सांस लेते हैं ।तो जैसे यहां हमने उस व्यक्ति का सामना करने की बजाए उससे किनारा करना उचित समझा । क्योंकि हम जानते थे कि ऐसे व्यक्ति का सामना करना अपना ही नुकसान करना है ।

ऐसे ही जीवन यात्रा में चलते हुए भाव स्वभाव की टकराहटो से स्वयं को बचा सुरक्षित रखना बहुत जरुरी है । तभी यात्रा आनंदमय हो सकती है ।" "बात अच्छी हो तो उसकी हर जगह चर्चा करो, बुरी हो तो मन में रखो

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एक दिन सुबह पार्क में हरिनाम जप करते समय एक जानकार बूढ़े व्यक्ति ने व्यंगात्मक लहजे में कहा,"बेटा ये उम्र माला करने की नहीं मेहनत करके खाने कमाने और जिम्मेदारी उठाने की है। ये काम तो फिलहाल बुढ़ापे के लिए छोड़ दो।"

मैंने पूछा,"आप कितनी माला करते हैं ?"

वो सकपकाकर बोले,"मैं नहीं करता मैं तो अपने जीवन से संतुष्ट हूँ। "

मैंने कहा,"संतुष्ट तो गधा भी होता है जीवन से क्योंकि वो जानता ही नहीं की संतुष्टि का अर्थ क्या है। वो सोचता है की दिन भर मेहनत करके शाम को २ सूखी रोटी मिल जाना ही संतुष्टि है। उसको नहीं पता की अगर वो मालिक के चुंगल से निकल जाए तो सारे हरे भरे मैदान उसके लिए मुफ्त उपलब्ध हैं।

इसलिए गधे सामान व्यक्ति ही बिना भक्ति के जीवन में संतुष्टि महसूस कर सकता है। क्योंकि उसको नहीं पता कि जन्म मृत्यु बुढ़ापे और बीमारियों से रहित इस भौतिक जीवन से परे एक नित्य शाश्वत जीवन भी है जहाँ हमारा परम पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण से सीधा सम्बन्ध है और वहां जन्म मृत्यु बुढ़ापा और बीमारियां भी नहीं होते।

वो जाने लगे तो मैंने पुकार कर कहा बाबा जी," बुढ़ापे तक जीवित रहेंगे इसका कोई गारंटी कार्ड तो है नहीं और जब जवानी में भगवान में मन नहीं लगाया तो बुढ़ापे में कैसे मन लगेगा ? और रही बात खाने कमाने की तो भक्त लोग कर्म से नहीं भागते वे तो उल्टा एक आम नागरिक से ज्यादा कर्मशील होते हैं क्योंकि वो सबसे बड़े समाज-सेवी होते हैं। वो खुद का जन्म भी सार्थक करते हैं और दूसरों का भी मार्ग दर्शन करते हैं।

मैं कृष्ण का चिंतन करता हूँ और वो मेरे जीवन यापन का चिंतन करेंगे यह पूर्ण विश्वास है मुझे।

RSS और ISIS की एक समान तुलना करने पर गुलाम नबी आज़ाद को जवाब देती नई कविता

RSS और ISIS की एक समान तुलना करने पर गुलाम नबी आज़ाद को जवाब देती नई कविता

-कवि गौरव चौहान

केसर की क्यारी में उपजा पौधा एक विषैला है,
ये गुलाम आज़ाद नबी तो बगदादी का चेला है,

सन् सैतालिश में ही भारत भाग्य लगा था फूट गया,
बटवारे के बाद यहाँ ये कूड़ा करकट छूट गया,

कूड़ा तो कूड़ा होता है बदबू को फैलाया है,
गोबर में जन्मे कीड़ों ने अपना मुख दिखलाया है,

जिनके ज़हनों में लटके अंधे मज़हब के ताले हैं,
स्वयं सेवकों को वो दहशतगर्द बताने वाले हैं,

निश्छल त्याग तपस्या व्रत को हिंसक छल से तौला है,
गंदे नालों के पानी को गंगाजल से तौला है,

तौल दिया तुमने वृक्षों को आरी और कटारी से,
भस्मासुर की तुलना कर दी चक्र सुदर्शन धारी से,

संघ,जहाँ पर मानव सेवा पाठ पढ़ाया जाता है,
संघ,जहाँ पर देश धर्म का सबक सिखाया जाता है,

संघ,जहाँ पर नारी को देवी सा माना जाता है,
संघ,जहाँ पर निज गौरव पर सीना ताना जाता है,

संघ जहाँ पर फर्क नही है हिन्दू या इस्लामी में,
एक नज़र से सेवा करते बाढ़ और सूनामी में,

संघी वो है,जिसने भू पर बीज पुण्य का बोया है,
काश्मीर-केदारनाथ के भी घावों को धोया है,

महामारियों में रोगी की छूकर सेवा करते हैं,
संघी वो हैं जो भारत की खातिर जीते मरते हैं,

इनकी तुलना कैसे कर दी,रक्त चाटने वालों से,
नन्हे मुन्हे मासूमों के शीश काटने वालों से,

नारी को अय्याशी का सामान बनाने वालों से,
बाज़ारो में इज़्ज़त को नीलाम कराने वालों से,

तुमने घर की तुलसी को विषबेल बताया,शर्म करो,
भगवा का काले झंडे से मेल बताया,शर्म करो,

अब गौरव चौहान कहे,ये सोच कहाँ से पाले हैं,
लगता है इनके दिमाग में कीड़े पड़ने वाले है,

ऐ गुलाम, मत मिटटी फेंको आज दिये की बाती पर,
वर्ना भगवा लहराएगा, मियां तुम्हारी छाती पर,

------कवि गौरव चौहान

Monday, 14 March 2016

ज्ञानी जी का ज्ञान........., धन की परिभाषा

A.मानव का सफर पत्थर से शुरु हुआ था। पत्थरों को ही महत्व देता है और आज पत्थर ही बन कर रह गया -

1. चूहा अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(गणेश की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित चूहा दिख जाये तो पिंजरा लगाता है और चूहा मार दवा खरीदता है।

2.सांप अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(शंकर का कंठहार मानकर)
लेकिन जीवित सांप दिख जाये तो लाठी लेकर मारता  है और जबतक मार न दे, चैन नही लेता।

3.बैल अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(शंकर की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित बैल(सांड) दिख जाये तो उससे बचकर चलता है ।

4.कुत्ता अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(शनिदेव  की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित कुत्ता दिख जाये तो 'भाग कुत्ते' कहकर अपमान करता है।

5. शेर अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(दुर्गा  की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित शेर दिख जाये तो जान बचाकर भाग खड़ा होता है।
हे मानव!
पत्थर से इतना लगाव क्यों और जीवित से इतनी नफरत क्यों?????
ये कैसा दोहरा मापदंड है तेरा?????


B.धन की परिभाषा:
जब कोई बेटा या बेटी ये कहे कि मेरे माँ बाप ही मेरे भगवान है ... ये है "धन"

जब कोई माँ बाप अपने बच्चों के लिए कि ये हमारे कलेजे की कोर है .....ये है "धन"

शादी के 20 साल बाद भी अगर पति पत्नी एक दूसरे से कहे
I Love You..... ये है "धन"

कोई सास अपनी बहू के लिए कहे ये मेरी बहु नहीं बेटी है और कोई बहू अपनी सास के लिए कहे ये मेरी सास नहीं मेरी माँ है..... ये है "धन"

जिस घर में बड़ों को मान और छोटो को प्यार भरी नज़रों से देखा जाता हो ... ये है "धन"

जब कोई अतिथि  कुछ दिन आपके घर रहने के पश्चात् जाते समय दिल से कहे आपका घर ....घर नहीं एक मंदिर है ..... ये है धन

मैं " ये दुआ करता हूँ कि आपको     ऐसे "परम धन"  की प्राप्ति हो ।

Vijay Mallya Jokes Part 3 .................. प्रिय विजय माल्या, तुम कहीं भी हो लौट आओ...

 प्रिय विजय माल्या,
तुम कहीं भी हो लौट आओ...
कोई कुछ नहीं कहेगा
तुम्हारी याद में तुम्हारी कैलेंडर गर्ल्स ने खाना पीना छोड़ दिया है.....
सारे बैंक बुक्का फाड़ के रो रहें हैं...
सीबीआई परेशान है...
देश हतप्रभ है...
बेवड़ा लोगों ने दारु पीना छोड़ दिया है...
आजतक किसी घोटालेबाज़ का कुछ हुआ है
जो तुम्हारा कोई बाल भी बांका कर पायेगा...
लौट आओ मुन्ना....!!!!
                                    
तुम्हारा बड़ा भाई 
सुब्रातोराय सहारा
From तिहाड़ जेल
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 As per the laws of Physics;
Generally a liquid drowns and the air lifts anything.
But Mallya was lifted by liquid and drowned by air.
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माल्या कांड का सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि उसने मरीज़ोंको ये बोलने लायक नहीं छोड़ा कि...........
"डॉक्टर साहब दे देंगे आपके पैसे , कहीं भागे थोड़ी जा रहे हैं"।
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 Suna hai Vijay Mallya bhaag gaya...
Ab paise to vasool nahi sakte, 
Kam se kam Siddhartha Mallya ke haath pe tattoo hi bana do....
"Mera baap chor hai"
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Vijay Mallya loots India of 9000 crores. !
Sharad Pawar's reaction - LOL ! चिल्लर चोर......
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Warning !
All msg's on Vijay Mallya will be charged @ Rs6 by the Govt of India in order to recover the unpaid 9000cr.
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अब ये अफवाह
कौन फैला रहा है कि
विजय माल्या का कर्जा
Admin  चुकाने वाला है
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कुछ काम था ...SBI बैंक में फ़ोन किया अभी ..... अजीब सी कॉलर ट्यून लगा रखी है उन्होंने
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किंगफिशर वाले बाबू मेरा लोन चुका दे
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किंगफिशर वाले बाबू मेरा लोन चुका दे
 

Sunday, 13 March 2016

ज्ञानी जी का ज्ञान........


1 दिन एक राजा ने अपने 3 मन्त्रियो को दरबार में  बुलाया, और  तीनो  को  आदेश  दिया  के  एक  एक  थैला  ले  कर  बगीचे  में  जाएं ..,
और
वहां  से  अच्छे  अच्छे  फल  (fruits ) जमा  करें .
वो  तीनो  अलग  अलग  बाग़  में प्रविष्ट  हो  गए ,
पहले  मन्त्री  ने  कोशिश  की  के  राजा  के  लिए  उसकी पसंद  के  अच्छे  अच्छे  और  मज़ेदार  फल  जमा  किए जाएँ , उस ने  काफी  मेहनत  के  बाद  बढ़िया और  ताज़ा  फलों  से  थैला  भर  लिया ,
दूसरे मन्त्री  ने  सोचा  राजा  हर  फल  का परीक्षण  तो करेगा नहीं , इस  लिए  उसने  जल्दी  जल्दी  थैला  भरने  में  ताज़ा , कच्चे , गले  सड़े फल  भी  थैले  में  भर  लिए , 
तीसरे  मन्त्री  ने  सोचा  राजा  की  नज़र  तो  सिर्फ  भरे  हुवे थैले  की  तरफ  होगी  वो  खोल  कर  देखेगा  भी  नहीं  कि  इसमें  क्या  है , उसने  समय बचाने  के  लिए  जल्दी  जल्दी  इसमें  घास , और  पत्ते  भर  लिए  और  वक़्त  बचाया .
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दूसरे  दिन  राजा  ने  तीनों मन्त्रियो  को  उनके  थैलों  समेत  दरबार  में  बुलाया  और  उनके  थैले  खोल  कर  भी  नही देखे  और  आदेश दिया  कि , तीनों  को  उनके  थैलों  समेत  दूर  स्थान के एक जेल  में  ३  महीने  क़ैद  कर  दिया  जाए .
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अब  जेल  में  उनके  पास  खाने  पीने  को  कुछ  भी  नहीं  था  सिवाए  उन  थैलों  के ,
तो  जिस मन्त्री ने  अच्छे  अच्छे  फल  जमा  किये  वो  तो  मज़े  से  खाता  रहा  और  3 महीने  गुज़र  भी  गए ,
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फिर  दूसरा  मन्त्री जिसने  ताज़ा , कच्चे  गले  सड़े  फल  जमा  किये  थे,  वह कुछ  दिन  तो  ताज़ा  फल  खाता  रहा  फिर  उसे  ख़राब  फल  खाने  पड़े , जिस  से  वो  बीमार  होगया  और  बहुत  तकलीफ  उठानी  पड़ी .
और  तीसरा मन्त्री  जिसने  थैले  में  सिर्फ  घास  और  पत्ते  जमा  किये  थे  वो  कुछ  ही  दिनों  में  भूख  से  मर  गया .
....अब  आप  अपने  आप  से  पूछिये  कि  आप  क्या  जमा  कर  रहे  हो  ??

आप  इस समय जीवन के  बाग़  में  हैं , जहाँ  चाहें  तो  अच्छे कर्म जमा  करें ..
चाहें  तो बुरे कर्म ,
मगर याद रहे जो आप जमा करेंगे वही आपको आखरी समय काम आयेगा  क्योंकि दुनिया क़ा राजा आपको चारों ओर से देख रहा है  ।