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Thursday, 12 November 2015

एक दिया ऐसा भी हो , जो भीतर तलक प्रकाश करे

दीपावली - एक दिया ऐसा हो




एक दिया ऐसा भी हो , जो 

भीतर तलक प्रकाश करे , 

एक दिया मुर्दा जीवन में , 

फिर आकर कुछ श्वास भरे | 


एक दिया सादा हो इतना , 

जैसे साधु का जीवन , 

एक दिया इतना सुन्दर हो , 

जैसे देवों का उपवन | 


एक दिया जो भेद मिटाए , 

क्या तेरा क्या मेरा है , 

एक दिया जो याद दिलाये , 

हर रात के बाद सवेरा है | 


एक दिया उनकी खातिर हो , 

जिनके घर में दिया नहीं , 

एक दिया उन बेचारों का , 

जिनको घर ही दिया नहीं | 


एक दिया सीमा के रक्षक , 

अपने वीर जवानों का , 

एक दिया मानवता-रक्षक , 

चंद बचे इंसानों का | 


एक दिया विश्वास दे उनको , 

जिनकी हिम्मत टूट गयी , 

एक दिया उस राह में भी हो , 

जो कल पीछे छूट गयी | 


एक दिया जो अंधकार का , 

जड़ के साथ विनाश करे , 

एक दिया ऐसा भी हो , जो 

भीतर तलक प्रकाश करे ||

हम सब दीपावली पर भगवन राम की पूजा क्यों नहीं करते?

हम सब दीपावली पर भगवन राम की पूजा क्यों नहीं करते? 


हम दीपावली का त्यौहार क्यूँ मनाते है?
इसका अधिकतर उत्तर मिलता है राम जी के वनवास से लौटने की ख़ुशी में।
सच है पर अधूरा।। अगर ऐसा ही है तो फिर हम सब दीपावली पर भगवन राम की पूजा क्यों नहीं करते? लक्ष्मी जी और गणेश भगवन की क्यों करते है?
सोच में पड़ गए न आप भी।
इसका उत्तर आप तक पहुँचाने का प्रयत्न कर रहा हूँ  


1. देवी लक्ष्मी जी का प्राकट्य:
देवी लक्ष्मी जी कार्तिक मॉस की अमावस्या के दिन समुन्दर मंथन में से अवतार लेकर प्रकट हुई थी।

2. भगवन विष्णु द्वारा लक्ष्मी जी को बचाना:
भगवन विष्णु ने आज ही के दिन अपने पांचवे अवतार वामन अवतार में देवी लक्ष्मी को राजा बालि से मुक्त करवाया था।

3. नरकासुर वध कृष्ण द्वारा:
इस दिन भगवन कृष्ण ने राक्षसों के राजा नरकासुर का वध कर उसके चंगुल से 16000 औरतों को मुक्त करवाया था। इसी ख़ुशी में दीपावली का त्यौहार दो दिन तक मनाया गया। इसे विजय पर्व के नाम से भी जाना जाता है।

4. पांडवो की वापसी:
महाभारत में लिखे अनुसार कार्तिक अमावस्या को पांडव अपना 12 साल का वनवास काट कर वापिस आये थे जो की उन्हें चौसर में कौरवो द्वारा हरये जाने के परिणाम स्वरूप मिला था। इस प्रकार उनके लौटने की खुशी में दीपावली मनाई गई।

5. राम जी की विजय पर :
रामायण के अनुसार ये चंद्रमा के कार्तिक मास की अमावस्या के नए दिन की शुरुआत थी जब भगवन राम माता सीता और लक्ष्मण जी अयोध्या वापिस लौटे थे रावण और उसकी लंका का दहन करके। अयोध्या के नागरिकों ने पुरे राज्य को इस प्रकार दीपमाला से प्रकाशित किया था जैसा आजतक कभी भी नहीं हुआ था।

6. विक्रमादित्य का राजतिलक:
आज ही के दिन भारत के महान राजा विक्रमदित्य का राज्याभिषेक हुआ था। इसी कारन दीपावली अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना भी है।

7. आर्य समाज के लिए प्रमुख दिन:
आज ही के दिन कार्तिक अमावस्या को एक महान व्यक्ति स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने हिंदुत्व का अस्तित्व बनाये रखने के लिए आर्य समाज की स्थापना की थी।

8. जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण दिन:
महावीर तीर्थंकर जी ने कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही मोक्ष प्राप्त किया था।

9. सिक्खों के लिए महत्त्व:
तीसरे सिक्ख गुरु गुरु अमरदास जी ने लाल पत्र दिवस के रूप में मनाया था जिसमे सभी श्रद्धालु गुरु से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे और 1577 में अमृतसर में हरिमंदिर साहिब का शिलान्यास किया गया था।
1619 में सिक्ख गुरु हरगोबिन्द जी को ग्वालियर के किले में 52 राजाओ के साथ मुक्त किया गया था जिन्हें मुगल बादशाह जहांगीर ने नजरबन्द किया हुआ था। इसे सिक्ख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी जानते हैं।


10. द पोप का दीपावली पर भाषण:
1999 में पॉप जॉन पॉल 2 ने भारत में एक खास भाषण दिया था जिसमे चर्च को दीपावली के दीयों से सजाया गया था। पॉप के माथे पर तिलक लगाया गया था। और उन्होंने दीपावली के संदर्भ में रोंगटे खड़े कर देने वाली बाते बताई।
भगवान् गणेश सभी देवो में प्रथम पूजनीय है इसी कारण उनकी देवी लक्ष्मी जी के साथ दीपावली पर पूजा होती है और बाकी सभी कारणों के लिए हम दीपमाला लगाकर दीपावली का त्यौहार मनाते हैं।

टीपू सुल्तान एंटी हिंदू था या नहीं

टीपू सुल्तान एंटी हिंदू था या नहीं  



आईए, आपको बताते हैं इतिहास में दर्ज टीपू सुल्तान से जुड़ी  बातें  

1. 19वीं सदी में ब्रिटिश गवर्मेंट के अधिकारी और लेखक विलियम लोगान ने अपनी किताब 'मालाबार मैनुअल' में लिखा है कि कैसे टीपू सुल्तान ने अपने 30,000 सैनिकों के दल के साथ कालीकट में तबाही मचाई थी. टीपू सुल्तान हाथी पर सवार था और उसके पीछे उसकी विशाल सेना चल रही थी. पुरुषों और महिलाओं को सरेआम फांसी दी गई. उनके बच्चों को उन्हीं के गले में बांध पर लटकाया गया.

2. इसी किताब में विलियम यह भी लिखते हैं कि शहर के मंदिर और चर्चों को तोड़ने के आदेश दिए गए. यहीं नहीं, हिंदू और इसाई महिलाओं की शादी जबरन मुस्लिम युवकों से कराई गई. पुरुषों से मुस्लिम धर्म अपनाने को कहा गया और जिसने भी इससे इंकार किया उसे मार डालने का आदेश दिया गया.

3. कई जगहों पर उस पत्र का भी जिक्र मिलता है, जिसे टीपू सुल्तान ने सईद अब्दुल दुलाई और अपने एक अधिकारी जमान खान के नाम लिखा है. पत्र के अनुसार टीपू सुल्तान लिखता है, 'पैगंबर मोहम्मद और अल्लाह के करम से कालीकट के सभी हिंदूओं को मुसलमान बना दिया है. केवल कोचिन स्टेट के सीमवर्ती इलाकों के कुछ लोगों का धर्म परिवर्तन अभी नहीं कराया जा सका है. मैं जल्द ही इसमें भी कामयाबी हासिल कर लूंगा.'

4. यहां 1964 में प्रकाशित किताब 'लाइफ ऑफ टीपू सुल्तान' का जिक्र भी जरूरी है. इसमें लिखा गया है कि उसने तब मालाबार क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा हिंदुओं और 70,000 से ज्यादा ईसाइयों को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया.

5. इस किताब के अनुसार धर्म परिवर्तन टीपू सुल्तान का असल मकसद था, इसलिए उसने इसे बढ़ावा दिया. जिन लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया, उन्हें मजबूरी में अपने बच्चों की शिक्षा भी इस्लाम के अनुसार देनी पड़ी. इनमें से कई लोगों को बाद में टीपू सुल्तान की सेना में शामिल किया गया और अच्छे ओहदे दिए गए.

6. टीपू सुल्तान के ऐसे पत्रों का भी जिक्र मिलता है, जिसमें उसने फ्रेंच शासकों के साथ मिलकर अंग्रेजों को भगाने और फिर उनके साथ भारत के बंटवारे की बात की. ऐसा भी जिक्र मिलता है कि उसने तब अफगान शासक जमान शाह को भारत पर चढ़ाई करने का निमंत्रण दिया, ताकि यहां इस्लाम को और बढ़ावा मिल सके.

आइये जानिये मोदी की जन्मपत्री को............

आइये जानिये मोदी की जन्मपत्री को............ 





भारत के PM नरेन्द्र मोदी के सितारे इन दिनों कुछ अच्छे नहीं चल रहे हैं।

पहले दिल्ली विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल और अब बिहार विधानसभा चुनावों में लालू-नीतीश के हाथों हुई हार से उनके राजनीतिक विरोधी मुखर होकर उनकी आलोचना कर रहे हैं।

ज्योतिष की दृष्टि से देखा जाए तो उनकी कुंडली के अनुसार अभी उन्हें शनि की साढ़े साती लगी हुई है।

यह उन्हें 15 नवम्बर 2011 को शुरू हुई थी जो 23 जनवरी 2020 तक चलेगी। इसमें भी 3 नवम्बर 2014 को साढ़े साती अपने शिखर में पहुंच गई जो 26 अक्टूबर 2017 तक रहेगी। इसके बाद वह अपने अस्तकाल में आ जाएगी।

मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को गुजरात के बडऩगर में सुबह 10 बजे हुआ था। इस हिसाब से उनकी राशि तुला है। उनकी कुंडली के ग्यारहवें घर में शुक्र और शनि साथ बैठे हैं जिसके कारण ही वह भौतिक सुख-संपदा और उच्च आध्यात्मिक अनुभवों का एक साथ लाभ उठा पाते हैं।

शनि की साढे साती का है यह कमाल

इसके साथ ही उन्हें चन्द्रमा की महादशा और राहू की अन्र्तदशा चल रही है, जिसके कारण उन्हें राजनीति में स्थातित्व मिल रहा है। वर्ष 2014 के अंत में राहू और केतु की गोचर दशा नकारात्मक होने के कारण ही उन्हें दिल्ली तथा बिहार विधानसभा चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा। मोदी के नेतृत्व में विधानसभा चुनावों में आखिरी बार जीत जम्मू-कश्मीर में हुई। वहां भी नवंबर में चुनाव हुए जबकि शनि की साढ़े साती अपने शिखर चरण में प्रवेश कर रही थी, यही कारण रहा कि भाजपा को जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन कर सरकार बनानी पड़ी।

2017 तक हारेंगे हर चुनाव

इसके बाद फरवरी 2015 में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव तथा हाल ही के बिहार विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा। इस समय राहू 12वें घर में केतु तथा सूर्य से युति करेगा जिसके फलस्वरूप उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए जाएंगे।

साथ ही शनि गोचर में चन्द्रमा के साथ युति करेगा जिसके चलते भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भी बहुत बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। लोगों को कोई बड़ा आश्चर्य नहीं होना चाहिए यदि 2017 तक भाजपा किसी भी राज्य में कोई विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाए, हां वह मुख्य विपक्षी दल के रूप में जरूर उभरेगी।

दोस्तों के भेष में दुश्मन होंगे उनके साथ

इसके साथ ही मोदी के पुराने अच्छे साथी भी उनका साथ छोड़ देंगे। हाल ही में हम अरुण शौरी, राम जेठमलानी के रूप में इसकी हकीकत भी देख चुके हैं। हालांकि 9वें घर पर धर्म की दृष्टि होने से वह धार्मिक बने रहेंगे और निकट भविष्य में देश को और आगे ले जाएंगे।

सबसे बड़ी बात उनकी पार्टी के अंदरूनी साथी ही उनके दुश्मन बनेंगे और उन्हें डुबोने का काम कर रहे हैं। यदि भविष्य में मोदी पर किसी तरह का कोई संकट आता भी है तो इन ग्रह-नक्षत्रों के कारण उसके जिम्मेदार उनकी अपनी पार्टी के लोग होंगे जो गुप्त रूप से उनके खिलाफ अभियान चला रहे होंगे।

बना रहेगा उनके जीवन पर खतरा

बहुत संभव है कि वह इस दौरान किसी हादसे का शिकार भी हो जाएं। उनकी स्वास्थ्य के साथ साथ उनके जीवन के लिए भी लगातार खतरा बना रहेगा। अक्टूबर 2017 में उनकी साढ़े साती अपने अस्त चरण में प्रवेश कर जाएगी, तभी से उनकी मुश्किलें समाप्त होना शुरू हो जाएंगी और 2019 में साढ़े साती के हटते ही वह पूर्ण रूप से पूरी ताकत से फिर उभरेंगे।