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Monday, 29 February 2016

दारू बेचने वाला कही नही जाता , पर दूध बेचने वाले को घर , गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है


आज की बात .............. दारू बेचने वाला कही नही जाता ,पर दूध बेचने वाले को घर ,गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है 


1 कोयल अपनी भाषा बोलती है;
इसलिये आज़ाद रहती हैं...
परन्तु,
तोता दूसरे कि भाषा बोलता है;
इसलिए पिंजरे में जीवन भर गुलाम
रहता है...

"अपनी भाषा, अपना धर्म और अपने आप पर विश्वास करो"।।
मेरी भाषा, मेरा धर्म, मेरा अपना आप मेरा अपना स्वरूप का अनुभव है



2 जिम्मेदारियां मजबूर कर देती हैं, अपना "शहर" छोड़ने को !!
वरना कौन अपनी गली में,
जीना नहीं चाहता ।।।



3 एक वक्त ऐसा था..दोस्त बोलते थे-
"चलो,मिलकर कुछ प्लान बनाते हैं"
और अब बोलते है-"चलो मिलने का कोई प्लान बनाते है......



4 व्यवहार मीठा ना हों तो... हिचकियाँ भी नहीं आती,
बोल मीठे न हों तो कीमती... मोबाईलो पर घन्टियां भी नहीं आती।
घर बड़ा हो या छोटा, अग़र मिठास ना हो,
तो ईंसान तो क्या, चींटियां भी नजदीक नहीं आती।



5 जीवन का 'आरंभ' अपने रोने से होता हैं..,
और 
जीवन का 'अंत' दूसरों के रोने से,
इस "आरंभ और ...अंत" के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो...
बस यही सच्चा जीवन है...!!!



6 हे प्रभु
न किसी का फेंका हुआ मिले,
न किसी से ..छीना हुआ मिले,
मुझे बस मेरे.. नसीब मे लिखा हुआ मिले,
ना मिले ये भी तो कोई ग़म नही
मुझे बस मेरी मेहनत का किया हुआ मिले..



7 बिंदी 1 रुपये की आती है व ललाट पर लगायी जाती है।
पायल की कीमत ...हजारों में आती है पर पैरों में पहनी जाती है।
इन्सान आदरणीय अपने कर्म से होता है, उसकी धन दौलत से नहीं।



8 बस इतना देना.. मेरे मालिक अगर जमींन पर बैठूँ
तो लोग उसे मेरा ...बड़प्पन कहें मेरी ओकात नहीं....



9 एक किताबघर में पड़ी गीता और कुरान आपस में कभी नहीं लड़ते,
और जो उनके लिए लड़ते हैं वो कभी उन दोनों को नहीं पढ़ते....



10 अच्छे मार्ग पर कोई व्यक्ति नही जाता पर बुरे मार्ग पर सभी जाते है......
.इसीलिये दारू बेचने वाला कही नही जाता ,
पर दूध बेचने वाले को घर ,
गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है ।और दूघ वाले से बार -बार पूछा जाता है कि पानी तो नही डाला ?
पर दारू मे खुद हाथो से पानी मिला-मिला पीते है ।वाह रे दुनियाँ और दुनियाँ की रीत ।....









Sunday, 28 February 2016

Jokes ......बीवी से झगडे करने के फायदे..

बीवी से झगडे करने के फायदे.. 

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1. नींद में कोई व्यवधान नहीं आता : सुन रहे हो क्या, लाइट बंद करो, पंखा बंद करो, चादर इधर दो, इधर मुह करो, टाइप कुछ भी बाते नहीं होती
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 2. पैसे की बचत : जब बीवी से झगड़ा हुआ रहता है इस दौरान बीवी पैसे नहीं मांगती, 
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 3. तनाव से मुक्ति : झगड़े के दैरान बातचीत बंद होती है जिससे किचकिच कम होती है और पति तनाव से मुक्त रहता है, 
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 4. आत्मनिर्भरता आती है : जो अपना काम आप कर सकते हैं वो इसलिए नहीं करते कि बीवी कर देती है, झगड़े के बाद वो छोटे मोटे काम (खुद ले कर पानी पीना, नहाने के बाद अपने कपडे खुद निकालना, अपने लिए खुद चाय बनाना) खुद कर के आदमी आत्मनिर्भर हो जाता है, 
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 5. काम में व्यवधान नहीं होता : झगडे के दौरान काम के समय आपको बीवी के फ़ालतू कॉल (जानू क्या कर रहे हो, मन नहीं लग रहा है, आज बहुत गर्मी है, इस प्रकार के) नहीं आते, जिससे आप अपने काम में ध्यान केंद्रित कर सकते है 
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 6. घर जल्दी जाने की चिंता से मुक्ति : ( अधिकांश पतियो को काम के बाद जल्दी घर आने के लिए घर से बारम्बार फ़ोन आते है मगर एक बार झगड़ा हो जाने के बाद आप कुछ दिन तक इस चिंता से दूर रह सकते है, 
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 7. आप का मूल्य बढ़ता है : ये इंसान का मनोविज्ञान है कि जो चीज नहीं होती उसके मूल्य का अहसास तभी होता है, झगडे के दौरान बीवी को आपकी मूल्य का अहसास होता है 
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8. प्यार बढ़ता है : आपस में झगडे से प्यार बढ़ता है, क्योकि अक्सर देखा गया है एक बार बारिश हो जाए तो मौसम सुहाना हो जाता है..
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और भी फायदे हैं.
मगर समयाभाव के कारण लिखना मुश्किल है.
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तो आइये प्रण लें कि आज के बाद हम सभी पति महीने में एक न एक बार अपनी बीवी से झगड़ा जरूर करेंगे (बीवी तो हमेशा तैयार रहती है) ताकि महीने में कुछ दिन पति लोग भी कुछ शांति से गुजार सकें.

पति हित में जारी.

Jokes .... लडके फेसबुक से क्यों ब्लॉक किये जाते है जानीए :

लडके फेसबुक से क्यों ब्लॉक
किये जाते है जानीए :


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लडका : तुम्हारा नाम क्या है ? 
लडकी : Palak और तुम्हारा ??
लडका : Paneer !!!
*BLOCKED!!!*
,
लडकी : Whats UP ? 
लडका : Uttar Pradesh


*BLOCKED!!!*
,
लडकी : तू सोया है...??
लडका : नहीं...! मूंगफली हूँ...


**BLOCKED!!!*
,
लडकी : See ya ! 
लडका : वर रामचंद्र की जय !


*BLOCKED!!!*
,
लडकी : Have a Good Day 
लडका : नो स्वीटी, थैंक यु... मुझे पार्ले जी पसंद है


*तुरंत BLOCKED!!!*
,
लडका: थैंक यु 
लडकी: माय प्लीज़र 
लडका: माय पल्सर !!
*BLOCKED!!!
,
AND THE BEST ONE 
,
झगड़ा होने के बाद 
लडकी : तुम तो मुझे मनाते ही नहीं 
लडका : तुम क्या हो ? होली हो ? 
दिवाली हो ? ईद हो ? 
जनम दिन हो? 
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BROKE FOREVER
लड़का :- कहां हो ??
लड़की :- तुम्हारे दिल में
लड़का :- वहां ओर लड़कियों के साथ लड़ाई तो नहीं कर रही 
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"कुछ इंग्लिश में गालियाँ भी दीं, खैर छोड़ो "
*Blocked"  




Jokes on recent India Pakistan match

 Breking पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन से चिंतित खड़गे जी ने बांग्लादेश सरकार से की पिच की CBI जांच की मांग........ निराश पाकिस्तानी समर्थकों का समर्थन करने JNU पहुंच सकते हैं काहुल बाबा.... खुजलीवाल दे सकते हैं समर्थन..... सूत्रों के हवाले से खबर.... बरखा दत्त ने की जंतर मंतर तक मोमबत्ती मार्च निकालने की घोषणा..... आमिर को नजर आई पिच में असहिष्णुता.....
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विशाल धरना प्रदर्शन
जंतर मन्तर दिल्ली में
कल भारत बंद..।




कांग्रेस का कहना है
की पाकिस्तान के साथ
अन्याय हुआ है उनको
पूरे ओवर क्यों नहीं
खिलाये...।
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 पाकिस्तान टीम में ख़ुशी की लहर....



सबको बैटिंग मिली .
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 Teacher: बच्चों चलो ABCD सुनाओ।
छात्र: B C D E G H I K M N O P Q R S T U V W X Y Z.
Teacher: AFJL कहा है ?
छात्र: हम सारे AFJL मारेंगे.. जिस घर से AFJL निकलेगा ।
(Note: छात्र कट्टर हिन्दू था)
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 अफज़ल हम शर्मिंदा हैं, 83 रन बनाकर भी ज़िंदा हैं।.
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पाकिस्तान की तो किस्मत ही खराब है..!!!
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साले
ना तो आतंकवादी चल रहे हैं और ना ही खिलाड़ी.!!
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पाकिस्तानी बल्लेबाज इसलिए भी डरे हुए है क्योंकि किसी ने बताया है कि मैच खत्म होने के बाद स्मृति जी का भाषण चलाया जायेगा.
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BREAKING: NDTV is Claiming That It Was A Doctored Live Telecast. India Hasn't Actually Won.
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और इस बीच खबर आ रही है कि राहुल गांधी ने पाकिस्तान टीम पर हो रहे इस तरह के अत्याचार के खिलाफ हड़ताल की घोषणा की है ।
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भारत पाकिस्तान मैच पर ndtv -
और इसी के साथ congress खेमे में सन्नाटा छा गया ।

केजरीवाल ने कहा पाकिस्तान की ऐसी हालात के पीछे MODI/ RSS का हाथ ||
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 नवाज शरीफ ने कहा है की ये मोदीजी की चाल है.......गोधरा कांड के बरसी वाले दिन हमारा मैच फसा दिया.......दंगे पर उतर आए भारतीय खिलाडी....... 








Jokes on recent India .......... India Pak Cricket match, Smiriti Irani, JNU, Reservation,

 आलिया भट्ट न फ़ोेन पर जाटों से पूछा की अगर आपको reservation चाहिए तो online करा लो। इसमें railway track उखाड़ने की क्या जरूरत है?
….कुछ जाटअभी तक सदमे में है.
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बगुले की चोंच में हीरा,
ऊँट के मुँह में जीरा।
बन्दरों के पास कार,
गधों के हाथ में सरकार।...

कैसे-कैसे कारनामे हो रहे हैं,
और आप रजाई ओढ़ के सो रहे हैं।

राहुल गांधी आज जो भी है
वो पुरखो की वजह से है ।
और अरविन्द केजरीवाल जो भी है वो मुर्खों की वजह से है।

शेर मारने निकले थे.. मरती नहीं बिल्ली।
खाँसी ठीक होती नहीं.. ठीक करेंगे दिल्ली...

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मैच पर नेताओ के ट्वीट"
ये 125 करोड़ भारतवासियो की जीत हैं -
मोदी जी
पाकिस्तानी टीम, टीम नही एक सोच हैं -
राहुल बाबा
धोनी और अंपायर मिले हुए हे जी-
केजरी
इस जीत पे मुसलमानो का पहला हक़ है
मुलायम सिंह
अंपायर हटाओ हम 15 मिनिट में सबको
आउट कर देंगे
-ओवेसी
क्या मैच में कोई दलित अंपायर था
"मायावती"

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 डॉक्टर केहेते हैं कि बच्चे की दिमाग का 90% बिकास 5 साल की उम्र तक हो जाता हैं| और कांग्रेस वालों ने अभी तक उम्मीद पlल राखी हैं| .
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कल तक वो बोल रहे थे " स्म्रिती ईरानी तो आठवीं पास ही है |"
कल भाषण के बाद आज बोल रहे हैं "शुक्र है वो आठवीं पास ही है | "
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सर्फ ऐक्सल वाले स्मृति ईरानी जी के घर पहुंचे गये ... अपनी कम्पनी का ब्रांड एंबेसडर बनाने के लिए ... बोले....
"मैडम, बड़ी तबीयत से धोती हैं आप तो...
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लोकसभा में स्मृति ईरानी के चंडी रूप ने सबसे ज्यादा मोदी और राहुल को अचंभित किया। 
बाकी विवाहित लोग तो औरत का ये रूप रोज अपने घरों में देखते ही रहते हैं।.
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भारत-पाक मैच की पूर्व संध्या में लगे पाकिस्तान में नारे।
"TV तेरे टुकड़े होंगे इंशल्लाह इंशल्लाह!" 
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पाकिस्तानी ड्रेसिंग रूम में भारी मंथन, मैच के बाद पकिस्तान वापस जाये, या फिर घर वापसी करे.
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 प्रोफ़ेसर(स्टूडेंट से) : तुम क्लास में बैठकर शराब नही पी सकते ।
स्टूडेंट-- सर, मै दलित हूँ।
प्रोफ़ेसर-- ओह सॉरी, कुछ स्नैक्स नमकीन मंगवा दूँ ?
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 ..जे एन यू में कश्मीर की आजादी की मांग करने वाले वामपंथी लकड़बग्घे कन्हैया कुमार ने थाने में चीख़ चीख़ कर कश्मीर को भारत का अभिन्नं अंग स्वीकार किया है, और उसे भारत के संविधान में भी अटूट विश्वास हो गया है जिसका की उसकी वामपंथी पार्टी हमेशा से ख़िलाफ़त करती आई है..
..उसका ये कायाकल्प एवम् उसके विचारों में क्रांतिकारी परिवर्तन का श्रेय केवल एवम् केवल श्री लट्ठ देव को जाता है..
..मानव की तो बिसात क्या, जिसके सामने भूत एवम् प्रेत इत्यादि भी नृत्य करने को विवश हो जाते है, ऐसे सर्व समस्या निवारक, परम पूज्यनीय एवम् आदरणीय श्री लट्ठ देव को कोटि कोटि नमन..
..श्री लट्ठ देव की महिमा अपरम्पार है..वे परम शक्तिशाली हैं..उनके आवाहन मात्र से कठिन एवम् दुष्कर समस्यायाओं का निवारण एवम् समाधान क्षण भंगुर में हो जाता है..आइये समस्त भक्त गण श्री लट्ठ देव की अटूट महिमा का गुणगान एवम् जय जयकार करते हुए सामूहिक प्रार्थना स्वर में उचारे:
..रहिमन लट्ठ राखिये सरसों तेल पियाय;
..ना जाने किस मोड़ पर 'देशद्रोही' मिल जाय..
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.Breking पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन से चिंतित खड़गे जी ने बांग्लादेश सरकार से की पिच की CBI जांच की मांग........ निराश पाकिस्तानी समर्थकों का समर्थन करने JNU पहुंच सकते हैं काहुल बाबा.... खुजलीवाल दे सकते हैं समर्थन..... सूत्रों के हवाले से खबर.... बरखा दत्त ने की जंतर मंतर तक मोमबत्ती मार्च निकालने की घोषणा..... आमिर को नजर आई पिच में असहिष्णुता.....
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 विशाल धरना प्रदर्शन
जंतर मन्तर दिल्ली में
कल भारत बंद..।
कांग्रेस का कहना है
की पाकिस्तान के साथ
अन्याय हुआ है उनको
पूरे ओवर क्यों नहीं
खिलाये...।
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पाकिस्तान टीम में ख़ुशी की लहर....
सबको बैटिंग मिली .
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 आज़ादी के बाद से हमारे देश में सिर्फ 1 चीज ऐसी है
जिस पर महंगाई का कोई असर नही हुआ ।
वो है....
हमारे देश के नेता
पहले भी "2 कौडी" के थे...
और आज भी.
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 नए मुहावरें का जन्म 
अध्यापक - सौ सुनार की एक लोहार की, इस मुहावरे के समकक्ष एक और मुहावरा बताओ ?
छात्र - सौ इटली की रानी की और एक स्मृति ईरानी की ।
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Teacher: बच्चों चलो ABCD सुनाओ।
छात्र: B C D E G H I K M N O P Q R S T U V W X Y Z.
Teacher: AFJL कहा है ?
छात्र: हम सारे AFJL मारेंगे.. जिस घर से AFJL निकलेगा ।

(Note: छात्र कट्टर हिन्दू था)


काश तुम खूबसूरत होते.

सम्राट चंद्रगुप्त ने एक बार चाणक्य से कहा:-

चाणक्य, काश तुम खूबसूरत होते.?

चाणक्य ने कहा:-'राजन, इंसान की पहचान
उसके गुणों से होती है, रूप से नहीं।'

तब चंद्रगुप्त ने पूछा,
'क्या कोई ऐसा उदाहरण दे सकते हो जहां गुण
के सामने रूप छोटा रह गया हो।'

तब चाणक्य ने राजा को दो गिलास पानी
पीने को दिया।

फिर चाणक्य ने कहा, 'पहले गिलास का पानी
सोने के घड़े का था और दूसरे गिलास का पानी
मिट्टी के घड़े का,
आपको कौन सा पानी अच्छा लगा।'

चंद्रगुप्त बोले, 'मटकी से भरे गिलास का।'

नजदीक ही सम्राट चंद्रगुप्त की पत्नी मौजूद
थीं, वह इस उदाहरण से काफी प्रभावित हुई।

उन्होंने कहा, 'वो सोने का घड़ा किस काम का
जो प्यास न बुझा सके।

मटकी भले ही कितनी कुरुप हो, लेकिन प्यास
मटकी के पानी से ही बुझती है, यानी रूप नहीं
गुण महान होता है।'

इसी तरह इंसान अपने रूप के कारण नहीं बल्कि
अपने गुणों के कारण पूजा जाता है।
रूप तो आज है, कल नहीं लेकिन गुण जब तक
जीवन है तब तक जिंदा रहते हैं, और मरने के
बाद भी जीवंत रहते हैं।

It really is a small world

A short story as told by  

I am sure you remember my most favourite senior colleague from Thrissur, Prof. Hirji Adenwalla. He is the one who told us the story of cortisone and Caesarian section. This is another masterpiece from his invaluable collection:

Behind the Mission Hospital in Trichur there is a big church called the Lourde Cathedral. Every December the church celebrates its festival. The church is beautifully lit up and there is a big show of fire crackers in the night, large crowds gather to see the festivities. An eight year old boy, the son of a staff nurse collected all the crackers that had not gone off, stuffed the explosive powder in a soda water bottle and waited for his mother to leave the house. He collected his friends, put the soda water bottle on the dining table and promised them a spectacle. The children stood around the table in expectation and our boy took a lighted taper and carried the flame to the mouth of the bottle. The other children anticipating an explosion, ducked under the table but the hero of our story received the full blast of the explosion, both his hands were mangled and he was peppered with glass pieces all over his chest and face.

His mother was summoned by the neighbors and she rushed him to the hospital. The boy was put under general anaesthesia and my two orthopaedic surgeons Dr. Ramkumar and Dr. Benny started repairing the damage done to his hands. Before they could do much I received a frantic call from the theatre. My anaesthetist Dr. Gool Mistry was in a panic, she said, “Sir I don’t know what is happening, the boy has not lost much blood but his BP is falling and the precordial stethoscope that I have strapped to his chest tells me that his heart sounds are getting muffled and are slowly fading away. In fact I can’t hear the heart sounds now”. Quite honestly I did not think of a cardiac tamponade but I opted to open the chest to give open cardiac massage to this dead or dying boy. I was in the chest in a couple of minutes through a fifth left sided inter-costal incision and as I spread the ribs with my retractor, what do I see but a huge blue balloon. A classic cardiac tamponade. I opened this pericardium and blood gushed out into the pleural cavity. 

The heart had stopped. I started a cardiac massage within a couple of squeezes the heart slowly came back and from the left ventricle there was a jet of blood slowly rising in height till it almost hit the overhead theater lamp. For a long moment I was stupefied and just watched what was happening before me. Then instinctively I gripped the heart and put my thumb on the tiny wound in the wall of the left ventricle. Believe me it took me a good five minutes to put a single stitch of black silk on that beating heart. That was all that needed to be done. We left a small opening in the pericardium put in a dependent drain in the pleural cavity and came out in a hurry to let the protesting orthopaedic surgeons finish their work.
The child made an uneventful recovery and was discharged on the tenth postoperative day. Two months later the mother brought the boy to me with severe anemia. I screened him to find nothing but a slight blunting of the left cardiophrenic angle. 

The heart was thumping away. For all practical purposes the boy was normal except for the anemia. We gave him a transfusion and packed him home. Three months later the mother was back with the boy the Haemoglobin had again fallen to 7 gms. I spoke to my physician Dr. Varghese Paul. “Soman”, I said “There must be an answer to this”, a couple of days later he came up with an explanation. He said that there is a small piece of glass in the left ventricle, it is churning in the cavity and haemolysing the blood. You have got to go in and remove that glass piece. “Soman”, I said “your explanation makes sense but you must be mad to ask me to remove that glass piece”. We of course did nothing; the boy was brought to us on three subsequent occasions, five in all, each time a transfusion was given and then the boy settled down. 

My physician’s explanation was that the glass piece must have moved out of the ventricle. Fifteen years later my son who is a physician in Cardiff was approached by a young man who asked him “Are you by any chance the son of the doctor in the Mission Hospital in Trichur”. “Yes” my son answered, “that I am”. “What a coincidence” said the boy, “my brother was operated on by him for a glass piece in his heart” “My brother is now working in London”.
When I was told this I said to my son “It really is a small world. I had tried to trace the boy but the mother had moved away and nobody knew where she had gone!”

Jokes in Hindi

 हरभजन सिंह---:(सुहागरात में) क्या मैं तुम्हारा पहला प्यार हूँ?
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गीता बसरा---: कर दी न पागलो वाली बात! स्पिनर को कभी नई गेंद मिलती है भला?
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 लड़का - क्या कर रही हो...?
लड़ली - मेल निकाल रही हूँ !
लड़का - हाँ यार सर्दियो में कभी कभी ही नहाते तो मेल जम ही जाता है
लड़की - ई-मेल ढूंढ रही हूँ जाहिल..!
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मोदी नवाज से :T20 WORLD CUP तो हम ही जीतेंगे
नवाज :लगी शर्त !!
मोदी:लगी !! भाव १ का ३
नवाज :मतलब !!
मोदी:यदि हम जीते तो हिना रब्बानी हमारी... 
और हारे तो...
मायावती, जय ललिता और ममता बनर्जी तुम्हारी...!!.
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दूध पीने से अगर बुद्धि आती तो
गाय और भैस के बच्चे
वैज्ञानिक होते।
।। वहम से बचो ।।
दारू पीयो  दारू
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सरकार ने फरमान जारी किया
चालक, पुरूष हो या स्त्री
दुपहिया वाहन चालक को
हेलमेट पहनना अनिवार्य

यह खबर सुनकर पत्नी ने
वार्डरोब खोला और बोली :
हे भगवान ! अब इतने सारे
मैचिंग हेलमेट खरीदने पड़ेंगे !
 

पति ने एक्टीवा बेच दी ।
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 पत्नी विकास क्रम :  
★ सन् 1960 ★
पति - एक कप चाय ?
पत्नी - (पहले से लिए खड़ी मिलती थी)

★ सन् 1970 ★
पति - एक कप चाय ?
पत्नी - अभी लाई जी ।

★ सन् 1980 ★
पति - एक कप चाय ?
पत्नी - लाती हूँ ।

★ सन् 1990 ★
पति - एक कप चाय ?
पत्नी - ला रही हूँ थोडा सब्र रखो ।

★सन् 2000 ★
पति - एक कप चाय ?
पत्नी - लाऊंगी अभी सीरियल में ब्रेक
तो आने दो ।

★ Now a days ★
पति - एक कप चाय ?
पत्नी - क्या कहा.......
पति - एक कप चाय बनाने जा रहा
था, सोचा तुमसे भी पूछ लूँ,
पियोगी क्या ???

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बच्चा : पापा , मर्द किसे कहते हैं ?
पापा : उस पावरफुल इन्सान को जो घर पर हुकूमत करता है...
बच्चा : मैं भी बड़ा होकर mummy की तरह मर्द बनूँगा...
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एक आदमी प्रार्थना कर रहा था !
तभी वहाँ भगवान प्रकट हुए और
बोले - "मन्नत मांगो
आदमी बोला - "मुझे शादी-शुदा
से अविवाहित बना दो  "
प्रभु बोले - "बेटा, मन्नत मागो .
जन्नत नहीं !"
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सर्फ ऐक्सल वाले स्मृति ईरानी जी के घर पहुंचे गये ... अपनी कम्पनी का ब्रांड एंबेसडर बनाने के लिए ... बोले....
"मैडम, बड़ी तबीयत से धोती हैं आप तो... .

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कुछ हँस के बोल दिया करो,
कुछ हँस के टाल दिया करो,
यूँ तो बहुत परेशानियां है तुमको भी मुझको भी,
मगर कुछ फैंसले वक्त पे डाल दिया करो,
न जाने कल कोई हंसाने वाला मिले न मिले..
इसलिये आज ही
हसरत निकाल लिया करो !!
हमेशा समझौता करना सीखिए..
क्योंकि
थोड़ा सा झुक जाना
किसी रिश्ते को हमेशा के लिए
तोड़ देने से बहुत बेहतर है !!














Saturday, 27 February 2016

जो हमारा है ही नहीं उसके खोने का दुःख कैसा?

किसी शहर में एक रब्बाई (यहूदी पुजारी) अपनी
गुणवती पत्नी और दो प्यारे बच्चों के साथ रहता था.
एक बार उसेकिसी काम से बहुत दिनों के लिए शहर से
बाहर जाना पड़ा.जब वह दूर था तब एक त्रासद दुर्घटना
में उसके दोनों पुत्र मारे गये. ऐसी दुःख की घड़ी में
रब्बाई की पत्नी ने खुद को बड़ी मुश्किल से संभाला.

वह बहुत हिम्मती थी और ईश्वर में उसकी आस्था अटूट
थी. लेकिन उसे यह चिंता थी कि रब्बाई के लौटने पर
वह उसे यह दुखदसमाचार किस प्रकार देगी. रब्बाई स्वयं
बहुत आस्थावानव्यक्ति था लेकिन वह दिल का मरीज़
था और पूर्व में अस्पताल में भी भर्ती रह चुका था.
पत्नी को यह आशंका थी कि वह यह सदमा नहीं झेल
पायेगा. पति के आगमन की पूर्व संध्या को उसने
दृढ़तापूर्वक प्रार्थना की और शायद उसे अपनी
समस्या का कोई समाधान मिल गया. 

अगली सुबह
रब्बाई घर पहुँच गया. बड़े दिनों के बाद घर वापसी पर
वह पत्नी से गर्मजोशी से मिला और लड़कों के बारे में
पूछा. पत्नी ने कहा, "उनकी चिंता मत कीजिये. आप
नहा-धोकर आराम करिए". कुछ समय के बाद वे भोजन
करने के लिए बैठे. पत्नी ने उससे यात्रा के बारे में पूछा.
रब्बाई ने उसे इस बीच घटी बातों की जानकारी दी
और कहा कि ईश्वर की दया से सब ठीक हुआ. फिर उसने
बच्चों के बारे में पूछा. पत्नी कुछ असहज तो थी ही,
फिर भी उसने कहा, "उनके बारे में सोचकर परेशान मत
होइए. हम उनकी बात बाद में करेंगे. मैं इस वक़्त किसी
और उलझन में हूँ, आप मुझे उसका उपाय बताइए". 

रब्बाई
समझ रहा था कि कोई-न-कोई बात ज़रूर थी. उसने
पूछा, "क्या हुआ? कोई बात तो है जो तुम्हें भीतर-
ही-भीतर खाए जा रही है. मुझे बेखटके सब कुछ सच-सच
बता दो और हम साथ बैठकर ईश्वर की मदद से उसका हल
ज़रूर निकाल लेंगे". पत्नी नेकहा, "आप जब बाहर थे तब
हमारे एक मित्र ने मुझे दो बेशकीमती नगीने अहतियात
से सहेजकर रखने के लिए दिए. वे वाकई बहुत कीमती और
नायाब नगीने हैं! मैंने उन जैसी अनूठी चीज़ और कहीं
नहीं देखी है. अब वह उन्हें लेने के लिए आनेवाला है और मैं
उन्हें लौटाना नहीं चाहती. मैं चाहती हूँ कि वे हमेशा
मेरे पास ही रहें. अब आप क्या कहेंगे?" "तुम कैसी बातें
कर रही हो? ऐसी तो तुम नहीं थीं? तुममें यह
संसारिकता कहाँ से आ गयी?", रब्बाई ने आश्चर्य से
कहा. "सच यही है कि मैं उन्हें अपने से दूर होते नहीं
देखना चाहती. अगर मैं उन्हें अपने ही पास रख सकूं तो
इसमें क्या बुरा है?", पत्नी ने कहा. 

रब्बाई बोला,
"जो हमारा है ही नहीं उसके खोने का दुःख कैसा?
उन्हें अपने पास रख लेना तो उन्हें चुराना ही
कहलायेगा न? हम उन्हें लौटा देंगे और मैं यह कोशिश
करूंगा कि तुम्हें उनसे बिछुड़ने का अफ़सोस नहीं सताए.
हम आज ही यह काम करेंगे, एक साथ"."ठीक है. जैसा
आप चाहें. हम वह संपदा लौटा देंगे. और सच यह है कि
हमने वह लौटा ही दी है. 

हमारे बच्चे ही वे बेशकीमती
नगीने थे. ईश्वर ने उन्हें सहेजने के लिए हमारे सुपुर्द किया
था और आपकी गैरहाजिरी में उसने उन्हें हमसे वापस ले
लिया. वे जा चुके हैं...". रब्बाई ने अपनी पत्नी को
भींच लिया और वे दोनों अपनी आंसुओं की धारा में
भीगते रहे. रब्बाई को अपनी पत्नी की कहानी के मर्म
का बोध हो गया था. उस दिन के बाद वे साथ-साथ
उस दुःख से उबरने का प्रयास करने लगे.

बाघ की मूंछ का एक बाल

बहुत समय पहले की बात है , एक वृद्ध सन्यासी हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहता था. वह बड़ा ज्ञानी था और उसकी बुद्धिमत्ता की ख्याति दूर
-दूर तक फैली थी. 

एक दिन एक औरत उसके पास पहुंची और अपना दुखड़ा रोने लगी ,बाबा, मेरा पति मुझसे बहुत प्रेम करता था ,लेकिन वह जबसे युद्ध से लौटा है ठीक से बात तक नहीं करता .

युद्ध लोगों के साथ ऐसा ही करता है., सन्यासी बोला.

लोग कहते हैं कि आपकी दी हुई जड़ी-बूटी इंसान में फिर से प्रेम उत्पन्न कर सकती है , कृपया आप मुझे वो जड़ी-बूटी दे दें.,महिला ने विनती की. सन्यासी ने कुछ सोचा और फिर बोला ,देवी मैं तुम्हे वह जड़ी-बूटी ज़रूर दे देता लेकिन उसे बनाने के
लिए एक ऐसी चीज चाहिए जो मेरे पास नहीं है .
आपको क्या चाहिए मुझे बताइए मैं लेकर आउंगी,महिला बोली.
मुझे बाघ की मूंछ का एक बाल चाहिए ., सन्यासी बोला.


अगले ही दिन महिला बाघ की तलाश में जंगल में निकल पड़ी , बहुत खोजने के बाद उसे नदी के किनारे एक बाघ दिखा , बाघ उसे देखते ही दहाड़ा , महिला सहम गयी और तेजी से वापस चली गयी. अगले कुछ दिनों तक यही हुआ ,महिला हिम्मत कर के उस बाघ के पास पहुँचती और डर कर वापस चली जाती. महीना बीतते-बीतते बाघ को महिला की मौजूदगी की आदत पड़ गयी, और अब वह उसे देख कर सामान्य ही रहता. अब तो महिला बाघ के लिए मांस भी लाने लगी , और बाघ बड़े चाव से उसे खाता. उनकी दोस्ती बढ़ने लगी और अब महिला बाघ को थपथपाने भी लगी. और देखते देखते एक दिन वो भी आ गया जब उसने हिम्मत दिखाते हुए बाघ की मूंछ का एक बाल भी निकाल लिया. फिर क्या था , वह बिना देरी किये सन्यासी के पास पहुंची , और बोली, मैं बाल ले आई बाबा .


बहुत अच्छे .और ऐसा कहते हुए सन्यासी ने बाल को जलती हुई आग में फ़ेंक दिया। अरे ये क्या बाबा , आप नहीं जानते इस बाल को लाने के लिए मैंने कितने प्रयत्न किये और आपने इसे जला दिया ……अब मेरी जड़ी-बूटी कैसे बनेगी ?महिला घबराते हुए बोली.


अब तुम्हे किसी जड़ी-बूटी की ज़रुरत नहीं है .सन्यासी बोला .जरा सोचो , तुमने बाघ को किस तरह अपने वश में किया….जब एक हिंसक पशु को धैर्य और प्रेम से जीता जा सकता है तो क्या एक इंसान को नहीं ?

कभी नीम सी जिंदगी,कभी नमक सी जिंदगी

1 कभी नीम सी जिंदगी,कभी नमक सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक शहद सी जिंदगी।
कभी पत्थर सी जिंदगी,कभी  काँटों सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक मुलायम सी जिंदगी।
कभी तपती सी जिंदगी,कभी गीली सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक सलोनी सी जिंदगी।
कभी भागती सी जिंदगी,कभी रूकती सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक सुकून सी जिंदगी।
कभी सफ़ेद सी जिंदगी,कभी काली सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक रंगीन सी जिंदगी।
कभी पराई सी जिंदगी,कभी बेगानी सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक अपनी सी जिंदगी।
कभी दिखावे सी जिंदगी,कभी झूठी सी जिंदगी।
मैं ढूंढता रहा उम्रभर,एक सच्ची सी जिंदगी।


2 एक आदमी रात को झोपड़ी में बैठकर एक छोटे से दीये को जलाकर कोई शास्त्र पढ़ रहा था।आधी रात बीत गई,जब वह थक गया तो फूंक मार कर उसने दीया बुझा दिया।
लेकिन वह यह देख कर हैरान हो गया कि जब तक दीया जल रहा था, पूर्णिमा का चांद बाहर खड़ा रहा ।
लेकिन जैसे ही दीया बुझ गया तो चांद की किरणें उस कमरे में फैल गई ।
वह आदमी बहुत हैरान हुआ यह देख कर कि एक छोटे से दीए ने इतने बड़े चांद को बाहर रोेक कर रक्खा ।
इसी तरह हमने भी अपने जीवन में अहंकार के बहुत छोटे-छोटे दीए जला रखे हैं जिसके कारण परमात्मा का चांद बाहर ही खड़ा रह जाता है ।


3 जबतक वाणी को विश्राम नहीं दोगे तबतक मन शांत नहीं होगा।
मन शांत होगा तभी ईश्वर की उपस्थिति महसूस होगी ।

Jokes ............... एक शादी शुदा आदमी से पूछा गया सवाल...

 पत्रकार:कौन हो भाई ?
जाट:जाट
पत्रकार:कितनी ज़मीन है आपके पास ?
जाट: 122 एकड़
पत्रकार:कौन सी गाडी है आपके पास ?
जाट: पजेरो
पत्रकार:तो और क्या चाहिए ?
जाट:आरक्षण
पत्रकार: क्यूँ भाई?
जाट: मन्ने ना पता भैंस की पुंछ, ज़्यादा सवाल कोणी।आरक्षण चाहिए।तो चाहिए बस।
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 एक शादी शुदा आदमी से पूछा गया सवाल...
"यदि आपकी सास और आप की पत्नी...
एक साथ बाघ के पिंजरे में गिर जाएं...
तो आप किसे बचाएंगे...??"


वो आदमी जोर से हंसा...
हंसते-हंसते लोटपोट हो गया और बोला...

"यह भी कोई पुछने की बात है...??
मैं यकीनन बाघ को बचाऊँगा...
आखिर दुनिया में बाघ बचे ही कितने हैं....."
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गणित से परेशान एक विद्यार्थी गुरु जी से:
अगर शून्य की खोज आर्यभट्ट ने की थी,
और आर्यभट्ट का जन्म कलयुग में हुआ,
तो उससे पहले 100 कौरव और
रावण के 10 सर की गिनती किसने की थी?

गुरु जी अवकाश लेकर उत्तर की खोज में भटक रहे हैं
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 टीचर:
जिसको सुनाई नहीँ देता उसको क्या कहेँगे ?

शिष्य:
कुछ भी कह दो साले को!
कौनसा सुनाई देता है!!
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 एक घड़ी सुधारने वाले ने अपनी प्रेमिका को कुछ इस प्रकार ख़त लिखा:
मैंने हमेशा तुमारा 7:00 दिया
तुम भी मेरा 07:02
हम 02:09 को हमेशा 01:07 रहना है
इसलिए मुझे छोड़ने की गल्ती 02:12 न करना!!
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चूहे का सेहरा सुहाना लगता है
चुहिया का तो दिल दिवाना लगता है
पल भर में ऐसे कुतरते हैं कपडे
अब तो हर कपडा पुराना लगता है…….

सात रंगो से बना कपडों का ये संगम
काट देते हैं ये कपड़े बनकर के सिंघम
हर कपड़ा सिंघम से बचाना पड़ता है
कपड़ो का अब तो तकिया बनाना पड़ता है!!
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वो मुड़ मुड़ के देख रहे थे हमें,
हम मुड़ मुड़ के देख रहे थे उन्हें,
वो हमें, हम उन्हें,
हम उन्हें, वो हमें,
क्योंकि परीक्षा में …
न उन्हें कुछ आता था, न हमें !
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बॉस – आपकी शादी हो गयी?
सरदार – हाँ जी, १ लड़की से हुई है,

बॉस – शादी तो लड़कीसे ही होती है,
सरदार – ना जी मेरी बहन कि तो लड़के से हुई थी !!!
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छुट्टी कै लाने आबेदन पत्र……
सेवा मे..
श्रीमान मास्साब..
माध्मिक पाठशाला बुंदेलखंड

माहानुभव,
तो मस्साब ऐसो है कि दो दिना से चड़ रओ है जो बुखार और उपर से जा नाक बह रई सो अलग || जई के मारे हम सकूल नई आ पाहे सो तमाए पाऊ पर के निवेदन आए कि दो-चार दिना की छुट्टी दे देते, तो बडो अछछो रहतो और अगर हम नई आये तो कोन सो तमाओ सकूल बंद हो जै |||||||

तुमाओ
आग्याकारी शिष्य,
"कलुआ"
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सरदार जी एक नंबर पर कॉल लगाया..
एक लड़की ने फ़ोन उठाया….
सरदार: हेलो… कौन?
लड़की बोली: मैं सीता…
सरदार: ओ तेरी!, यह तो अयोध्या लग गया… सॉरी माते… !!!


























Thursday, 25 February 2016

मच्छर

मैं शांति से बैठा अख़बार पढ़ रहा था, तभी कुछ मच्छरों ने आकर मेरा खून चूसना शुरू कर दिया। स्वाभाविक प्रतिक्रिया में मेरा हाथ उठा और अख़बार से चटाक हो गया और दो-एक मच्छर ढेर हो गए.!! फिर क्या था उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया कि मैं असहिष्णु हो गया हूँ.!! मैंने कहा तुम खून चूसोगे तो मैं मारूंगा.!! इसमें असहिष्णुता की क्या बात है.??? वो कहने लगे खून चूसना उनकी आज़ादी है.!! "आज़ादी" शब्द सुनते ही कई बुद्धिजीवी उनके पक्ष में उतर आये और बहस करने लगे.!! इसके बाद नारेबाजी शुरू हो गई., "कितने मच्छर मारोगे हर घर से मच्छर निकलेगा".???
बुद्धिजीवियों ने अख़बार में तपते तर्कों के साथ बड़े-बड़े लेख लिखना शुरू कर दिया.!! उनका कहना था कि मच्छर देह पर मौज़ूद तो थे लेकिन खून चूस रहे थे ये कहाँ सिद्ध हुआ है.?? और अगर चूस भी रहे थे तो भी ये गलत तो हो सकता है लेकिन 'देहद्रोह' की श्रेणी में नहीं आता, क्योंकि ये "बच्चे" बहुत ही प्रगतिशील रहे हैं., किसी की भी देह पर बैठ जाना इनका 'सरोकार' रहा है.!!
मैंने कहा मैं अपना खून नहीं चूसने दूंगा बस.!!! तो कहने लगे ये "एक्सट्रीम देहप्रेम" है.! तुम कट्टरपंथी हो, डिबेट से भाग रहे हो.!!! मैंने कहा तुम्हारा उदारवाद तुम्हें मेरा खून चूसने की इज़ाज़त नहीं दे सकता.!!! इस पर उनका तर्क़ था कि भले ही यह गलत हो लेकिन फिर भी थोड़ा खून चूसने से तुम्हारी मौत तो नहीं हो जाती, लेकिन तुमने मासूम मच्छरों की ज़िन्दगी छीन ली.!! "फेयर ट्रायल" का मौका भी नहीं दिया.!!! इतने में ही कुछ राजनेता भी आ गए और वो उन मच्छरों को अपने बगीचे की 'बहार' का बेटा बताने लगे.!!
हालात से हैरान और परेशान होकर मैंने कहा कि लेकिन ऐसे ही मच्छरों को खून चूसने देने से मलेरिया हो जाता है, और तुरंत न सही बाद में बीमार और कमज़ोर होकर मौत हो जाती है.!! इस पर वो कहने लगे कि तुम्हारे पास तर्क़ नहीं हैं इसलिए तुम भविष्य की कल्पनाओं के आधार पर अपने 'फासीवादी' फैसले को ठीक ठहरा रहे हो..!!! मैंने कहा ये साइंटिफिक तथ्य है कि मच्छरों के काटने से मलेरिया होता है., मुझे इससे पहले अतीत में भी ये झेलना पड़ा है.!! साइंटिफिक शब्द उन्हें समझ नहीं आया.!! तथ्य के जवाब में वो कहने लगे कि मैं इतिहास को मच्छर समाज के प्रति अपनी घृणा का बहाना बना रहा हूँ., जबकि मुझे वर्तमान में जीना चाहिए..!!! इतने हंगामें के बाद उन्होंने मेरे ही सर माहौल बिगाड़ने का आरोप भी मढ़ दिया.!!!
मेरे ख़िलाफ़ मेरे कान में घुसकर सारे मच्छर भिन्नाने लगे कि "लेके रहेंगे आज़ादी".!!!
मैं बहस और विवाद में पड़कर परेशान हो गया था., उससे ज़्यादा जितना कि खून चूसे जाने पर हुआ था.!!! आख़िरकार मुझे तुलसी बाबा याद आये: "सठ सन विनय कुटिल सन प्रीती...."। और फिर मैंने काला हिट उठाया और मंडली से मार्च तक, बगीचे से नाले तक उनके हर सॉफिस्टिकेटेड और सीक्रेट ठिकाने पर दे मारा.!!! एक बार तेजी से भिन्न-भिन्न हुई और फिर सब शांत.!! उसके बाद से न कोई बहस न कोई विवाद., न कोई आज़ादी न कोई बर्बादी., न कोई क्रांति न कोई सरोकार.!!! अब जब कुछ ठीक है.!! यही दुनिया की रीत है.!!!

Toffee टॉफियों

कहानी टॉफियों की

एक बच्चा अपनी माँ के साथ एक दुकान पर
शॉपिंग करने गया तो दुकानदार ने
उसकी मासूमियत देखकर
उसको सारी टॉफियों के डिब्बे खोलकर
कहा-: "लो बेटा टॉफियाँ ले लो…!!!"
पर उस बच्चे ने भी बड़े प्यार से उन्हें मना कर दिया.
उसके बावजूद उस दुकानदार
ने और उसकी माँ ने भी उसे बहुत कहा पर
वो मना करता रहा. हारकर उस दुकानदार ने
खुद अपने हाथ से टॉफियाँ निकाल कर
उसको दीं तो उसने ले लीं और अपनी जेब में
डाल ली….!!!! वापस आते हुऐ उसकी माँ ने पूछा कि"जब
अंकल तुम्हारे सामने डिब्बा खोल कर
टाँफी दे रहे थे , तब तुमने नही ली और जब
उन्होंने अपने हाथों से दीं तो ले ली..!!
ऐसा क्यों..??"
तब उस बच्चे ने बहुत खूबसूरत प्यारा जवाब दिया -: "माँ
मेरे हाथ छोटे-छोटे हैं… अगर मैं
टॉफियाँ लेता तो दो तीन
टाँफियाँ ही आती जबकि अंकल के हाथ बड़े
हैं इसलिये ज्यादा टॉफियाँ मिल गईं….!!!!!"
बिल्कुल इसी तरह जब भगवान हमें देता है
तो वो अपनी मर्जी से देता है और वो हमारी सोच से
परे होता है,
हमें हमेशा उसकी मर्जी में खुश
रहना चाहिये….!!!
क्या पता..??
वो किसी दिन हमें पूरा समंदर
देना चाहता हो और हम हाथ में चम्मच लेकर खड़े हों…

Tuesday, 23 February 2016

जापान में दो फकीर थे

जापान में दो फकीर थे ! साँझ अपने झोपड़े पर लौटते थे ! वर्षा के दिन थे , अभी वर्षा आयी-आयी थी ! आकर उन्होंने देखा , उनके झोपड़े का आधा हिस्सा हवा उड़ाकर ले गयी है ! एक तो फ़ौरन भगवान् के प्रति क्रोध से भर गया और उसने कहा , यह क्या हुआ ? अब क्या होगा ? वर्षा आ गयी , वर्षा सिर पर है , आकाश में बादल मंडराते है और हम फकीरों का झोपड़ा हवाएं उड़ाकर ले गयी ! आधा झोपड़ा नष्ट हो गया ! अब हम कैसे रहेंगे , क्या करेंगे ? और उसने कहा , इन्ही क्षणों में तो भगवान् पर शक आ जाता है कि यह है भी या नही ! पापियो के बड़े-बड़े महल खड़े है, उनको उड़ाने का ख्याल नही आता , गरीबो का झोपड़ा था , उसको उड़ाकर ले गये !


लेकिन दूसरा फ़क़ीर .... यह पहला फ़क़ीर हैरान हुआ --- दूसरा फ़क़ीर हाथ जोड़े आकाश की तरफ आँखे बंद किये खड़ा है और भगवान् से कह रहा है की तू धन्य है , तेरी कृपा धन्य है ! आँधियों का क्या भरोसा था , पूरा झोपड़ा भी उड़ाकर ले जा सकती थी ! तूने तो आधा बचा दिया ! आंधियो का कोई भरोसा है ? अंधी होती है आंधिया , वह तो पूरा उड़ाकर ले जा सकती थी , तूने आधा बचा दिया ! हम फकीरों की तुझे इतनी स्मृति है ! हम कितनी कृतज्ञता अनुभव करते है !


और रात उसने एक गीत लिखा ! रात उसने एक गीत लिखा , कि आज तक हमें पता नही था इस आनंद का , जो आधे छप्पर वाले लोगो को मिलता है ! आधे छप्पर में हम सोये थे , आधे छप्पर में चाँद भी था , वह भी दिखायी पड़ता था ! आधा खुला हुआ छप्पर, आधे छप्पर में हम सोये है ! रात जब भी आँख खुली तो बाहर देखा की तारे आकाश में है , उनका दर्शन किया और शांत से सो गये ! आज सुबह मैं जितने आनंद में हूँ , कभी नही उठा , अगर एक सपना भी दे दिया होता भगवान् ने , हम खुद ही आधा छप्पर अलग कर देते ! आंधियो को अलग करने की जरुरत क्या थी !  

सर्वप्रथम रामायण किसने लिखी थी , आइये जाने !

सर्वप्रथम रामायण किसने लिखी थी , आइये जाने ! 


सर्वप्रथम रामकथा हनुमानजी ने लिखी थी और वह भी एक शिला (चट्टान) पर अपने नाखूनों से लिखी थी। 


यह रामकथा वाल्मीकिजी की रामायण से भी पहले लिखी गई थी और यह ‘हनुमद रामायण’ के नाम से प्रसिद्ध है। प्रभु श्री राम के जीवन पर अनेकों रामायण लिखी गई है जिनमे प्रमुख है वाल्मीकि रामायण, श्री राम चरित मानस, कबंद रामायण (कबंद एक राक्षस का नाम था), अद्भुत रामायण और आनंद रामायण। लेकिन क्या आप जानते है अपने आराध्य प्रभु श्री राम को समर्पित एक रामायण स्वयं हनुमान जी ने लिखी थी जो ‘हनुमद रामायण’ के नाम से जानी जाती है। इसे ही प्रथम रामायण होने का गौरव प्राप्त है। 

लेकिन स्वयं हनुमान जी ने ही अपनी उस रामायण को समुद्र में फ़ेंक दिया था। 

लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों किया आइये जानते है शास्त्रों में वर्णित एक गाथा- 

शास्त्रों के अनुसार सर्वप्रथम रामकथा हनुमानजी ने लिखी थी और वह भी एक शिला (चट्टान) पर अपने नाखूनों से लिखी थी। यह रामकथा वाल्मीकिजी की रामायण से भी पहले लिखी गई थी और यह ‘हनुमद रामायण’ के नाम से प्रसिद्ध है। यह घटना तब की है जबकि भगवान श्रीराम रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या में राज करने लगते हैं और श्री हनुमानजी हिमालय पर चले जाते हैं। वहां वे अपनी शिव तपस्या के दौरान एक शिला पर प्रतिदिन अपने नाखून से रामायण की कथा लिखते थे। इस तरह उन्होंने प्रभु श्रीराम की महिमा का उल्लेख करते हुए ‘हनुमद रामायण’ की रचना की। 

कुछ समय बाद महर्षि वाल्मीकि ने भी ‘वाल्मीकि रामायण’ लिखी और लिखने के बाद उनके मन में इसे भगवान शंकर को दिखाकर उनको समर्पित करने की इच्छा हुई। वे अपनी रामायण लेकर शिव के धाम कैलाश पर्वत पहुंच गए। वहां उन्होंने हनुमानजी को और उनके द्वारा लिखी गई ‘हनुमद रामायण’ को देखा। हनुमद रामायण के दर्शन कर वाल्मीकिजी निराश हो गए। वाल्मीकिजी को निराश देखकर हनुमानजी ने उनसे उनकी निराशा का कारण पूछा तो महर्षि बोले कि उन्होंने बड़े ही कठिन परिश्रम के बाद रामायण लिखी थी लेकिन आपकी रामायण देखकर लगता है कि अब मेरी रामायण उपेक्षित हो जाएगी, क्योंकि आपने जो लिखा है उसके समक्ष मेरी रामायण तो कुछ भी नहीं है। 

तब वाल्मीकिजी की चिंता का शमन करते हुए श्री हनुमानजी ने हनुमद रामायण पर्वत शिला को एक कंधे पर उठाया और दूसरे कंधे पर महर्षि वाल्मीकि को बिठाकर समुद्र के पास गए और स्वयं द्वारा की गई रचना को श्रीराम को समर्पित करते हुए समुद्र में समा दिया। 

तभी से हनुमान द्वारा रची गई हनुमद रामायण उपलब्ध नहीं है। हनुमानजी द्वारा लिखी रामायण को हनुमानजी द्वारा समुद्र में फेंक दिए जाने के बाद महर्षि वाल्मीकि बोले कि हे रामभक्त श्री हनुमान, आप धन्य हैं! आप जैसा कोई दूसरा ज्ञानी और दयावान नहीं है। हे हनुमान, आपकी महिमा का गुणगान करने के लिए मुझे एक जन्म और लेना होगा और मैं वचन देता हूं कि कलयुग में मैं एक और रामायण लिखने के लिए जन्म लूंगा। तब मैं यह रामायण आम लोगों की भाषा में लिखूंगा। 

माना जाता है कि रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास कोई और नहीं बल्कि महर्षि वाल्मीकि का ही दूसरा जन्म था। तुलसीदासजी अपनी ‘रामचरित मानस’ लिखने के पूर्व हनुमान चालीसा लिखकर हनुमानजी का गुणगान करते हैं और हनुमानजी की प्रेरणा से ही वे फिर रामचरित मानस लिखते हैं। 

माना जाता है महाकवि कालिदास के समय में एक पटलिका को समुद्र के किनारे पाया गया जिसे कि एक सार्वजनिक स्थल पर टांग दिया गया था ताकी विद्यार्थी उस गूढ़लिपि को पढ़कर उसका अर्थ निकाल सकें। ऐसा माना जाता है कि कालीदास ने उसका अर्थ निकाल लिया था और वो ये भी जान गये थे कि ये पटलिका कोई और नहीं अपितु हनुमानजी द्वारा रचित हनुमद रामायण का ही एक अंश है जो कि पर्वत शिला से निकल कर जल के साथ प्रवाहित होकर यहां तक आ गया है।

Monday, 22 February 2016

माँ, मैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ


"माँ, मैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूं। विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन, आपने उसके बारे में सुना है?" वासु ने पूछा।
 

उसकी मां उसके पास बैठी और मुस्कुराकर बोली, "मैं डार्विन के बारे में जानती हूं, वासु। मैं यह भी जानती हूं कि तुम जो सोचते हो कि उसने जो भी खोज की, वह वास्तव में भारत के लिए बहुत पुरानी खबर है।" 

"निश्चित रूप से मां!" वासु ने व्यंग्यपूर्वक कहा।

"यदि तुम कुछ होशियार हो, तो इसे सुनो," उसकी मां ने प्रतिकार किया। "क्या तुमने दशावतार के बारे में सुना है? विष्णु के दस अवतार?" वासु ने सहमति में सिर हिलाया। 

"तो मैं तुम्हें बताती हूं कि तुम और मि.डार्विन क्या नहीं जानते हैं।
पहला अवतार था मत्स्य अवतार, यानि मछली। ऐसा इसलिए कि जीवन पानी में आरम्भ हुआ। यह बात सही है या नहीं?" वासु अब और अधिक ध्यानपूर्वक सुनने लगा। 

"उसके बाद आया कूर्म अवतार, जिसका अर्थ है कछुआ, क्योंकि जीवन पानी से जमीन की ओर चला गया। उभयचर (ऎम्फिबिअन)। तो कछुए ने समुद्र से जमीन की ओर विकास को दर्शाया।"  

"तीसरा था वराह, जंगली सूअर, जिसका मतलब है जंगली जानवर जिनमें बहुत अधिक बुद्धि नहीं होती है। तुम उन्हें डायनासोर कहते हो, सही है?" वासु ने आंखें फैलाते हुए सहमति जताई। 

"चौथा अवतार था नृसिंह अवतार, आधा मानव, आधा पशु, जंगली जानवरों से बुद्धिमान जीवों तक विकास।"  

पांचवें वामन अवतार था, बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था। क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों है? क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे, होमो इरेक्टस और होमो सेपिअंस, और होमो सेपिअंस ने लड़ाई जीत ली।" वासु देख रहा था कि उसकी माँ पूर्ण प्रवाह में थी और वह स्तब्ध था।

"छठा अवतार था परशुराम – वे, जिनके पास कुल्हाड़ी की ताकत थी; वो मानव जो गुफा और वन में रहने वाला था। गुस्सैल, और सामाजिक नहीं।"


"सातवां अवतार था राम, सोच युक्त प्रथम सामाजिक व्यक्ति, जिन्होंने समाज के नियम बनाए और समस्त रिश्तों का आधार।"

"आठवां अवतार था कृष्ण, राजनेता, राजनीतिज्ञ, प्रेमी जिन्होंने ने समाज के नियमों का आनन्द लेते हुए यह सिखाया कि सामाजिक ढांचे में कैसे रहकर फला-फूला जा सकता है।"

नवां अवतार था बुद्ध, वे व्यक्ति जो नृसिंह से उठे और मानव के सही स्वभाव को खोजा। उन्होंने मानव द्वारा ज्ञान की अंतिम खोज की पहचान की।"


"और अंत में कल्कि आएगा, वह मानव जिसपर तुम काम कर रहे हो। वह मानव जो आनुवंशिक रूप से अति-श्रेष्ठ होगा।"

वासु अपनी मां को अवाक होकर देखता रहा। "यह अद्भुत है मां, आपका दर्शन. वास्तव में अर्थपूर्ण है।"

"बिल्कुल अर्थपूर्ण है वासु! अब तुम इडली खाओ।"
......................................

पुराण अर्थपूर्ण हैं। सिर्फ आपका देखने का नज़रिया ऐसा होना चाहिए – धार्मिक या वैज्ञानिक। जैसा आप कहना चाहें।


































When you move your focus from Competition to Contribution....,

1.When you move your focus from Competition to Contribution....,
Life becomes Celebration...,
So never Defeat people....,
just try to WIN them...!!

2.Neither anyone in this world is born as a friend nor born as a enemy ....
Behavior ...
Attitude.....
& Approach.
Makes them become either one


3."Walking" is the best exercise...!
'Walk Away'
from arguments that lead you to nowhere but anger.
'Walk Away'
from people who deliberately put you down.
'Walk Away'
from any thought that reduces your worth.
'Walk Away'
from failures and fears that striffle your dreams.
The more you 'Walk Away' from things that poison your soul, the happier your life would be...


4.A change in behavior begins with a change in the heart...

5.A man asked an Artist..
How do you make such Beautiful Things from Stone......
He replied...
Beauty is Already Hidden There..
I just remove extra stone......
Your Happiness is Hidden Within Yourself.
Just Remove Your Worries ...!!


6.You are responsible for your own happiness. If you expect others to make you happy, you will always be disappointed.

7.Always
be urself,
express urself,
have faith in urself,
do not go out & look for a successful personality & duplicate it...





Tuesday, 9 February 2016

गंगा में विसर्जित अस्थियां आखिर जाती कहां हैं.?

गंगा में विसर्जित अस्थियां आखिर जातीकहां हैं.?


___________________________________
.
पतित पावनी गंगा को देव नदी कहा
जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गंगा
स्वर्ग से धरती पर आई है। मान्यता है कि
गंगा श्री हरि विष्णु के चरणों से निकली
है और भगवान शिव की जटाओं में आकर बसी
है।
श्री हरि और भगवान शिव से घनिष्ठ संबंध
होने पर गंगा को पतित पाविनी कहा
जाता है। मान्यता है कि गंगा में स्नान
करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो
जाता है।
.
एक दिन देवी गंगा श्री हरि से मिलने
बैकुण्ठ धाम गई और उन्हें जाकर बोली,"
प्रभु ! मेरे जल में स्नान करने से सभी के
पाप नष्ट हो जाते हैं लेकिन मैं इतने पापों
का बोझ कैसे उठाऊंगी? मेरे में जो पाप
समाएंगे उन्हें कैसे समाप्त करूंगी?"
.
इस पर श्री हरि बोले,"गंगा! जब साधु,
संत, वैष्णव आ कर आप में स्नान करेंगे तो आप
के सभी पाप घुल जाएंगे।"
.
गंगा नदी इतनी पवित्र है की प्रत्येक
हिंदू की अंतिम
इच्छा होती है उसकी अस्थियों का
विसर्जन गंगा में ही
किया जाए लेकिन यह अस्थियां जाती
कहां हैं?
.
इसका उत्तर तो वैज्ञानिक भी नहीं दे
पाए क्योंकि असंख्य मात्रा में अस्थियों
का विसर्जन करने के बाद भी गंगा जल
पवित्र एवं पावन है। गंगा सागर तक खोज
करने के बाद भी इस प्रश्न का पार नहीं
पाया जा सका।
.
सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार मृत्यु
के बाद आत्मा की शांति के लिए मृत
व्यक्ति की अस्थि को गंगा में विसर्जन
करना उत्तम माना गया है। यह अस्थियां
सीधे श्री हरि के चरणों में बैकुण्ठ जाती
हैं।
जिस व्यक्ति का अंत समय गंगा के समीप
आता है उसे
मरणोपरांत मुक्ति मिलती है। इन बातों
से गंगा के प्रति हिन्दूओं की आस्था तो
स्वभाविक है।
.
वैज्ञानिक दृष्टि से गंगा जल में पारा
अर्थात (मर्करी)
विद्यमान होता है जिससे हड्डियों में
कैल्शियम और
फोस्फोरस पानी में घुल जाता है। जो
जलजन्तुओं के लिए एक पौष्टिक आहार है।
वैज्ञानिक दृष्टि से हड्डियों में गंधक
(सल्फर) विद्यमान होता है जो पारे के
साथ मिलकर पारद का निर्माण होता
है। इसके साथ-साथ यह दोनों मिलकर
मरकरी सल्फाइड साल्ट का निर्माण करते
हैं। हड्डियों में बचा शेष कैल्शियम, पानी
को स्वच्छ रखने का काम करता है।
धार्मिक दृष्टि से पारद शिव का प्रतीक
है और गंधक शक्ति का प्रतीक है। सभी
जीव अंततःशिव और शक्ति में ही विलीन
हो जाते हैं।.......
हर हर गंगे

जगन्नाथ जी का यह मंदिर बारिश की सटीक भविस्यवाणी करता है। आइये जानें कैसे ?

जगन्नाथ जी का यह मंदिर बारिश की सटीक भविस्यवाणी करता है।  आइये जानें कैसे ?





भारत के बारे में अभी हमें बहुत कुछ जानना बाकी है। 
भारत देश एक ऐसा देश है जो आश्चर्यो से भरा हुआ है। इस देश के हर राज्य के हर शहर के कोने-कोने में कोई न कोई अदुभुत जगह मौजूद है। ऐसी ही एक जगह है उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर जो की अपनी एक अनोखी विशेषता के कारण प्रसिद्ध है। 

इस मंदिर की विशेषता यह है की यह मंदिर बारिश होने की सुचना 7 दिन पहले ही दे देता है। आप शायद यकीन न करे पर यह हकीकत है।
यह मंदिर भगवान जगन्नाथ का मंदिर है। यह मंदिर कानपुर जनपद के भीतरगांव विकासखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर पर बेंहटा गांव में स्थित है। 

ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की खासियत यह है कि बरसात से 7 दिन पहले इसकी छत से बारिश की कुछ बूंदे अपने आप ही टपकने लगती हैं।
हालांकि इस रहस्य को जानने के लिए कई बार प्रयास हो चुके हैं पर तमाम सर्वेक्षणों के बाद भी मंदिर के निर्माण तथा रहस्य का सही समय पुरातत्व वैज्ञानिक पता नहीं लगा सके। 

बस इतना ही पता लग पाया कि मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं सदी में हुआ था। उसके पहले कब और कितने जीर्णोद्धार हुए या इसका निर्माण किसने कराया जैसी जानकारियां आज भी अबूझ पहेली बनी हुई हैं, लेकिन बारिश की जानकारी पहले से लग जाने से किसानों को जरूर सहायता मिलती है।

इस मन्दिर में भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ और बहन सुभद्रा की काले चिकने पत्थर की मूर्तियां स्थापित हैं। वहीं सूर्य और पदमनाभम भगवान की भी मूर्तियां हैं। मंदिर की दीवारें 14 फीट मोटी हैं। वर्तमान में मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। मंदिर से वैसी ही रथ यात्रा निकलती है जैसी पुरी उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर से निकलती है।

मौसमी बारिश के समय मानसून आने के एक सप्ताह पूर्व ही मंदिर के गर्भ ग्रह के छत में लगे मानसूनी पत्थर से उसी घनत्वाकार की बूंदें टपकने लगती हैं, जिस तरह की बरसात होने वाली होती है। जैसे ही बारिश शुरू होती है वैसे ही पत्थर सूख जाता है।

मंदिर के पुजारी दिनेश शुक्ल ने बताया कि कई बार पुरातत्व विभाग और आईआईटी के वैज्ञानिक आए और जांच की। न तो मंदिर के वास्तविक निर्माण का समय जान पाए और न ही बारिश से पहले पानी टपकने की पहेली सुलझा पाए हैं। हालांकि मंदिर का आकार बौद्ध मठ जैसा है। जिसके कारण कुछ लोगों की मान्यता है कि इसको सम्राट अशोक ने बनवाया होगा, परन्तु मंदिर के बाहर बने मोर और चक्र की आकृति से कुछ लोग इसको सम्राट हर्षबर्धन से जोड़ कर देखते हैं।

Monday, 8 February 2016

Someone asked to a saint How to develop our personality ?

Someone asked to a saint How to develop our personality ?


Saint :

To develop your personality, you have to spend five days to have these five experiences to really blossom in your life.
You can develop your personality with these five experiences.

You have to sincerely play these five roles:

1. The first role which I would recommend to you is to be a School Teacher.
To teach lessons to children who are not learning, you need a lot of patience.
Being a nursery or primary school teacher, even for one day, you will see how you have to increase your patience.

2. Be a Gardener or spend a day with a Farmer.
If you are sowing the seeds,
if you are watering the plants,
you will know how you must care for water, earth and the environment.
You will have a feeling for the environment.
You will value food and you will not waste food.
You know, what we do?
We bring so much food, and we put it in the fridge and, after a few days in the refrigerator, we throw the food.
We are wasting millions and millions of tons of food every day.
We should not waste food.
This we will learn if we spend one day being a farmer or a gardener.

3. You should spend a day in the mental hospital.
Whatever people talk in the mental hospital, you don’t mind.
If they scold you,
if they blame you,
if they curse you,
will you mind?
You don’t mind because you are aware that this person is mentally sick.
You know that many people are outside the hospital, but that does not mean they are mentally well.
So, in life, you come across people who blame you for nothing, who are jealous or angry, who say things that make no sense. Then, you know, you will have the patience to deal with them with a smile. You will not take the garbage inside and spoil your mind.
So one day if you spend in a mental hospital, you will know how to save your mind.
You will stop being a football of others’ opinions.

4. One day you must go to a prison. Maybe it is shocking to you.
You don’t have to do a wrong thing to go to a prison.
Just go visit a prison, spend a little time with the prisoners.
You will understand what compassion is.
What helplessness is.
Those people did a mistake without awareness.
So you will know how you must have a say on your emotions.

5. There are terminally ill people in the hospital.
One day with them, and you will realize how precious life is.
And you will start valuing health.
You will eat better,
you will exercise.
You will do all that is needed to be more vibrant in your life.
With these five days what would be the outcome?

I guess from these five days you will become
More Vibrant,
More Alive,
More Loving,
Compassionate
and Active.
( Taken From internet, real source not known)