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Thursday, 9 August 2012

A poem by Surya Kant Tripathi Nirala...15512

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।


नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,


चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है ।


मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,


चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है ।


आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,


कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।




डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,


जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है ।


मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,


बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में ।


मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,


कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।




असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,


क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो ।


जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,


संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम ।


कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,


कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।





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